270 कम बारिश वाले जिलों में किसानों की मदद: शिवराज सिंह चौहान ने दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर देश के 270 संवेदनशील और कम वर्षा वाले जिलों में कृषि गतिविधियों की सतत निगरानी करें। साथ ही, खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद और बीज की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में क्या हुई समीक्षा
इस उच्चस्तरीय बैठक में खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति, अल-नीनो के संभावित प्रभाव, मानसून की वर्तमान स्थिति और देश भर के जलाशयों में जल भंडारण की विस्तृत समीक्षा की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों और NDVI (नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स) जैसे उपग्रह-आधारित संकेतकों के आधार पर फसलों की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
बैठक में यूरिया सहित अन्य खादों और बीजों की उपलब्धता व वितरण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए खाद और बीजों की पर्याप्त व्यवस्था की जा चुकी है और राज्यों के साथ निरंतर समन्वय के ज़रिए आपूर्ति की निगरानी जारी है।
मंत्री के प्रमुख निर्देश
चौहान ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जमीनी स्थिति की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और राज्य सरकारों से सीधे ली जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकतानुसार खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो और वितरण व्यवस्था में कोई भी कमी तत्काल दूर की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि दाल, तिलहन और कपास मिशनों द्वारा राज्य सरकारों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँ और जमीनी फीडबैक के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
बुवाई की स्थिति और वर्षा की कमी
बैठक में बताया गया कि 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई का रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। यद्यपि पिछले वर्ष की तुलना में कुल बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, तथापि कई राज्यों में धान, दालों और अन्य फसलों की बुवाई में उत्साहजनक प्रगति देखी गई है।
मानसून के विस्तार के संदर्भ में बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई 2026 को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों को कवर करते हुए पूरे देश में अपना विस्तार पूरा किया — सामान्य तिथि (8 जुलाई) से मात्र एक दिन की देरी से।
वर्षा की कमी: क्षेत्रवार आँकड़े
1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में औसत वर्षा सामान्य से 23 प्रतिशत कम रही। इस अवधि में 227 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होती है।
क्षेत्रवार देखें तो सबसे गंभीर स्थिति पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में रही, जहाँ सामान्य 540.2 मिमी के मुकाबले केवल 348 मिमी वर्षा हुई — यानी 36 प्रतिशत की कमी। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 26 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 19 प्रतिशत और मध्य भारत में 13 प्रतिशत की वर्षा कमी दर्ज की गई।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब अल-नीनो की परिस्थितियाँ मानसूनी वर्षा को प्रभावित कर सकती हैं और खरीफ उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। केंद्र सरकार की यह सक्रियता संकेत देती है कि कृषि संकट को प्रारंभिक चरण में ही रोकने की कोशिश की जा रही है। आने वाले हफ्तों में KVK और राज्य एजेंसियों से मिलने वाले जमीनी फीडबैक यह तय करेंगे कि राहत उपायों की दिशा और गति क्या होगी।