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270 कम बारिश वाले जिलों में किसानों की मदद: शिवराज सिंह चौहान ने दिए सख्त निर्देश

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270 कम बारिश वाले जिलों में किसानों की मदद: शिवराज सिंह चौहान ने दिए सख्त निर्देश

सारांश

देश में मानसून सामान्य से 23% पीछे है और 270 जिले संवेदनशील हैं — ऐसे में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद-बीज आपूर्ति और साप्ताहिक समीक्षा का सख्त निर्देश देकर खरीफ सीजन को बचाने की कोशिश तेज कर दी है।

मुख्य बातें

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 जुलाई 2026 को उच्चस्तरीय बैठक में 270 संवेदनशील जिलों की निगरानी के निर्देश दिए।
17 जुलाई 2026 तक खरीफ बुवाई रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर — पिछले वर्ष से कम, लेकिन कई राज्यों में प्रगति संतोषजनक।
1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में वर्षा सामान्य से 23% कम ( 227 मिमी बनाम सामान्य 294.2 मिमी )।
सबसे अधिक कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में — 36% वर्षा घाटा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई को पूरे देश को कवर किया — सामान्य तिथि से एक दिन की देरी।
दाल, तिलहन और कपास मिशनों को राज्यों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर देश के 270 संवेदनशील और कम वर्षा वाले जिलों में कृषि गतिविधियों की सतत निगरानी करें। साथ ही, खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद और बीज की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में क्या हुई समीक्षा

इस उच्चस्तरीय बैठक में खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति, अल-नीनो के संभावित प्रभाव, मानसून की वर्तमान स्थिति और देश भर के जलाशयों में जल भंडारण की विस्तृत समीक्षा की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों और NDVI (नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स) जैसे उपग्रह-आधारित संकेतकों के आधार पर फसलों की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।

बैठक में यूरिया सहित अन्य खादों और बीजों की उपलब्धता व वितरण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए खाद और बीजों की पर्याप्त व्यवस्था की जा चुकी है और राज्यों के साथ निरंतर समन्वय के ज़रिए आपूर्ति की निगरानी जारी है।

मंत्री के प्रमुख निर्देश

चौहान ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जमीनी स्थिति की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और राज्य सरकारों से सीधे ली जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकतानुसार खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो और वितरण व्यवस्था में कोई भी कमी तत्काल दूर की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि दाल, तिलहन और कपास मिशनों द्वारा राज्य सरकारों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँ और जमीनी फीडबैक के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

बुवाई की स्थिति और वर्षा की कमी

बैठक में बताया गया कि 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई का रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। यद्यपि पिछले वर्ष की तुलना में कुल बुवाई क्षेत्र में कमी आई है, तथापि कई राज्यों में धान, दालों और अन्य फसलों की बुवाई में उत्साहजनक प्रगति देखी गई है।

मानसून के विस्तार के संदर्भ में बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई 2026 को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों को कवर करते हुए पूरे देश में अपना विस्तार पूरा किया — सामान्य तिथि (8 जुलाई) से मात्र एक दिन की देरी से।

वर्षा की कमी: क्षेत्रवार आँकड़े

1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में औसत वर्षा सामान्य से 23 प्रतिशत कम रही। इस अवधि में 227 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होती है।

क्षेत्रवार देखें तो सबसे गंभीर स्थिति पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में रही, जहाँ सामान्य 540.2 मिमी के मुकाबले केवल 348 मिमी वर्षा हुई — यानी 36 प्रतिशत की कमी। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 26 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 19 प्रतिशत और मध्य भारत में 13 प्रतिशत की वर्षा कमी दर्ज की गई।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब अल-नीनो की परिस्थितियाँ मानसूनी वर्षा को प्रभावित कर सकती हैं और खरीफ उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। केंद्र सरकार की यह सक्रियता संकेत देती है कि कृषि संकट को प्रारंभिक चरण में ही रोकने की कोशिश की जा रही है। आने वाले हफ्तों में KVK और राज्य एजेंसियों से मिलने वाले जमीनी फीडबैक यह तय करेंगे कि राहत उपायों की दिशा और गति क्या होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह तंत्र ज़मीन पर उतरेगा — या केवल बैठकों तक सीमित रहेगा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 36% वर्षा घाटा चिंताजनक है, क्योंकि यह क्षेत्र धान उत्पादन की रीढ़ है। गौरतलब है कि अल-नीनो के वर्षों में खरीफ उत्पादन में गिरावट का सीधा असर खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ता है — और वह बोझ सबसे पहले उन्हीं किसानों पर आता है जिनकी मदद का दावा किया जा रहा है। KVK और राज्य एजेंसियों की क्षमता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना यह ढाँचा कागज़ी ही रहेगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने 270 कम बारिश वाले जिलों के किसानों के लिए क्या कदम उठाए हैं?
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 जुलाई 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया कि 270 संवेदनशील जिलों में कृषि गतिविधियों की सतत निगरानी की जाए और किसानों को खाद व बीज की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। KVK और राज्य सरकारों से जमीनी फीडबैक लेकर वितरण की कमियाँ तत्काल दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
2026 में मानसून की स्थिति कैसी है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई 2026 को पूरे देश को कवर किया — सामान्य तिथि 8 जुलाई से एक दिन की देरी से। 1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में औसत वर्षा सामान्य से 23% कम रही, जिसमें पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक 36% की कमी दर्ज की गई।
खरीफ 2026 में बुवाई की प्रगति कैसी है?
17 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल रकबे में कमी आई है, हालाँकि कई राज्यों में धान, दालों और अन्य फसलों की बुवाई में अच्छी प्रगति देखी गई है।
खाद और बीज की आपूर्ति को लेकर क्या व्यवस्था की गई है?
सरकार के अनुसार खरीफ 2026 के लिए यूरिया सहित सभी प्रमुख खादों और बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है। राज्यों के साथ निरंतर समन्वय के ज़रिए आपूर्ति की निगरानी की जा रही है और वितरण में कमी पाए जाने पर तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
अल-नीनो का खरीफ फसलों पर क्या असर हो सकता है?
बैठक में अल-नीनो की संभावित परिस्थितियों की समीक्षा की गई, जो मानसूनी वर्षा को प्रभावित कर सकती हैं। IMD के पूर्वानुमानों और NDVI संकेतकों के आधार पर 270 संवेदनशील जिलों की फसल स्थिति पर नज़र रखी जा रही है ताकि समय रहते राहत उपाय किए जा सकें।
राष्ट्र प्रेस
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