26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

त्रिपुरा ने ₹17 करोड़ के जैविक उत्पादों का निर्यात किया, मंत्री रतन लाल नाथ बोले — माँग लगातार बढ़ रही है

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
त्रिपुरा ने ₹17 करोड़ के जैविक उत्पादों का निर्यात किया, मंत्री रतन लाल नाथ बोले — माँग लगातार बढ़ रही है

सारांश

त्रिपुरा ने ₹17 करोड़ के जैविक उत्पाद निर्यात किए और किसान उत्पादक कंपनियों की संख्या 2 से बढ़ाकर 53 कर दी। MOVCDNER के तहत ₹234 करोड़ की केंद्रीय परियोजना राज्य के जैविक कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में ₹17 करोड़ मूल्य के जैविक कृषि उत्पादों का निर्यात किया।
किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) की संख्या 2018 से पहले 2 से बढ़कर अब 53 हो गई है।
राज्य कालीखासा चावल, क्वीन अनानास, बर्ड्स आई मिर्च, अदरक और तिल जैसी उच्च मूल्य वाली जैविक फसलों पर केंद्रित है।
मंत्री रतन लाल नाथ ने 8 जून को दिल्ली के लिए 1,000 क्वींस अनानास की खेप रवाना की।
विपणन और प्रसंस्करण अवसंरचना के लिए MDONER के सहयोग से ₹234 करोड़ की परियोजना कार्यान्वित हो रही है।

त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने सोमवार, 8 जून को घोषणा की कि राज्य ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में ₹17 करोड़ मूल्य के जैविक कृषि उत्पादों का निर्यात किया है। अगरतला में आयोजित एक समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के जैविक उत्पादों की माँग में निरंतर वृद्धि हो रही है और राज्य सरकार इस गति को और तेज़ करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

समीक्षा बैठक और पृष्ठभूमि

मंत्री रतन लाल नाथ ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (MOVCDNER) परियोजना के तहत जैविक कृषि उत्पादों के उत्पादन, विपणन और विस्तार पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक त्रिपुरा राज्य कृषि अनुसंधान केंद्र, अरुंधतिनगर, अगरतला में आयोजित हुई। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए जैविक किसानों और किसान-उत्पादक संगठनों (FPO) के प्रतिनिधियों के साथ भी सीधी बातचीत की।

किसान उत्पादक कंपनियों में उल्लेखनीय वृद्धि

मंत्री ने बताया कि 2018 से पहले त्रिपुरा में केवल दो किसान उत्पादक कंपनियाँ (FPC) थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 53 हो गई है। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उनके जीवन स्तर में सुधार करना है। मिट्टी की सेहत बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए हम जैविक खेती पर विशेष जोर दे रहे हैं।" यह वृद्धि राज्य में जैविक कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार का प्रमाण मानी जा रही है।

प्रमुख जैविक फसलें और निर्यात खेप

राज्य जिन उच्च मूल्य वाली जैविक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, उनमें कालीखासा चावल, हरिनारायण चावल, सुगंधित नींबू, अनानास की क्वीन और क्यू किस्में, बर्ड्स आई मिर्च, अदरक, हल्दी और तिल शामिल हैं। बैठक के दिन ही मंत्री ने दिल्ली के लिए 1,000 क्वींस अनानास की एक खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा, "त्रिपुरा के उत्पाद पूरी तरह से जैविक हैं, और हमारे किसान गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।"

₹234 करोड़ की केंद्रीय परियोजना

मंत्री रतन लाल नाथ ने बताया कि विपणन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDONER) के सहयोग से ₹234 करोड़ की एक परियोजना कार्यान्वित की जा रही है। यह परियोजना त्रिपुरा के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से और गहराई से जोड़ने में सहायक होगी। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में जैविक खेती को बढ़ावा देना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

आगे की राह

कृषि विभाग और किसान-उत्पादक संगठन मिलकर जैविक खेती के पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ करने में जुटे हैं। मंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में बर्ड्स आई मिर्च, अदरक और अनानास जैसे उत्पादों के लिए नए बाज़ार खोजे जाएँगे और किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य जैविक खेती के विस्तार के ज़रिए हासिल किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है — राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के पैमाने पर यह अभी भी शुरुआती चरण है। FPC की संख्या का 2 से 53 होना संस्थागत ढाँचे की मज़बूती का संकेत है, परंतु असली परीक्षा यह है कि ये संगठन किसानों को उचित मूल्य दिलाने में कितने सफल हो रहे हैं। ₹234 करोड़ की केंद्रीय परियोजना अवसंरचना की खाई पाटने का वादा करती है, लेकिन पूर्वोत्तर में ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन ऐतिहासिक रूप से धीमा रहा है। जब तक प्रमाणन, कोल्ड चेन और सीधी बाज़ार पहुँच की व्यवस्था नहीं बनती, 'जैविक' का लेबल किसान की आय में वास्तविक बदलाव नहीं लाएगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा ने कितने मूल्य के जैविक उत्पादों का निर्यात किया है?
त्रिपुरा के कृषि विभाग ने अब तक देश के विभिन्न राज्यों और विदेशी गंतव्यों को ₹17 करोड़ मूल्य के जैविक उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाया है। मंत्री रतन लाल नाथ ने यह जानकारी 8 जून को अगरतला में एक समीक्षा बैठक के बाद दी।
MOVCDNER परियोजना क्या है और त्रिपुरा को इससे क्या लाभ है?
MOVCDNER यानी पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन एक केंद्र सरकार की योजना है जो पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देती है। त्रिपुरा इस मिशन के तहत उत्पादन, विपणन और मूल्यवर्धन की क्षमता बढ़ा रहा है।
त्रिपुरा में किसान उत्पादक कंपनियों की संख्या कितनी है?
2018 से पहले त्रिपुरा में केवल दो किसान उत्पादक कंपनियाँ (FPC) थीं, जो अब बढ़कर 53 हो गई हैं। यह वृद्धि राज्य में जैविक कृषि संस्थागत ढाँचे के विस्तार को दर्शाती है।
त्रिपुरा की कौन-सी जैविक फसलें सबसे अधिक माँग में हैं?
त्रिपुरा के बर्ड्स आई मिर्च, अदरक, हल्दी, अनानास (क्वीन और क्यू किस्में), कालीखासा चावल, हरिनारायण चावल और सुगंधित नींबू की माँग घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में बढ़ रही है। 8 जून को दिल्ली के लिए 1,000 क्वींस अनानास की खेप रवाना की गई।
त्रिपुरा में जैविक कृषि अवसंरचना के लिए कितनी राशि खर्च की जा रही है?
विपणन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए केंद्र सरकार और MDONER के सहयोग से ₹234 करोड़ की एक परियोजना कार्यान्वित की जा रही है। इसका उद्देश्य त्रिपुरा के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले