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क्या भारत बनेगा विश्व का 'फूड बास्केट'? : कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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क्या भारत बनेगा विश्व का 'फूड बास्केट'? : कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई योजनाओं 'धन-धान्य कृषि योजना' और 'दलहन आत्मनिर्भर मिशन' से किसानों को मिली उम्मीदों के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया। जानिए उनकी बातचीत के प्रमुख अंशों में क्या कहा गया।

मुख्य बातें

‘धन-धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भर मिशन’ किसानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर हैं।
दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य 2030-31 तक है।
बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की गई है।
एफपीओ के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
नकली उत्पादों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई जारी है।

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ की गई ‘धन-धान्य कृषि योजना' और ‘दलहन आत्मनिर्भर मिशन' किसानों के लिए नई आशा लेकर आई है। इस संदर्भ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजनाओं, किसानों की चुनौतियों और सरकार की भविष्य की योजनाओं पर न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस के साथ विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं कृषि मंत्री के साथ बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश।

सवाल - प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भर मिशन की शुरुआत की है। ये योजनाएं किसानों के लिए कितनी महत्वपूर्ण साबित होंगी?

जवाब - ये योजनाएं किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारे देश के कुछ जिलों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन उच्च है, लेकिन कई ऐसे जिले भी हैं जहां उत्पादन स्तर कम है। हमने इन्हीं कम उत्पादकता वाले, पिछड़े और सिंचाई से वंचित जिलों को चुना है। वहां पर 11 विभागों की 36 योजनाएं सामूहिक रूप से कार्य करेंगी। इससे न केवल किसानों की उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि देश का कुल उत्पादन भी बढ़ेगा।

इसके साथ ही, दलहन में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता है। आज भारत गेहूं और चावल में आत्मनिर्भर है, लेकिन दालों के मामले में हमें अभी भी विदेशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। दलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। हमारा लक्ष्य 2030-31 तक दलहन में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना है, जिससे किसानों और देश दोनों को लाभ होगा।

सवाल - दलहन में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसका मुख्य कारण क्या है?

जवाब - इसका एक प्रमुख कारण यह है कि देश की बड़ी जनसंख्या शाकाहारी है और प्रोटीन के लिए दालों पर निर्भर है। दूसरी बात, भारत में समृद्धि बढ़ रही है, जिससे दालों की खपत भी बढ़ रही है। तीसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि में विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) आवश्यक है। यदि हम लगातार गेहूं और चावल की खेती करेंगे तो मिट्टी की उर्वरता कम हो जाएगी, लेकिन दालें नाइट्रोजन को स्थिर करती हैं और मिट्टी को स्वस्थ बनाए रखती हैं। इसलिए दलहन की खेती को बढ़ाना आवश्यक है।

सवाल - हाल ही में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आपने दौरा किया था। किसानों को क्या राहत मिली? सरकार की क्या भूमिका रही?

जवाब - हम किसानों के बीच गए, उनके घरों में जाकर उनके साथ खड़े रहे। प्रधानमंत्री ने पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपए का राहत पैकेज दिया है। मैं स्वयं 14 अक्टूबर को पंजाब जा रहा हूं। बाढ़ में जो मकान ध्वस्त हुए हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फंड उपलब्ध कराए जाएंगे।

इसके अलावा, सिल्ट जमा होने की समस्या को समाप्त करने के लिए भी योजनाएं लागू की जा रही हैं। ये कार्य राज्य सरकार के सहयोग से किए जा रहे हैं क्योंकि हमारे देश का प्रशासनिक ढांचा संघीय है। हम किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

सवाल - अधिकारी और मंत्री खेतों में जाकर किसानों के साथ संवाद करते हैं। इस काम के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?

जवाब - जो लोग इस सेवा का हिस्सा बनते हैं, वे देश और किसानों की सेवा करते हैं। चाहे मंत्री हों, अधिकारी हों या मुख्यमंत्री, हमारा धर्म है किसानों की सेवा करना। खेतों में जाकर समस्याओं को समझना आवश्यक है, फाइलों में बैठकर खेती नहीं समझी जा सकती। हमें दिन-रात मेहनत करनी होगी क्योंकि देश की 46 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है।

सवाल - 2014 से अब तक कृषि उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी हुई है और भविष्य की योजनाएं क्या हैं?

जवाब - हमने गेहूं और चावल का उत्पादन इतना बढ़ा दिया है कि अब हमारे पास भंडारण की कमी हो रही है। हम निर्यात भी कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारत को विश्व का फूड बास्केट बनाना। हम निरंतर कृषि उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

सवाल - नकली खाद और घटिया बीजों को लेकर सरकार की क्या रणनीति है?

जवाब - नकली खाद, घटिया बीज और कीटनाशक किसानों के साथ धोखा है। इसे हम बड़ा पाप मानते हैं। इसलिए सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है। फैक्ट्री सीलिंग से लेकर बड़े पैमाने पर छापेमारी की जा रही है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा क्योंकि किसानों के हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता है।

सवाल - क्या एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) का लाभ किसानों तक पहुंच पा रहा है?

जवाब - बिल्कुल। आज 52 लाख से अधिक किसान एफपीओ से जुड़े हैं। लगभग 1,100 एफपीओ बन चुके हैं। इनका टर्नओवर 15,000 करोड़ रुपए से अधिक है। एफपीओ किसानों को बेहतर दाम दिलाने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। हम इसे और ज्यादा किसानों तक पहुंचाना चाहते हैं।

सवाल - सरकार दलहन कैसे खरीदेगी और राज्यों की भूमिका क्या होगी?

जवाब - कृषि की जमीन तो राज्यों की है, इसलिए राज्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। केंद्र ने गेहूं, चावल के लिए एमएसपी के तहत खरीद सुनिश्चित की है। अब उड़द, मसूर, अरहर जैसी दालों की भी खरीद एमएसपी पर की जाएगी, खासकर उन किसानों से जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया है। एमएसपी भी पिछले वर्षों में कई गुना बढ़ाया गया है। राज्यों को इस प्रक्रिया में सक्रिय होना होगा।

सवाल - अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत कितना सक्षम है?

जवाब - प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा है कि हम किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे। राष्ट्रहित सर्वोपरि है।

सवाल - क्या भारत की कृषि मार्केट में अमेरिका की एंट्री संभव है?

जवाब - कोई भी निर्णय किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही होगा। हमारे छोटे किसान हमारी प्राथमिकता हैं। उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

सवाल - दिल्ली एनसीआर में पराली जलाने की समस्या काफी गंभीर है। सरकार ने इस मुद्दे को कैसे संभाला है?

जवाब - पराली जलाना सही नहीं है। हम किसानों को पराली को खेत में मिलाकर खाद बनाने और डायरेक्ट सीडिंग के लिए प्रेरित कर रहे हैं। राज्य सरकारों के साथ मिलकर कस्टम मशीनें उपलब्ध करवा रहे हैं ताकि किसान पराली जलाने से बचें और उसका सही उपयोग करें।

सवाल - स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग को आप कैसे बढ़ावा दे रहे हैं?

जवाब - आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग आवश्यक है। मैं स्वयं भी जनता को स्वदेशी अपनाने की सलाह देता हूं। ‘जोहो’ जैसे प्लेटफॉर्म पर आना स्वदेशी का प्रतीक है।

सवाल - मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद है। आपकी क्या राय है?

जवाब - वहां की सरकार ने अपने पक्ष को रखा है।

सवाल - राहुल गांधी के विदेश यात्रा पर क्या कहेंगे?

जवाब - वे देश में कम रहते हैं और विदेशों में ज्यादा। उन्हें भारत की संस्कृति और मूल्यों से लगाव नहीं दिखता। अपने देश की आलोचना करना सही नहीं है।

सवाल - बिहार चुनाव को लेकर आपकी क्या उम्मीदें हैं?

जवाब - बिहार में मखाना बोर्ड के गठन से लेकर आम आदमी की जिंदगी बदलने तक का काम बहुत अच्छे तरीके से हुआ है। बिहार में फिर से डबल इंजन की सरकार बनेगी।

सवाल - बंगाल में भाजपा सांसदों पर हुए हमलों को लेकर क्या कहेंगे?

जवाब - बंगाल की स्थिति चिंताजनक है। मैं फिलहाल राष्ट्रपति शासन पर टिप्पणी नहीं करूंगा।

सवाल - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 वर्षों के राजनीतिक सेवा पर आपकी क्या राय है?

जवाब - प्रधानमंत्री मोदी का जीवन पूरी तरह देश की सेवा के लिए समर्पित है। 24 साल से वे निरंतर देश और राज्य की सेवा कर रहे हैं। उनके जैसा नेता मिलना भारत के लिए सौभाग्य की बात है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत बनाएंगी। इस दिशा में उठाए गए कदमों का उद्देश्य किसानों की समस्याओं का समाधान करना है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धन-धान्य कृषि योजना क्या है?
यह योजना किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए संसाधन और समर्थन प्रदान करती है।
दलहन आत्मनिर्भर मिशन का उद्देश्य क्या है?
इस मिशन का उद्देश्य भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
किसानों को बाढ़ राहत के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार ने बाढ़ पीड़ित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है।
एफपीओ का क्या लाभ है?
एफपीओ किसानों को बेहतर दाम और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं।
नकली खाद और बीजों के खिलाफ सरकार की क्या कार्रवाई है?
सरकार ने ऐसे उत्पादों के खिलाफ कठोर कार्रवाई शुरू की है।
राष्ट्र प्रेस
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