सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी पूर्वोत्तर में कृषि इनोवेशन का केंद्र: मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने 22 जून 2026 को इंफाल स्थित सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (सीएयू) को पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्टता का प्रमुख केंद्र घोषित किया। उन्होंने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और टिकाऊ विकास में विश्वविद्यालय की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करते हुए इसे पूर्वोत्तर की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।
तीन परिषदों का औपचारिक उद्घाटन
राज्यपाल सिंह ने 22 से 24 जून 2026 तक आयोजित सीएयू की तीन महत्वपूर्ण परिषद बैठकों — रिसर्च काउंसिल, एक्सटेंशन एजुकेशन काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल — का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ये तीनों परिषदें लैब, फील्ड और क्लासरूम को एकीकृत कर 'लैब से जमीन तक' शिक्षा के मूल दर्शन को साकार करती हैं।
मिजोरम की अर्थव्यवस्था बदलने की दृष्टि
राज्यपाल ने सीएयू के नीति दस्तावेज 'मिजोरम की अर्थव्यवस्था में बदलाव: 2047 तक 540 मिलियन अमेरिकी डॉलर से 6,394 मिलियन अमेरिकी डॉलर' की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिवर्तन तभी संभव है जब सभी संबंधित पक्ष केवल उत्पादन के बजाय किसानों की आमदनी पर केंद्रित हों। उन्होंने जिलों और समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने और समावेशी विकास की आवश्यकता पर भी बल दिया।
विकसित भारत 2047 और कृषि की भूमिका
सिंह ने खेती और संबद्ध क्षेत्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला बताते हुए कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में ये क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और किसानों से आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की। साथ ही तकनीकी विकास के साथ-साथ वैल्यू एडिशन, उद्यमशीलता, टिकाऊ आजीविका, बाज़ार से जुड़ाव और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, 'नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र और एक समृद्ध विकसित भारत का भविष्य आपकी लैब में तैयार होगा, आपकी क्लास में पढ़ाया जाएगा और हमारे खेतों में उसकी फसल काटी जाएगी।'
सीएयू की व्यापक उपस्थिति और उपलब्धियाँ
सीएयू के कुलपति अनुपम मिश्रा ने विश्वविद्यालय को भारत के अग्रणी कृषि संस्थानों में गिनाते हुए पूर्वोत्तर की जैव-विविधता से उत्पन्न अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सीएयू इस क्षेत्र में 13 कॉलेज, 6 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), 6 मल्टी-टेक्नोलॉजी टेस्टिंग सेंटर और 6 वोकेशनल ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर संचालित करता है।
नई तकनीकें, उत्पाद और किसानों को सहायता
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल सिंह ने कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस, तुरा (मेघालय) द्वारा विकसित तीन उत्पाद — स्ट्रॉबेरी जैम, लीची जैम और मैंगो किंग चिली सॉस — प्राइम रूरल, शिलांग को हस्तांतरित किए। उन्होंने कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस, तुरा और आईसीएआर-सीआईसीआर, नागपुर के संयुक्त प्रयास से तैयार चार 'कोमिला कॉटन मेडिटेक' उत्पाद भी लॉन्च किए।
आइजोल, सैतुअल, सेरछिप और चम्फाई जिलों के किसानों को लैवेंडर और धनिया के बीज वितरित किए गए तथा सीएयू के सात नए प्रकाशन जारी किए गए। यह आयोजन पूर्वोत्तर में कृषि-आधारित उद्यमशीलता को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।