20 सितंबर 2026
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पूर्वोत्तर भारत इंजीनियरिंग नवाचार की 'जीवंत प्रयोगशाला' बन सकता है: मिजोरम राज्यपाल जनरल वीके सिंह

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पूर्वोत्तर भारत इंजीनियरिंग नवाचार की 'जीवंत प्रयोगशाला' बन सकता है: मिजोरम राज्यपाल जनरल वीके सिंह

सारांश

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि पूर्वोत्तर का दुर्गम भूभाग इंजीनियरिंग की 'जीवंत प्रयोगशाला' बन सकता है। 'विकसित भारत 2047' के संदर्भ में उन्होंने इंजीनियरों से तकनीकी गहराई और सिस्टम्स थिंकिंग को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

मुख्य बातें

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इंजीनियरिंग समिट को संबोधित किया।
उन्होंने पूर्वोत्तर भारत को इंजीनियरिंग नवाचार की 'जीवंत प्रयोगशाला' बताया।
इंजीनियरों से 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।
इंजीनियरिंग शिक्षा को डिग्रियों की संख्या नहीं , बल्कि निर्माण-क्षमता के आधार पर आँकने की बात कही।
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के 2.6 लाख से अधिक सदस्य 15 क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं; संस्था 1920 में स्थापित हुई थी।

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह (सेवानिवृत्त) ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि पूर्वोत्तर भारत का दुर्गम भूभाग, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जटिल चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं, लेकिन साथ ही ये नवाचार के असाधारण अवसर भी उपलब्ध कराती हैं। वे एससीओपीई कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित 'इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) इंडस्ट्री एंड एजुकेशन एक्सीलेंस समिट एंड अवार्ड-2026' को संबोधित कर रहे थे।

पूर्वोत्तर: इंजीनियरिंग की जीवंत प्रयोगशाला

राज्यपाल जनरल वीके सिंह ने कहा, 'पूर्वोत्तर क्षेत्र मुश्किल इलाकों में मज़बूत इंजीनियरिंग के लिए एक लिविंग लैबोरेटरी बन सकता है।' उन्होंने विशेष रूप से मिजोरम का उदाहरण देते हुए कहा कि यह राज्य यह सिद्ध करता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जो भौगोलिक विषमताओं के अनुरूप हो, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर सके और डिजिटल रूप से सक्षम हो। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के बुनियादी ढाँचे के विस्तार पर विशेष ज़ोर दे रही है।

विकसित भारत 2047 और इंजीनियरों की भूमिका

जनरल सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य मज़बूती से इंजीनियरों के हाथों में है और उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने की दिशा में इंजीनियरों से सक्रिय योगदान का आह्वान किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत अब केवल बाज़ार तक पहुँचने की दौड़ में नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी नेतृत्व और तकनीकी सुदृढ़ता के क्षेत्र में भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उतर चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा का विशाल भंडार है, जिसका सही दिशा में उपयोग भारतीय इंजीनियरिंग को गुणवत्ता, विश्वसनीयता और भरोसे का पर्याय बना सकता है।

प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों पर ज़ोर

राज्यपाल ने डिजिटल इंडिया, अंतरिक्ष कार्यक्रम, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, डिफेंस इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने इंजीनियरों से इन क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।

गुणवत्तापूर्ण इंजीनियरिंग शिक्षा की ज़रूरत

जनरल सिंह ने इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'भविष्य के इंजीनियर में तकनीकी गहराई और सिस्टम्स थिंकिंग का मेल होना चाहिए। इंजीनियरिंग शिक्षा को सिर्फ डिग्रियों की संख्या से नहीं, बल्कि इस आधार पर आँका जाना चाहिए कि वे इंजीनियर क्या बनाने में सक्षम हैं।' उन्होंने गुणवत्ता और मानकों को रणनीतिक संपत्ति बताते हुए कहा कि यही भारतीय तकनीक और प्रतिभा को वैश्विक भरोसा दिला सकता है।

समिट और संस्था का परिचय

यह समिट 'इंजीनियरिंग इंडियाज ग्लोबल फुटप्रिंट: टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रस्ट' थीम पर आयोजित की गई थी, जिसमें उद्योग जगत के नेता, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और इंजीनियरिंग पेशेवर एकजुट हुए। सन् 1920 में स्थापित इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) देश का सबसे बड़ा बहु-अनुशासनात्मक इंजीनियरिंग पेशेवर संगठन है, जिसके 2.6 लाख से अधिक कॉर्पोरेट सदस्य 15 इंजीनियरिंग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। आने वाले समय में इस मंच पर की गई अनुशंसाओं का असर पूर्वोत्तर के बुनियादी ढाँचे और इंजीनियरिंग नीति पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर बुनियादी ढाँचे की खाई अभी भी गहरी है। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे मंचों पर की गई अनुशंसाएँ नीतिगत बजट आवंटन और क्षेत्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों की क्षमता निर्माण में तब्दील होती हैं। इंजीनियरिंग शिक्षा को 'डिग्री-संख्या नहीं, निर्माण-क्षमता' के पैमाने पर आँकने की बात तो सराहनीय है, पर इसके लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन ढाँचे में ठोस बदलाव की दरकार है — जिसका कोई ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह ने इंजीनियरिंग समिट में क्या कहा?
जनरल वीके सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत का दुर्गम भूभाग और रणनीतिक स्थिति इंजीनियरिंग नवाचार की 'जीवंत प्रयोगशाला' बन सकती है। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के लिए इंजीनियरों से तकनीकी गहराई और सिस्टम्स थिंकिंग अपनाने का आग्रह किया।
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) इंडस्ट्री एंड एजुकेशन एक्सीलेंस समिट 2026 क्या है?
यह नई दिल्ली के एससीओपीई कन्वेंशन सेंटर में आयोजित वार्षिक राष्ट्रीय समिट है, जिसका थीम 'इंजीनियरिंग इंडियाज ग्लोबल फुटप्रिंट: टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रस्ट' रहा। इसमें उद्योग नेता, नीति-निर्माता और इंजीनियरिंग पेशेवर वैश्विक स्तर पर भारत की इंजीनियरिंग भूमिका पर चर्चा के लिए एकत्रित हुए।
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) कितनी पुरानी संस्था है और इसके कितने सदस्य हैं?
यह संस्था 1920 में स्थापित हुई थी और भारत का सबसे बड़ा बहु-अनुशासनात्मक इंजीनियरिंग पेशेवर संगठन है। इसके 2.6 लाख से अधिक कॉर्पोरेट सदस्य 15 इंजीनियरिंग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जनरल वीके सिंह ने इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग शिक्षा को केवल दी गई डिग्रियों की संख्या से नहीं, बल्कि इंजीनियरों की वास्तविक निर्माण-क्षमता से आँका जाना चाहिए। भविष्य के इंजीनियर में तकनीकी गहराई और सिस्टम्स थिंकिंग का समन्वय होना ज़रूरी है।
पूर्वोत्तर भारत को इंजीनियरिंग नवाचार के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
राज्यपाल जनरल वीके सिंह के अनुसार, पूर्वोत्तर का दुर्गम इलाका, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति इंजीनियरिंग की जटिल चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं, जो एक साथ नवाचार के बड़े अवसर भी हैं। विशेष रूप से मिजोरम भू-अनुकूल, जलवायु-सह्य और डिजिटल-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत का जीवंत उदाहरण है।
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