मिजोरम में नशाखोरी पर लगाम: मुख्यमंत्री लालदुहोमा बोले — सड़कों पर दिखने वाली लत में आई उल्लेखनीय गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 25 जून 2026 को आइजोल में आयोजित एक उच्चस्तरीय चर्चा कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य में सड़कों पर दिखाई देने वाली नशाखोरी में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय सरकार, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों, नागरिक समाज संगठनों, चर्चों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों को दिया।
मुख्य घटनाक्रम
अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस की पूर्व संध्या पर आइजोल के डावरपुई मल्टीपरपज हॉल में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में जब यही दिवस मनाया गया था, तब आइजोल और जिला मुख्यालयों की सड़कों पर नशे के आदी लोगों का खुलेआम घूमना आम दृश्य था, जो सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से साझा होता था।
उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे अनेक लोग अब पुनर्वास कार्यक्रमों से सफलतापूर्वक गुजरकर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
सरकार की रणनीति और उठाए गए कदम
मुख्यमंत्री लालदुहोमा के अनुसार, इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए गए — सुरक्षा समन्वय समिति का गठन, ड्रग प्रिवेंशन कोर कमेटी का पुनर्गठन, विशेष मादक पदार्थ विरोधी अभियान, छात्रों के बीच जागरूकता कार्यक्रम, मीडिया अभियान और 'हुल्हलियाप शॉर्ट स्टे' जैसी पुनर्वास योजनाएं। राज्य के सबसे बड़े नागरिक समाज संगठन यंग मिजो एसोसिएशन (YMA) ने एक वर्ष लंबा नशा विरोधी अभियान चलाया और पूरे मिजोरम में एंटी-ड्रग्स स्क्वॉड सक्रिय रूप से संचालित किए।
सरकार ने मिजोरम सिनोड के सहयोग से सेथॉन जॉर्डन सेंटर सहित कई पुनर्वास केंद्रों के साथ साझेदारी कर उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत किया है। चर्चों को भी अपने समुदायों में जागरूकता और रोकथाम के प्रयास तेज करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
युवाओं और नागरिकों से अपील
युवाओं से विशेष रूप से नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध भी हों, तब भी लोगों में उन्हें ठुकराने का साहस और दृढ़ संकल्प होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अनेक लोग यह सोचकर नशे का प्रयोग शुरू करते हैं कि वे इसकी गिरफ्त में नहीं आएंगे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लत के शिकार हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि नशा न केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद करता है, बल्कि परिवारों को भी तबाह कर देता है और कई मामलों में समय से पहले मौत का कारण बनता है।
तस्करों की चालाकी पर चेतावनी
हालिया तस्करी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए लालदुहोमा ने कहा कि तस्कर अक्सर मिजो समाज की मददगार परंपरा और लोगों के भरोसे का दुरुपयोग करते हैं। वे अनजान लोगों से नशीले पदार्थों वाले पैकेट ढोने को कहते हैं, जिसके कारण कई निर्दोष लोग अनजाने में तस्करी के मामलों में फंसकर गिरफ्तार हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें।
कार्यक्रम में अन्य वक्ता और सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम को सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री लालरिनपुई, आबकारी एवं नारकोटिक्स मंत्री लालंघिंगलोवा हमार, विधायक के. लालदावंगलियाना और मुख्य सचिव खिल्ली राम मीणा ने भी संबोधित किया। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सामुदायिक नेता और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त रहने और मादक पदार्थों के दुरुपयोग तथा अवैध तस्करी के विरुद्ध अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यह संकल्प इस बात का संकेत है कि मिजोरम में नशामुक्ति की लड़ाई सरकारी दायरे से बाहर निकलकर एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रही है।