आंध्र प्रदेश में नशा तस्करी पर जीरो टॉलरेंस: चंद्रबाबू नायडू का संकल्प, 29,840 एकड़ में वैकल्पिक फसलें
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 26 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश में नशीली दवाओं की तस्करी के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पूरी दृढ़ता से लागू है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई राज्य के युवाओं के सपनों, स्वास्थ्य और भविष्य की रक्षा के लिए है।
मुख्यमंत्री का संकल्प
नायडू ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा, 'आंध्र प्रदेश में नशीली दवाओं को पनपने देने के दिन अब बीत चुके हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार तस्करों को न्याय के कटघरे में लाने के साथ-साथ नशे की लत से जूझ रहे लोगों को सम्मान के साथ पुनर्वास का अवसर देने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
मंत्री लोकेश की घोषणाएँ और प्रमुख पहलें
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री नारा लोकेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार आक्रामक कानून प्रवर्तन अभियानों, कड़ी सीमा निगरानी और व्यापक सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रमों के ज़रिये नशे के नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है।
लोकेश ने चैतन्यम अभियान का विशेष उल्लेख किया, जिसके तहत अल्लूरी सीताराम राजू जिले में गांजे की खेती पूरी तरह समाप्त की गई है। 29,840 एकड़ भूमि पर वैकल्पिक फसलें लगाई गई हैं और गांजे की खेती में लिप्त 325 परिवारों का पुनर्वास किया जा चुका है।
सरकार का व्यापक दृष्टिकोण
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल दमन नहीं, बल्कि कमज़ोर समुदायों के लिए वैध आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। सरकार ने प्रत्येक नागरिक, शिक्षण संस्थान और नागरिक समाज समूह से इस मिशन में सहयोग का आह्वान किया है।
आगे की राह
आंध्र प्रदेश सरकार का यह अभियान राज्य में नशामुक्त और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इन नीतियों की वास्तविक सफलता तभी मापी जा सकेगी जब ज़मीनी स्तर पर तस्करी के मामलों में ठोस कमी दर्ज हो।