सीएम चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र को लिखे पत्र, एक्वाकल्चर-तंबाकू किसानों के लिए माँगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों को अलग-अलग पत्र लिखकर राज्य के एक्वाकल्चर और तंबाकू किसानों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की माँग की। अमरावती से जारी इन पत्रों में झींगा उद्योग की बढ़ती लागत, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और तंबाकू निर्यातकों को मिल रहे असमान व्यापार माहौल जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
एक्वाकल्चर संकट: सोयाबीन मील और बढ़ती लागत
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री राजीव रंजन सिंह को लिखे पत्र में झींगा चारा बनाने वाली कंपनियों को जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) सोयाबीन मील आयात करने की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि झींगे के चारे में मुख्य कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले सोयाबीन मील की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने चारा उत्पादन की लागत को काफी ऊँचा कर दिया है, जिससे झींगा किसानों पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
नायडू ने याद दिलाया कि 2021 में भी झींगा चारा निर्माताओं को सीमित स्तर पर ऐसी आयात अनुमति दी गई थी। उन्होंने केंद्र से घरेलू कमी को पूरा करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने का अनुरोध किया।
इक्वाडोर की प्रतिस्पर्धा से भारतीय निर्यातकों पर दबाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि इक्वाडोर से झींगे के उत्पादन और निर्यात में तेज़ वृद्धि के कारण अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे प्रमुख बाज़ारों में भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो गई है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर झींगे की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर फिश मील के निर्यात को विनियमित करने की माँग की। नायडू ने बताया कि फिश मील पर वर्तमान में 5 प्रतिशत का निर्यात प्रोत्साहन मिलता है, जिससे घरेलू चारा निर्माताओं को यह सामग्री अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती है। उन्होंने माँग की कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) निर्यात को नियंत्रित करे और निर्यात की अनुमति देने से पहले घरेलू ज़रूरतें पूरी करना सुनिश्चित किया जाए।
अमरावती में एनएफडीबी क्षेत्रीय कार्यालय की माँग
एक अन्य पत्र में नायडू ने केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री से अमरावती में नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि 5 जून 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित सीफूड एक्सपोर्ट्स वर्कशॉप के दौरान केंद्रीय मंत्री ने इस कार्यालय की स्थापना का आश्वासन दिया था।
राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए नेक्कलु गाँव में 7.89 एकड़ सरकारी भूमि पहले ही आवंटित कर दी है, जहाँ क्षेत्रीय कार्यालय के साथ-साथ प्रशिक्षण केंद्र, फिशरीज पार्क और पब्लिक एक्वेरियम भी बनाए जाने हैं। नायडू ने कहा कि यह सुविधा 'ब्लू इकोनॉमी' के विकास के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगी।
तंबाकू किसानों के लिए आरओडीटीईपी और जीएसटी राहत की माँग
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से एफसीवी तंबाकू के निर्यात पर प्रोत्साहन देने का भी आग्रह किया। उन्होंने बताया कि ज़िम्बाब्वे और तंजानिया जैसे प्रतिस्पर्धी देश अपने निर्यातकों को सब्सिडी और शुल्क छूट देते हैं, जबकि भारतीय निर्यातकों को ऐसी कोई सहायता नहीं मिलती।
नायडू ने ध्यान दिलाया कि अगस्त 2021 में चाय, कॉफी और मसालों को आरओडीटीईपी स्कीम में शामिल किया गया था, लेकिन बिना प्रोसेस किए गए तंबाकू (एचएस कोड 2401) को इससे बाहर रखा गया। उन्होंने केंद्र से इस तंबाकू श्रेणी को तत्काल आरओडीटीईपी लाभ देने की माँग की।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने बिना प्रोसेस किए गए तंबाकू (एचएसएन कोड 2401) पर जीएसटी को 40 प्रतिशत से घटाकर 28 प्रतिशत करने का अनुरोध किया, जिससे आंध्र प्रदेश के लाखों तंबाकू किसानों, डीलरों और निर्यातकों को राहत मिल सकती है।
वित्त मंत्री को पत्र: जीएसटी कटौती और किसान क्रेडिट कार्ड टॉप-अप
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में नायडू ने एक्वाकल्चर क्षेत्र के लिए कई वित्तीय उपायों की माँग रखी। उन्होंने एक्वाकल्चर एरेटर पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का अनुरोध किया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक्वाकल्चर उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन टैरिफ को लेकर कानूनी अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और वित्त मंत्रालय से हस्तक्षेप की ज़रूरत है। नायडू ने एक्वाकल्चर किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ₹5 लाख के एकमुश्त टॉप-अप और एनएफडीबी के ज़रिए घरेलू विपणन हेतु ₹100 करोड़ के कॉर्पस फंड की भी माँग की।
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश भारत के कुल झींगा निर्यात में अग्रणी भूमिका निभाता है और राज्य का एक्वाकल्चर क्षेत्र लाखों मछुआरों और किसानों की आजीविका का आधार है। केंद्र की प्रतिक्रिया इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।