नशे के खिलाफ जंग में समाज की भागीदारी ज़रूरी: कन्नड़ अभिनेता विनय राजकुमार का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
कन्नड़ फिल्म अभिनेता विनय राजकुमार ने मैसूरु में 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी दिवस के अवसर पर कहा कि नशीली दवाओं के खतरे को जड़ से मिटाने के लिए केवल सरकारी तंत्र पर्याप्त नहीं है — समाज की सक्रिय जनभागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने नागरिकों से नशे की खरीद-फरोख्त और सेवन की किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने का आग्रह किया।
मुख्य संदेश: खरीदार नहीं, तो व्यापार नहीं
विनय राजकुमार ने कहा कि नशीली दवाओं के व्यापार की जड़ माँग में है। उनके अनुसार, 'यदि खरीदार नहीं होंगे, तो नशीली दवाओं का व्यापार स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में नशे की लत से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं और युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। उन्होंने समाज से एकजुट होकर इस समस्या के विरुद्ध सक्रिय रूप से काम करने का आह्वान किया।
पुनर्वास और सामाजिक स्वीकृति पर ज़ोर
अभिनेता ने इस बात पर विशेष बल दिया कि व्यक्तिगत, पारिवारिक या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से नशे की गिरफ्त में आने वाले लोगों को कलंकित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास के बाद लौटने वाले व्यक्तियों को 'नशेड़ी' का लेबल लगाने की बजाय उन्हें सामान्य नागरिक के रूप में समाज में वापस स्वीकार किया जाना चाहिए।
विनय राजकुमार के अनुसार, ऐसे व्यक्तियों को समर्थन और प्रोत्साहन मिले तो वे अपना जीवन फिर से संवार सकते हैं और समाज की मुख्यधारा में पुनः एकीकृत हो सकते हैं। गौरतलब है कि नशे की लत से उबरने वालों का सामाजिक पुनर्एकीकरण एक ऐसा पहलू है जिसे अक्सर नीतिगत बहसों में नज़रअंदाज़ किया जाता है।
आंध्र प्रदेश में जीरो टॉलरेंस नीति
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी इसी अवसर पर घोषणा की कि उनके राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तस्करी पर नकेल कसने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में नायडू ने कहा, 'इस अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी दिवस पर हमें याद दिलाया जाता है कि यह लड़ाई अंततः हमारे युवाओं, उनके सपनों, उनके स्वास्थ्य और उनके भविष्य के लिए है।'
चंद्रबाबू का संकल्प: पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य
मुख्यमंत्री नायडू ने यह भी कहा कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को हर संभव सहायता दी जाएगी ताकि वे सम्मान के साथ उबर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमारे राज्य में नशीली दवाओं को पनपने देने के दिन अब बीत चुके हैं।' आज आंध्र प्रदेश तस्करी के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता, पुनर्वास चाहने वालों के लिए आशा और हर परिवार के लिए एक सुरक्षित भविष्य का प्रतीक बनना चाहता है।
आगे की राह
विनय राजकुमार और चंद्रबाबू नायडू दोनों के बयान यह रेखांकित करते हैं कि नशे की समस्या से निपटने के लिए दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता और पुनर्वास-केंद्रित दृष्टिकोण भी ज़रूरी है। नागरिक सतर्कता और प्रशासनिक दृढ़ता का यह संयोजन ही दीर्घकालिक परिवर्तन ला सकता है।