12 जुलाई 2026
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क्या पंजाब में नशे के खिलाफ 'आप' का युद्ध निर्णायक होगा?

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क्या पंजाब में नशे के खिलाफ 'आप' का युद्ध निर्णायक होगा?

सारांश

पंजाब में नशे की समस्या पर कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल की बातें सुनकर एक नई उम्मीद जगी है। क्या यह कार्रवाई नशे के कारोबार पर लगाम लगा पाएगी? जानिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके विचार और सरकार की नीति।

मुख्य बातें

पंजाब सरकार का नशे के खिलाफ कड़ा रुख पूर्व सरकारों पर नशे के कारोबार में लापरवाही का आरोप युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की आवश्यकता

अमृतसर, 29 जून (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने रविवार को अमृतसर में मीडिया से बातचीत के दौरान नशे के खिलाफ राज्य सरकार की नीति को फिर से दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी नशा बेचता हुआ पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पंजाब में नशा एक गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट है, जिसने युवाओं के भविष्य को अंधकारमय कर दिया है।

धालीवाल ने कहा कि अकाली दल और भाजपा सरकार के दौरान पंजाब को नशे ने सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया। उनका आरोप था कि उस समय विक्रम मजीठिया कैबिनेट मंत्री थे और उनके कार्यकाल में नशे का कारोबार चरम पर पहुँच गया। उन्होंने कहा, "हमारा आधा से ज्यादा पंजाब खाली हो चुका है, युवा विदेश चले गए हैं, माता-पिता ने अपनी जमीनें गिरवी रख दीं ताकि उनके बच्चे इस जहर से बच सकें।" उन्होंने ईडी प्रमुख निरंजन सिंह और पूर्व डीजीपी चट्टोपाध्याय के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इन दोनों ने विक्रम मजीठिया को पूरी तरह से दोषी ठहराया है। कोर्ट ने मजीठिया को सात दिन की रिमांड दी थी, इसका मतलब है कि जांच में दम था, कोई झूठ नहीं था।

धालीवाल ने आम आदमी पार्टी से कुंवर विजय प्रताप सिंह के पांच साल के निष्कासन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन पार्टी के भीतर अनुशासन और गाइडलाइन का पालन करना आवश्यक है। यह निर्णय पार्टी हाईकमान, अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, अमन अरोड़ा, और मनीष सिसोदिया की सहमति से लिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर रहते हुए शिष्टाचार और संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन अनिवार्य है।

धालीवाल ने पूर्व विधायक बोनी अजनाला के हवाले से कहा कि पंजाब में 6 हजार करोड़ रुपए के ड्रग मनी केस की जांच होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगर कार्रवाई होती, तो पंजाब की कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि सुखबीर बादल को जवाब देना चाहिए कि 2007 से 2017 तक के शासनकाल में नशे के खिलाफ निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाए गए।

धालीवाल ने रवनीत बिट्टू और प्रताप सिंह बाजवा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि वे मजीठिया के साथ खड़े हैं, तो उन्हें शर्म आनी चाहिए। पंजाब के युवाओं की मौतों पर आपको दुख नहीं है और आप उन लोगों के साथ खड़े हैं जिन पर केस दर्ज हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार नशे के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध लड़ रही है और इसमें किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वो किसी भी पार्टी से हो, कितना भी बड़ा नाम हो। हम मसालेदार कार्रवाई नहीं करेंगे, हम न्यायपूर्ण, सख्त और प्रभावी कार्रवाई करेंगे।

--आईएएस

पीएसके/एबीएम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में नशे के खिलाफ क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पंजाब सरकार ने नशा बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया है।
कुलदीप सिंह धालीवाल ने नशे के मुद्दे पर क्या कहा?
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार के दौरान नशे का कारोबार बढ़ा है और कार्रवाई की जाएगी।
क्या नशे के खिलाफ यह कार्रवाई प्रभावी होगी?
यदि सही तरीके से लागू की गई, तो यह कार्रवाई नशे के कारोबार पर रोक लगाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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