22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेघालय: तुरा में सेवा इनलैंड-ड्रीम पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन, राज्यभर की सुविधाओं के लिए एसओपी लागू

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेघालय: तुरा में सेवा इनलैंड-ड्रीम पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन, राज्यभर की सुविधाओं के लिए एसओपी लागू

सारांश

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने तुरा में नए ड्रीम पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन करते हुए राज्यभर की सुविधाओं के लिए एसओपी भी लागू की — यह 2023 में मंजूर ड्रीम मिशन के तहत नशामुक्त मेघालय की दिशा में एक ठोस संस्थागत कदम है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने 22 सितंबर 2026 को तुरा, पश्चिम गारो हिल्स में सेवा इनलैंड-ड्रीम पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन किया।
यह केंद्र राज्य सरकार के ड्रीम (DREAM) मिशन के अंतर्गत स्थापित किया गया है, जिसे 2023 में मंजूरी मिली थी।
मुख्यमंत्री ने मेघालय के सभी पुनर्वास केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) जारी कीं, जो जनवरी में गठित समिति की अनुशंसाओं पर आधारित हैं।
इस पहल में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और युवा संगठनों की संयुक्त भागीदारी है।
तुरा दौरे में संगमा ने सीएमएसडीएफ के अंतर्गत युवा, शैक्षणिक, उद्यमी और महिला संगठनों को भी अनुमोदन-पत्र सौंपे।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 22 सितंबर 2026 को पश्चिम गारो हिल्स के तुरा में बल्लोंगरे-गाम्बेग्रे स्थित सेवा इनलैंड-ड्रीम पुनर्वास केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया। यह केंद्र राज्य सरकार की ड्रग रिडक्शन, एलिमिनेशन एंड एक्शन मिशन (ड्रीम) पहल के अंतर्गत स्थापित किया गया है, जिसका लक्ष्य मादक द्रव्यों के सेवन से प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों को उपचार, पुनर्वास और सामाजिक सहायता प्रदान करना है। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेघालय के समस्त पुनर्वास केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) भी जारी कीं।

ड्रीम मिशन: पृष्ठभूमि और उद्देश्य

मेघालय सरकार ने 2023 में ड्रीम को एक मिशन-मोड कार्यक्रम के रूप में अनुमोदित किया था। इसका व्यापक ध्येय राज्य को नशामुक्त बनाना और मादक द्रव्यों की रोकथाम के लिए एकीकृत तंत्र खड़ा करना है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य मादक द्रव्यों की तस्करी और उपभोग की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके मद्देनज़र यह मिशन विशेष महत्त्व रखता है।

ड्रीम कार्यक्रम के तहत केवल उपचार तक सीमित न रहते हुए प्रवर्तन, जागरूकता, परामर्श और सामुदायिक भागीदारी — चारों स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग नशामुक्ति केंद्रों के उपचार और प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

एसओपी का महत्त्व और प्रक्रिया

राज्य सरकार ने इस वर्ष जनवरी में एक समिति गठित की थी, जिसका कार्य मेघालय के समस्त पुनर्वास केंद्रों के लिए मानकीकृत प्रक्रियाएँ विकसित करना था। उसी समिति की अनुशंसाओं के आधार पर ये एसओपी तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य इन सुविधाओं के संचालन में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि अलग-अलग केंद्रों में उपचार और सेवाओं की गुणवत्ता एकसमान रहे।

मुख्यमंत्री की बहु-विभागीय भागीदारी पर ज़ोर

संगमा ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि नशे की समस्या से निपटने के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि इस पहल में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण विभाग, जिला प्रशासन और युवा संगठनों सहित विभिन्न सरकारी विभाग और स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह नया पुनर्वास केंद्र 'मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से प्रभावित लोगों के लिए सहायता, देखभाल और पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार 'अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और अधिक सहायक मेघालय' बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

सीएमएसडीएफ के अंतर्गत तुरा में अन्य घोषणाएँ

तुरा दौरे के दौरान संगमा ने मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष (सीएमएसडीएफ) के अंतर्गत युवा समूहों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्यमियों और महिला संगठनों को अनुमोदन-पत्र भी सौंपे। उन्होंने गारो हिल्स क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से आए आम नागरिकों से भी सीधी बातचीत की।

आगे की राह

राज्य सरकार नशामुक्ति के लिए संस्थागत सहायता को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम जारी रखेगी। नई एसओपी के लागू होने के बाद पुनर्वास केंद्रों की जवाबदेही बढ़ेगी और उपचार की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि ड्रीम मिशन के तहत स्थापित ये केंद्र ज़मीनी स्तर पर कितने प्रभावी सिद्ध होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन में होगी — पूर्वोत्तर में नशामुक्ति कार्यक्रम पहले भी शुरू होते रहे हैं, पर निरंतर फंडिंग और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी उन्हें अधूरा छोड़ देती है। एसओपी का मानकीकरण तभी सार्थक होगा जब इसके अनुपालन की नियमित जाँच हो और आँकड़े सार्वजनिक किए जाएँ। मेघालय जैसे छोटे राज्य के लिए बहु-विभागीय समन्वय की माँग महत्त्वाकांक्षी है — यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के लिए एक नज़ीर बन सकता है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय का ड्रीम मिशन क्या है?
ड्रीम (DREAM) यानी ड्रग रिडक्शन, एलिमिनेशन एंड एक्शन मिशन, मेघालय सरकार की एक मिशन-मोड पहल है, जिसे 2023 में मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य मादक द्रव्यों की रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए राज्य को नशामुक्त बनाना है।
तुरा में खुला यह पुनर्वास केंद्र किनके लिए है?
सेवा इनलैंड-ड्रीम पुनर्वास केंद्र मादक द्रव्यों के सेवन से प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए उपचार, परामर्श और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करेगा। यह पश्चिम गारो हिल्स के बल्लोंगरे-गाम्बेग्रे, तुरा में स्थित है।
एसओपी क्यों जारी की गई और इससे क्या बदलेगा?
जनवरी 2026 में गठित एक समिति की अनुशंसाओं के आधार पर ये एसओपी तैयार की गई हैं। इनका लक्ष्य राज्यभर के पुनर्वास केंद्रों में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है, ताकि उपचार की गुणवत्ता हर केंद्र में एकसमान रहे।
ड्रीम मिशन में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?
इस मिशन में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण विभाग, जिला प्रशासन, युवा संगठन और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करते हैं। समाज कल्याण विभाग नशामुक्ति केंद्रों के उपचार और प्रबंधन में विशेष भूमिका निभाता है।
तुरा दौरे के दौरान और क्या घोषणाएँ हुईं?
मुख्यमंत्री संगमा ने तुरा दौरे में मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष (सीएमएसडीएफ) के अंतर्गत युवा समूहों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्यमियों और महिला संगठनों को अनुमोदन-पत्र सौंपे। उन्होंने गारो हिल्स क्षेत्र के आम नागरिकों से भी सीधी बातचीत की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले