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कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का सख्त निर्देश: पब-बार में नाबालिगों को शराब परोसी तो होगी कड़ी कार्रवाई

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कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खड़गे का सख्त निर्देश: पब-बार में नाबालिगों को शराब परोसी तो होगी कड़ी कार्रवाई

सारांश

बेंगलुरु के एक ताज़ा अध्ययन में सामने आया कि शहर के 33% किशोर शराब पीते हैं और कुछ ने 8 साल की उम्र में ही शुरुआत की। इसके बाद कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने पब, बार और शराब की दुकानों में सख्त उम्र जाँच और 'बिना आईडी, नो एंट्री' नियम लागू करने के आदेश दिए।

मुख्य बातें

कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 8 जून 2026 को पुलिस को सभी पब, बार, क्लब और शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
नाबालिगों को शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति; 'बिना पहचान पत्र के प्रवेश नहीं' नियम लागू।
बेंगलुरु के 4,093 छात्रों पर हुए अध्ययन में पाया गया कि 33% किशोर शराब और 18% तंबाकू का सेवन करते हैं — राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक।
शराब सेवन शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष ; कुछ मामलों में 8 वर्ष की उम्र में ही संपर्क।
अध्ययन सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज , क्राइस्ट यूनिवर्सिटी बेंगलुरु और कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मणिपाल के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया।
उल्लंघन को लाइसेंस मामले से आगे युवा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का विषय माना जाएगा।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार, 8 जून 2026 को बेंगलुरु में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के सभी पब, बार, क्लब, लाउंज, रेस्तरां और शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को तत्काल नोटिस जारी किए जाएँ, जिसमें नाबालिगों के प्रवेश और उन्हें शराब परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए। यह कदम बेंगलुरु के किशोरों में शराब और नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर हाल में सामने आए चौंकाने वाले शोध आँकड़ों के बाद उठाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

गृह मंत्री खड़गे ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार नाबालिगों को शराब पीने में सक्षम बनाने वाले किसी भी प्रतिष्ठान के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति अपनाएगी। उन्होंने कहा, 'बिना पहचान पत्र के प्रवेश नहीं — नियम सीधा और अटल है। व्यावसायिक प्रतिष्ठान हमारे युवाओं की सुरक्षा और भविष्य से ऊपर लाभ को नहीं रख सकते।' उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिगों को शराब पीने में सहायता करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शोध के चौंकाने वाले आँकड़े

गृह मंत्री के कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में बेंगलुरु के सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी और मणिपाल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया। इस अध्ययन में बेंगलुरु के चार शिक्षण संस्थानों के 4,093 छात्रों को शामिल किया गया था, जो प्री-यूनिवर्सिटी, स्नातक और उच्च माध्यमिक स्तर पर पढ़ रहे थे।

अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 33 प्रतिशत युवा शराब का सेवन करते पाए गए, जबकि 18 प्रतिशत तंबाकू के आदी थे। ये आँकड़े राष्ट्रीय औसत — शराब सेवन 7.9% और तंबाकू सेवन 8.7% — से कहीं अधिक हैं। कर्नाटक के राज्य स्तरीय औसत — शराब 8.5% और तंबाकू 4.7% — की तुलना में भी यह आँकड़े बेहद चिंताजनक हैं।

गौरतलब है कि बेंगलुरु के किशोरों में शराब सेवन शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष पाई गई, और कुछ मामलों में बच्चों ने 8 वर्ष की आयु में ही शराब के संपर्क में आने की जानकारी दी।

सरकार की प्रतिक्रिया और निर्देश

इन निष्कर्षों के आधार पर गृह मंत्री खड़गे ने पुलिस को निर्देश दिया कि नाबालिगों द्वारा शराब पीने को महज लाइसेंस उल्लंघन न मानकर, इसे युवा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चिंता के रूप में देखा जाए। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों, नागरिकों और प्रतिष्ठान मालिकों से पुलिस के साथ सक्रिय सहयोग की अपील की।

आम जनता और युवाओं पर असर

यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु जैसे महानगरों में नाइटलाइफ संस्कृति तेज़ी से विस्तार पा रही है और किशोरों की पहुँच शराब परोसने वाले स्थानों तक बढ़ी है। शोध के अनुसार, बेंगलुरु में तीन में से एक किशोर शराब या तंबाकू के सेवन के कारण स्वास्थ्य जोखिम में है — यह आँकड़ा नीति-निर्माताओं के लिए गंभीर चेतावनी है।

क्या होगा आगे

पुलिस अधिकारी अब सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को औपचारिक नोटिस जारी करेंगे और उम्र सत्यापन की अनुपालना की नियमित जाँच करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — बेंगलुरु में सैकड़ों लाइसेंसी प्रतिष्ठानों की नियमित जाँच के लिए पुलिस संसाधन और इच्छाशक्ति दोनों चाहिए। शोध के आँकड़े बताते हैं कि समस्या केवल पब तक सीमित नहीं, बल्कि घरेलू और सामाजिक वातावरण में भी गहरी जड़ें जमाए है — इसलिए केवल प्रतिष्ठानों पर नोटिस भेजना पर्याप्त नहीं होगा। राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक शराब सेवन दर यह भी संकेत देती है कि बेंगलुरु में नाइटलाइफ नियमन की खामियाँ वर्षों से अनदेखी होती रही हैं। बिना दीर्घकालिक जागरूकता अभियान और स्कूल-स्तरीय हस्तक्षेप के, यह कार्रवाई महज एक प्रशासनिक खानापूर्ति बनकर रह सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक गृह मंत्री ने पब और बार के बारे में क्या निर्देश दिए हैं?
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 8 जून 2026 को पुलिस को निर्देश दिया कि सभी पब, बार, क्लब, लाउंज और शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जाएँ, जिसमें नाबालिगों के प्रवेश और उन्हें शराब परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए। उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बेंगलुरु के किशोरों में शराब सेवन की स्थिति कितनी गंभीर है?
तीन प्रमुख मेडिकल और विश्वविद्यालय संस्थानों के शोध के अनुसार, बेंगलुरु के 33% किशोर शराब का सेवन करते हैं — जो राष्ट्रीय औसत 7.9% से चार गुना से अधिक है। शराब सेवन शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष है और कुछ मामलों में 8 वर्ष की उम्र में ही संपर्क की सूचना मिली है।
'बिना आईडी, नो एंट्री' नियम का मतलब क्या है?
इस नियम के तहत शराब परोसने वाले सभी प्रतिष्ठानों को प्रवेश से पहले ग्राहक की उम्र का सत्यापन करना अनिवार्य होगा। बिना वैध पहचान पत्र के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा, और नाबालिग पाए जाने पर प्रतिष्ठान के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह शोध किसने किया और इसमें क्या पाया गया?
यह अध्ययन बेंगलुरु के सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी और मणिपाल के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने किया। इसमें चार शिक्षण संस्थानों के 4,093 छात्रों को शामिल किया गया, जिसमें पाया गया कि 33% शराब और 18% तंबाकू का सेवन करते हैं — दोनों राष्ट्रीय और राज्य औसत से काफी अधिक।
नाबालिगों को शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों पर क्या कार्रवाई होगी?
गृह मंत्री के निर्देश के अनुसार, उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसे अब केवल लाइसेंस उल्लंघन नहीं, बल्कि युवा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर मामला माना जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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