कर्नाटक में शराब की कानूनी उम्र 21 वर्ष: गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने दी सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने राज्य में शराब पीने और खरीदने की न्यूनतम कानूनी आयु 21 वर्ष निर्धारित की है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने शनिवार, 13 जून को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। युवाओं में बढ़ती शराब की लत और उससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
गृह मंत्री का सीधा संदेश
खड़गे ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कर्नाटक में शराब पीने और खरीदने की कानूनी उम्र 21 साल है। 21 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को शराब परोसना, बेचना या उन्हें शराब पीने की इजाजत देना गैर-कानूनी है। ऐसा करने वाले लाइसेंस-प्राप्त प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य कम उम्र में शराब पीने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना और जिम्मेदार शराब नीति को सुनिश्चित करना है।
प्रतिष्ठानों के लिए दिशानिर्देश
गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रतिष्ठानों को हर ग्राहक की आईडी जाँचकर स्टोर करना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'प्रतिष्ठानों से उम्मीद की जाती है कि वे उन लोगों की आईडी जांच करें जो 21 वर्ष से कम उम्र के लगते हैं और तब तक उन्हें प्रवेश न दें जब तक उनके साथ कोई वयस्क न हो। किशोरों को परिसर में शराब पीने की पूरी तरह मनाही होनी चाहिए। किसी भी तरह की चूक या लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
एक्साइज विभाग और पुलिस को निर्देश
एक्साइज विभाग और पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे बार, रेस्टोरेंट, क्लब और अन्य लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों पर नियमित निगरानी रखें। उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में किशोर आयु वर्ग में शराब से जुड़ी घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।
आम जनता और युवाओं पर असर
गौरतलब है कि कर्नाटक देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ शहरी युवाओं में मद्यपान की प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ी है। सरकार का यह कदम युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने और सामाजिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक सुनिश्चित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में निगरानी अभियान की तीव्रता और उल्लंघन के मामलों पर कार्रवाई की रफ़्तार यह तय करेगी कि यह नीति ज़मीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।