JSSC-CGL परीक्षा रद्द: तेलंगाना BJP अध्यक्ष बोले — छात्रों की जीत, इंडिया ब्लॉक ने नहीं दिया साथ
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया, जिसके बाद 18 अगस्त को देशभर से राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तेलंगाना जन समिति (TJS) के नेताओं ने इस निर्णय पर अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रखे।
BJP का रुख: छात्रों की जीत, विपक्ष पर निशाना
तेलंगाना BJP के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने झारखंड सरकार के इस फैसले को छात्रों की निर्णायक जीत करार दिया। उन्होंने कहा, "झारखंड के छात्रों की जीत हुई है। सरकार को छात्रों की ताकत के आगे झुकना पड़ा। झारखंड में हुआ आंदोलन छात्रों की असली ताकत दिखाता है। यह छात्रों की बड़ी सफलता है।"
रामचंद्र राव ने इसी के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और इंडिया ब्लॉक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "दुख की बात यह है कि कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी या इंडिया ब्लॉक के किसी भी नेता ने न तो छात्रों से मुलाकात की और न ही उन्हें अपना समर्थन दिया।" यह आरोप ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन को व्यापक राष्ट्रीय ध्यान मिल रहा था।
TJS का नजरिया: कैबिनेट का फैसला सराहनीय
तेलंगाना जन समिति (TJS) के प्रमुख और विधान परिषद सदस्य (MLC) एम. कोडंडाराम ने झारखंड सरकार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा, "झारखंड सरकार ने चार घंटे चली कैबिनेट बैठक के बाद एक बड़ा फैसला लिया है। लंबी चर्चा के बाद, कैबिनेट ने आखिरकार झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द कर दिया है।"
कोडंडाराम ने बताया कि सरकार ने आयोग के कामकाज में सुधार के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं। इसके तहत लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और उसमें सुधार के लिए उचित सिफारिशें देने हेतु एक अधिकारी की नियुक्ति का भी फैसला किया गया है।
पेपर लीक जांच: रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी
पेपर लीक के आरोपों की जांच के लिए सरकार ने एक विशेष समिति गठित की है। कोडंडाराम ने स्पष्ट किया, "सरकार ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है, जिसमें प्रश्न-पत्र और पेपर लीक के मामले भी शामिल हैं।" गौरतलब है कि सीआईडी द्वारा भी इस मामले की जांच पहले से जारी है।
CBI जांच पर सरकार और छात्रों में गतिरोध
हालांकि एक अहम मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच सहमति अब भी नहीं बन पाई है। कोडंडाराम ने कहा, "छात्र चाहते हैं कि सीबीआई स्वतंत्र रूप से जांच करे। उन्हें लगता है कि सीबीआई ही एकमात्र एजेंसी है जो निष्पक्ष जांच कर सकती है। बस इसी मुद्दे पर सरकार और छात्रों में सहमति नहीं बनी है।" यह गतिरोध आगे चलकर आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल जांच समिति के गठन और आयोग में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्र संगठनों का दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार यदि इस मांग पर जल्द कोई निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन फिर से तेज हो सकता है।