झारखंड छात्र आंदोलन स्थगित: BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का आरोप, सरकार जानबूझकर मामला कानूनी पेच में फंसा रही
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेएसएससी और जेपीएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में उठे छात्र आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने 20 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर पूरे मामले को कानूनी पेचीदगियों में उलझाने की कोशिश कर रही है।
छात्र आंदोलन की जीत और गांधीवादी मूल्य
शाहदेव ने छात्रों के आंदोलन को लोकतंत्र में गांधीवादी मूल्यों की जीत बताया। उन्होंने कहा, 'यह छात्रों की एक बड़ी जीत थी। उन्होंने अपना आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित कर दिया है।' उनके अनुसार इस आंदोलन ने यह सिद्ध किया कि 'चाहे कोई कितना भी ताकतवर या तानाशाह क्यों न हो, गांधी और गांधीवादी विचारधारा के सामने झुकना ही होगा।'
जंतर-मंतर विरोध से तुलना
BJP प्रवक्ता ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र विरोध प्रदर्शन की तुलना झारखंड के आंदोलन से करते हुए दोनों को अलग-अलग चरित्र का बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन में कुछ प्रतिभागियों ने 'प्रधानमंत्री की माँ के लिए अपशब्द कहे, कश्मीर के बारे में आपत्तिजनक बातें कहीं और देश का विरोध करने वालों की तारीफ की।' इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों ने संस्कार, आभार और क्षमाभाव का परिचय दिया, जो 'झारखंड की संस्कृति की महानता को दर्शाता है।'
सरकार पर कानूनी पेच में फंसाने का आरोप
परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसले को झारखंड उच्च न्यायालय में कई याचिकाओं के ज़रिये चुनौती दी गई है। इस पर शाहदेव ने कहा, 'सरकार जानबूझकर पूरे मामले को कानूनी पेचीदगियों में फंसाने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि किसी की सरकारी नौकरी समाप्त करने से पहले 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना और जवाब देने का अवसर देना अनिवार्य है।
सरकार की दोहरी रणनीति पर सवाल
शाहदेव का आरोप है कि सरकार 'जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है जो शायद कानूनी जांच में टिक न पाएं और जिन पर स्टे ऑर्डर लग सकता है।' उनके अनुसार सरकार दोनों तरफ से फायदा उठाने की कोशिश में है, लेकिन इस रणनीति में वह 'दोनों तरफ से फंस सकती है।' यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
छात्रों ने आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित किया है, जिसका अर्थ है कि सरकार के पास इस अवधि में ठोस कदम उठाने का दबाव रहेगा। झारखंड उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की दिशा यह तय करेगी कि परीक्षा रद्द करने का फैसला कायम रहेगा या नहीं। आलोचकों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक नुकसान उन लाखों छात्रों का हो रहा है जो सालों से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।