दुर्गा पूजा 2026: त्रिपुरा मिजोरम से करेगा बिजली आयात, 370-380 MW मांग का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के विद्युत मंत्री रतनलाल नाथ ने 2 अक्टूबर 2026 को अगरतला में जानकारी दी कि राज्य सरकार 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पाँच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान बिजली की बढ़ी हुई माँग को पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्य मिजोरम से बिजली आयात करेगा। त्योहारी सीज़न में राज्य की बिजली खपत सामान्य 310-330 मेगावाट से बढ़कर 370-380 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है।
दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक व्यवस्था
मंत्री रतनलाल नाथ ने बताया कि यह कोई एकतरफा लेन-देन नहीं, बल्कि एक स्थापित पारस्परिक समझौता है। उन्होंने कहा, 'क्रिसमस के दौरान हम दिसंबर में मिजोरम को बिजली की आपूर्ति करते हैं। इसके बदले में, मिजोरम दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान त्रिपुरा को बिजली की आपूर्ति करता है।' यह व्यवस्था पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक चली आ रही है और त्योहारी मौसम में दोनों राज्यों की ऊर्जा ज़रूरतों को संतुलित करती है।
टीएसईसीएल की समीक्षा बैठक
त्योहारी तैयारियों का जायजा लेने के लिए त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (TSECL) में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं विद्युत मंत्री ने की। बैठक में TSECL के प्रबंध निदेशक बिस्वजीत बसु और निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में त्योहारी अवधि के दौरान पूरे राज्य में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित रूप से चर्चा की गई।
अधिकारियों को सतर्कता के निर्देश
मंत्री नाथ ने अधिकारियों को सतर्क रहने और बिजली आपूर्ति को प्रभावित करने वाली तकनीकी समस्याओं तथा अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक निवारक उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिकायत-निवारण और खराबी के त्वरित समाधान के लिए प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करने पर भी विशेष ज़ोर दिया। यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि पूजा पंडालों, सार्वजनिक स्थानों, बाज़ारों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर बिजली की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
आम जनता पर असर
नाथ ने कहा कि त्रिपुरा भर में दुर्गा पूजा समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के भाग लेने की उम्मीद है, इसलिए पर्याप्त जनशक्ति, उपकरण और ज़मीनी स्तर की तैयारियाँ सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों और ज़मीनी टीमों के बीच घनिष्ठ समन्वय पर बल दिया ताकि उभरती समस्याओं की पहचान और समाधान तुरंत हो सके। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में चौबीसों घंटे तैयार रहने का आह्वान किया गया जहाँ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सभाएँ और प्रमुख पूजा आयोजन होते हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि उत्तर-पूर्व भारत के छोटे राज्यों के लिए त्योहारी सीज़न में अंतर-राज्यीय बिजली साझेदारी एक व्यावहारिक और किफ़ायती समाधान बनती जा रही है। 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पाँच दिवसीय उत्सव के दौरान बिजली विभाग की टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी। यह व्यवस्था राज्य की बुनियादी ढाँचागत सीमाओं को क्षेत्रीय सहयोग के ज़रिए दूर करने का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।