3 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दुर्गा पूजा 2026: त्रिपुरा मिजोरम से करेगा बिजली आयात, 370-380 MW मांग का अनुमान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दुर्गा पूजा 2026: त्रिपुरा मिजोरम से करेगा बिजली आयात, 370-380 MW मांग का अनुमान

सारांश

दुर्गा पूजा के दौरान बिजली की माँग 370-380 MW तक पहुँचने के अनुमान के मद्देनज़र त्रिपुरा मिजोरम से बिजली आयात करेगा। यह दोनों राज्यों के बीच वर्षों से चला आ रहा पारस्परिक समझौता है — त्रिपुरा दिसंबर में क्रिसमस पर मिजोरम को बिजली देता है, और मिजोरम दुर्गा पूजा पर त्रिपुरा को।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के विद्युत मंत्री रतनलाल नाथ ने 2 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य दुर्गा पूजा के दौरान मिजोरम से बिजली आयात करेगा।
त्योहारी सीज़न में बिजली माँग 310-330 MW से बढ़कर 370-380 MW तक पहुँचने का अनुमान है।
दुर्गा पूजा उत्सव 16 अक्टूबर 2026 से पाँच दिनों तक आयोजित होगा।
पारस्परिक व्यवस्था के तहत त्रिपुरा दिसंबर में क्रिसमस के दौरान मिजोरम को बिजली आपूर्ति करता है।
TSECL के MD बिस्वजीत बसु की मौजूदगी में समीक्षा बैठक हुई; अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

त्रिपुरा के विद्युत मंत्री रतनलाल नाथ ने 2 अक्टूबर 2026 को अगरतला में जानकारी दी कि राज्य सरकार 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पाँच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान बिजली की बढ़ी हुई माँग को पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्य मिजोरम से बिजली आयात करेगा। त्योहारी सीज़न में राज्य की बिजली खपत सामान्य 310-330 मेगावाट से बढ़कर 370-380 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है।

दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक व्यवस्था

मंत्री रतनलाल नाथ ने बताया कि यह कोई एकतरफा लेन-देन नहीं, बल्कि एक स्थापित पारस्परिक समझौता है। उन्होंने कहा, 'क्रिसमस के दौरान हम दिसंबर में मिजोरम को बिजली की आपूर्ति करते हैं। इसके बदले में, मिजोरम दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान त्रिपुरा को बिजली की आपूर्ति करता है।' यह व्यवस्था पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक चली आ रही है और त्योहारी मौसम में दोनों राज्यों की ऊर्जा ज़रूरतों को संतुलित करती है।

टीएसईसीएल की समीक्षा बैठक

त्योहारी तैयारियों का जायजा लेने के लिए त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (TSECL) में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं विद्युत मंत्री ने की। बैठक में TSECL के प्रबंध निदेशक बिस्वजीत बसु और निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में त्योहारी अवधि के दौरान पूरे राज्य में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित रूप से चर्चा की गई।

अधिकारियों को सतर्कता के निर्देश

मंत्री नाथ ने अधिकारियों को सतर्क रहने और बिजली आपूर्ति को प्रभावित करने वाली तकनीकी समस्याओं तथा अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक निवारक उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिकायत-निवारण और खराबी के त्वरित समाधान के लिए प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करने पर भी विशेष ज़ोर दिया। यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि पूजा पंडालों, सार्वजनिक स्थानों, बाज़ारों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर बिजली की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।

आम जनता पर असर

नाथ ने कहा कि त्रिपुरा भर में दुर्गा पूजा समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के भाग लेने की उम्मीद है, इसलिए पर्याप्त जनशक्ति, उपकरण और ज़मीनी स्तर की तैयारियाँ सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों और ज़मीनी टीमों के बीच घनिष्ठ समन्वय पर बल दिया ताकि उभरती समस्याओं की पहचान और समाधान तुरंत हो सके। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में चौबीसों घंटे तैयार रहने का आह्वान किया गया जहाँ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सभाएँ और प्रमुख पूजा आयोजन होते हैं।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि उत्तर-पूर्व भारत के छोटे राज्यों के लिए त्योहारी सीज़न में अंतर-राज्यीय बिजली साझेदारी एक व्यावहारिक और किफ़ायती समाधान बनती जा रही है। 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पाँच दिवसीय उत्सव के दौरान बिजली विभाग की टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी। यह व्यवस्था राज्य की बुनियादी ढाँचागत सीमाओं को क्षेत्रीय सहयोग के ज़रिए दूर करने का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस प्रगति अभी भी स्पष्ट नहीं। मौसमी समाधान काम तो करता है, लेकिन यह राज्य के बिजली बुनियादी ढाँचे की संरचनात्मक कमज़ोरी को ढकता है, उसे दूर नहीं करता।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा दुर्गा पूजा के दौरान मिजोरम से बिजली क्यों आयात करता है?
दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान त्रिपुरा में बिजली की माँग सामान्य 310-330 MW से बढ़कर 370-380 MW तक पहुँच जाती है, जिसे राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता अकेले पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसलिए मिजोरम से आयात की यह व्यवस्था पिछले कई वर्षों से चली आ रही है।
त्रिपुरा और मिजोरम के बीच बिजली का यह समझौता कैसे काम करता है?
यह एक पारस्परिक व्यवस्था है — दुर्गा पूजा के दौरान मिजोरम त्रिपुरा को बिजली देता है, और इसके बदले में दिसंबर में क्रिसमस के दौरान त्रिपुरा मिजोरम को बिजली आपूर्ति करता है। विद्युत मंत्री रतनलाल नाथ के अनुसार यह समझौता दोनों राज्यों की त्योहारी ऊर्जा ज़रूरतों को संतुलित करता है।
दुर्गा पूजा 2026 त्रिपुरा में कब से शुरू होगी?
त्रिपुरा में पाँच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इस दौरान पूजा पंडालों, बाज़ारों और सार्वजनिक स्थानों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए TSECL की टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी।
TSECL ने त्योहारी बिजली आपूर्ति के लिए क्या तैयारियाँ की हैं?
त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (TSECL) ने MD बिस्वजीत बसु की अगुवाई में एक समीक्षा बैठक की, जिसमें शिकायत-निवारण तंत्र को मज़बूत करने, ज़मीनी टीमों की तैनाती बढ़ाने और तकनीकी खराबी से तुरंत निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। मंत्री नाथ ने अधिकारियों को विशेष रूप से बड़े सार्वजनिक आयोजनों वाले क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया।
त्रिपुरा में दुर्गा पूजा के दौरान सामान्य से कितनी अधिक बिजली की ज़रूरत होती है?
सामान्य दिनों में त्रिपुरा की बिजली माँग 310-330 मेगावाट होती है। दुर्गा पूजा के त्योहारी दिनों में यह माँग 370-380 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है — यानी लगभग 50 मेगावाट की अतिरिक्त ज़रूरत, जिसे मिजोरम से आयात के ज़रिए पूरा किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले