तमिलनाडु 15-31 अक्टूबर तक 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदेगा, पीक डिमांड 21,700 MW पर पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के बिजली एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य 15 से 31 अक्टूबर के बीच शाम के पीक आवर्स में 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खरीद करेगा, ताकि उपभोक्ताओं को लंबी बिजली कटौती से बचाया जा सके। पीक बिजली मांग पिछले साल की इसी अवधि के 16,800 मेगावाट से बढ़कर 21,700 मेगावाट हो गई है — यानी करीब 30 प्रतिशत की उछाल।
खरीद की विस्तृत रूपरेखा
मंत्री ने बताया कि यह बिजली खरीद शाम 6 बजे से आधी रात के बीच की जाएगी, क्योंकि इस समय सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती। हालाँकि निविदाएँ 3,500 मेगावाट तक के लिए आमंत्रित की गई थीं, लेकिन कीमतों और वास्तविक ज़रूरत को देखते हुए खरीद 1,500 मेगावाट तक सीमित रखी जाएगी।
गैस-आधारित बिजली लगभग ₹35 प्रति यूनिट पर उपलब्ध है, जबकि नैफ्था-आधारित बिजली की लागत ₹47 प्रति यूनिट होने के कारण उसे इस खरीद में शामिल नहीं किया जाएगा। निर्मल कुमार ने अनुमान लगाया कि इस अतिरिक्त खरीद से प्रतिदिन लगभग ₹5 करोड़ का अतिरिक्त व्यय होगा।
बिजली संकट की जड़ें और मौजूदा कमी
मंत्री के अनुसार राज्य को करीब 4,850 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ा, जिसमें केंद्रीय आवंटन से न मिल पाने वाली 1,850 मेगावाट भी शामिल थी। 3,500 मेगावाट की व्यवस्था के मुकाबले पवन ऊर्जा का उत्पादन घटकर महज 500 मेगावाट रह गया। यह ऐसे समय में आया है जब अल-नीनो से जुड़ी असामान्य गर्मी ने मांग को रिकॉर्ड स्तर पर धकेल दिया और राष्ट्रीय माँग-अनुमानों में राज्य की ज़रूरत को कम करके आँका गया था।
गौरतलब है कि राज्य ने असम से 430 मेगावाट थर्मल पावर हासिल की और अन्य राज्यों से भी खरीद की संभावना तलाशी, किंतु पर्याप्त सस्ती बिजली उपलब्ध नहीं हो पाई। थर्मल बिजली उत्पादन बढ़कर 4,200-4,300 मेगावाट के स्तर तक पहुँचा।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम
अल्पकालिक खरीद पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार इसी महीने कम से कम 3,500 मेगावाट की दीर्घकालिक खरीद के लिए टेंडर जारी करेगी। इसके अलावा 1,500 मेगावाट से 2,000 मेगावाट के लिए पाँच वर्षीय एक अलग बिजली-व्यवस्था तैयार की जा रही है, और 2028-29 तक 6,000 मेगावाट से 8,000 मेगावाट की अतिरिक्त आपूर्ति जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार रुके हुए उप्पुर थर्मल प्रोजेक्ट के लिए एक पुनरुद्धार योजना भी तैयार कर रही है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा खरीद में बैटरी स्टोरेज को शामिल करने, वास्तविक समय में उत्पादन डेटा प्राप्त करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में समीक्षा जारी है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
निर्मल कुमार ने पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार पर दीर्घकालिक बिजली समझौते न करने का आरोप लगाया। हालाँकि उन्होंने इस बात से स्पष्ट इनकार किया कि वर्तमान टीवीके सरकार ने कोई मौजूदा अनुबंध रद्द किए हैं।
सचिवालय में बिजली गुल होने पर सफाई
सोमवार को चेन्नई सचिवालय में हुई बिजली कटौती के सवाल पर मंत्री ने बताया कि एक मंजिल पर अत्यधिक गर्म हो गए इलेक्ट्रिकल बोर्ड को लगभग 15 मिनट में ठीक कर दिया गया। उन्होंने पूरी इमारत में बिजली गुल होने की बात को नकारा और स्पष्ट किया कि अस्पतालों तथा अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए बैकअप फीडर के ज़रिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी।
अतिरिक्त खरीद न होती तो उपभोक्ताओं को दो से तीन घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ती — और राज्य सरकार की दीर्घकालिक योजनाएँ यह बताती हैं कि यह संकट केवल अक्टूबर तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की बड़ी परीक्षा का संकेत है।