13 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु 15-31 अक्टूबर तक 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदेगा, पीक डिमांड 21,700 MW पर पहुँची

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु 15-31 अक्टूबर तक 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदेगा, पीक डिमांड 21,700 MW पर पहुँची

सारांश

तमिलनाडु में बिजली की पीक माँग एक साल में 30% उछलकर 21,700 मेगावाट पर पहुँच गई है। मंत्री निर्मल कुमार ने 15-31 अक्टूबर के लिए 1,500 मेगावाट की आपातकालीन खरीद की घोषणा की — रोज़ ₹5 करोड़ का अतिरिक्त बोझ — और साथ ही 2028-29 तक 8,000 मेगावाट जोड़ने का दीर्घकालिक खाका भी पेश किया।

मुख्य बातें

तमिलनाडु 15 से 31 अक्टूबर 2026 तक शाम 6 बजे से आधी रात के बीच 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदेगा।
राज्य की पीक बिजली माँग 16,800 मेगावाट से बढ़कर 21,700 मेगावाट हुई — करीब 30% की वृद्धि।
अतिरिक्त खरीद से रोज़ाना लगभग ₹5 करोड़ का अतिरिक्त व्यय अनुमानित; गैस-आधारित बिजली ₹35 प्रति यूनिट पर खरीदी जाएगी।
खरीद न होने पर उपभोक्ताओं को 2 से 3 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ता।
सरकार इसी महीने 3,500 मेगावाट की दीर्घकालिक खरीद का टेंडर जारी करेगी; 2028-29 तक 6,000-8,000 मेगावाट अतिरिक्त जोड़ने का लक्ष्य।
रुके हुए उप्पुर थर्मल प्रोजेक्ट के पुनरुद्धार की योजना तैयार हो रही है।

तमिलनाडु के बिजली एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य 15 से 31 अक्टूबर के बीच शाम के पीक आवर्स में 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खरीद करेगा, ताकि उपभोक्ताओं को लंबी बिजली कटौती से बचाया जा सके। पीक बिजली मांग पिछले साल की इसी अवधि के 16,800 मेगावाट से बढ़कर 21,700 मेगावाट हो गई है — यानी करीब 30 प्रतिशत की उछाल।

खरीद की विस्तृत रूपरेखा

मंत्री ने बताया कि यह बिजली खरीद शाम 6 बजे से आधी रात के बीच की जाएगी, क्योंकि इस समय सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती। हालाँकि निविदाएँ 3,500 मेगावाट तक के लिए आमंत्रित की गई थीं, लेकिन कीमतों और वास्तविक ज़रूरत को देखते हुए खरीद 1,500 मेगावाट तक सीमित रखी जाएगी।

गैस-आधारित बिजली लगभग ₹35 प्रति यूनिट पर उपलब्ध है, जबकि नैफ्था-आधारित बिजली की लागत ₹47 प्रति यूनिट होने के कारण उसे इस खरीद में शामिल नहीं किया जाएगा। निर्मल कुमार ने अनुमान लगाया कि इस अतिरिक्त खरीद से प्रतिदिन लगभग ₹5 करोड़ का अतिरिक्त व्यय होगा।

बिजली संकट की जड़ें और मौजूदा कमी

मंत्री के अनुसार राज्य को करीब 4,850 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ा, जिसमें केंद्रीय आवंटन से न मिल पाने वाली 1,850 मेगावाट भी शामिल थी। 3,500 मेगावाट की व्यवस्था के मुकाबले पवन ऊर्जा का उत्पादन घटकर महज 500 मेगावाट रह गया। यह ऐसे समय में आया है जब अल-नीनो से जुड़ी असामान्य गर्मी ने मांग को रिकॉर्ड स्तर पर धकेल दिया और राष्ट्रीय माँग-अनुमानों में राज्य की ज़रूरत को कम करके आँका गया था।

गौरतलब है कि राज्य ने असम से 430 मेगावाट थर्मल पावर हासिल की और अन्य राज्यों से भी खरीद की संभावना तलाशी, किंतु पर्याप्त सस्ती बिजली उपलब्ध नहीं हो पाई। थर्मल बिजली उत्पादन बढ़कर 4,200-4,300 मेगावाट के स्तर तक पहुँचा।

दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम

अल्पकालिक खरीद पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार इसी महीने कम से कम 3,500 मेगावाट की दीर्घकालिक खरीद के लिए टेंडर जारी करेगी। इसके अलावा 1,500 मेगावाट से 2,000 मेगावाट के लिए पाँच वर्षीय एक अलग बिजली-व्यवस्था तैयार की जा रही है, और 2028-29 तक 6,000 मेगावाट से 8,000 मेगावाट की अतिरिक्त आपूर्ति जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार रुके हुए उप्पुर थर्मल प्रोजेक्ट के लिए एक पुनरुद्धार योजना भी तैयार कर रही है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा खरीद में बैटरी स्टोरेज को शामिल करने, वास्तविक समय में उत्पादन डेटा प्राप्त करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में समीक्षा जारी है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

निर्मल कुमार ने पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार पर दीर्घकालिक बिजली समझौते न करने का आरोप लगाया। हालाँकि उन्होंने इस बात से स्पष्ट इनकार किया कि वर्तमान टीवीके सरकार ने कोई मौजूदा अनुबंध रद्द किए हैं।

सचिवालय में बिजली गुल होने पर सफाई

सोमवार को चेन्नई सचिवालय में हुई बिजली कटौती के सवाल पर मंत्री ने बताया कि एक मंजिल पर अत्यधिक गर्म हो गए इलेक्ट्रिकल बोर्ड को लगभग 15 मिनट में ठीक कर दिया गया। उन्होंने पूरी इमारत में बिजली गुल होने की बात को नकारा और स्पष्ट किया कि अस्पतालों तथा अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए बैकअप फीडर के ज़रिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी।

अतिरिक्त खरीद न होती तो उपभोक्ताओं को दो से तीन घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ती — और राज्य सरकार की दीर्घकालिक योजनाएँ यह बताती हैं कि यह संकट केवल अक्टूबर तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की बड़ी परीक्षा का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों की संरचनात्मक चूक का नतीजा है — पवन ऊर्जा की अति-निर्भरता, दीर्घकालिक अनुबंधों की अनदेखी और राष्ट्रीय माँग-अनुमानों में लगातार कमतरी। रोज़ाना ₹5 करोड़ की आपातकालीन खरीद जहाँ तत्काल राहत देती है, वहीं यह सवाल उठाती है कि 2028-29 का 8,000 मेगावाट का लक्ष्य उसी नौकरशाही ढाँचे के भरोसे कैसे पूरा होगा जो इस संकट को आते-आते नहीं देख पाया। उप्पुर थर्मल प्रोजेक्ट का वर्षों से लटका रहना और बैटरी स्टोरेज की अनुपस्थिति यह बताती है कि नवीकरणीय ऊर्जा की दौड़ में ग्रिड-स्थिरता को बलिदान किया गया। जब तक खरीद अनुबंधों को सत्यापन-योग्य आपूर्ति गारंटी से नहीं जोड़ा जाता, यह हर साल दोहराने वाला संकट बनता रहेगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु 1,500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्यों खरीद रहा है?
राज्य की पीक बिजली माँग एक साल में करीब 30% बढ़कर 21,700 मेगावाट हो गई है। बिना अतिरिक्त खरीद के उपभोक्ताओं को 2 से 3 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ता, इसलिए सरकार ने 15 से 31 अक्टूबर के पीक आवर्स में यह व्यवस्था की है।
यह बिजली किस समय और किस दर पर खरीदी जाएगी?
बिजली शाम 6 बजे से आधी रात के बीच खरीदी जाएगी, जब सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती। गैस-आधारित बिजली लगभग ₹35 प्रति यूनिट पर ली जाएगी, जबकि महँगी नैफ्था-आधारित बिजली (₹47 प्रति यूनिट) को इस खरीद में शामिल नहीं किया जाएगा।
तमिलनाडु में बिजली की इतनी कमी का कारण क्या रहा?
मंत्री निर्मल कुमार के अनुसार अल-नीनो से जुड़ी असामान्य गर्मी और राष्ट्रीय माँग-अनुमानों में कमतरी मुख्य कारण रहे। इसके अलावा 3,500 मेगावाट की व्यवस्था के मुकाबले पवन ऊर्जा उत्पादन घटकर केवल 500 मेगावाट रह गया, और केंद्रीय आवंटन से 1,850 मेगावाट नहीं मिल पाई।
तमिलनाडु सरकार की दीर्घकालिक बिजली योजना क्या है?
सरकार इसी महीने कम से कम 3,500 मेगावाट की दीर्घकालिक खरीद का टेंडर जारी करेगी। 1,500 से 2,000 मेगावाट के लिए पाँच वर्षीय व्यवस्था भी तैयार हो रही है, और 2028-29 तक 6,000 से 8,000 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
उप्पुर थर्मल प्रोजेक्ट का क्या होगा?
रुके हुए उप्पुर थर्मल प्रोजेक्ट के लिए सरकार एक पुनरुद्धार योजना तैयार कर रही है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा खरीद में बैटरी स्टोरेज को जोड़ने और वास्तविक समय में उत्पादन डेटा सार्वजनिक करने की दिशा में भी काम चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले