तमिलनाडु में बिजली संकट: TNPDCL ने पीक आवर्स के लिए 3,000 मेगावाट का अर्जेंट टेंडर जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TNPDCL) ने 8 अक्टूबर 2026 को शाम के पीक आवर्स में बिजली की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए 3,000 मेगावाट तक बिजली खरीदने का अर्जेंट टेंडर जारी किया है। अक्टूबर में असामान्य रूप से लंबे खिंचे गर्मी के मौसम और विंड पावर उत्पादन में गिरावट के चलते राज्य की बिजली माँग 20,000 मेगावाट के करीब बनी हुई है।
टेंडर की मुख्य शर्तें और समयसीमा
यह टेंडर केंद्र सरकार के 'डिस्कवरी ऑफ एफिशिएंट इलेक्ट्रिसिटी प्राइस' (DEEP) पोर्टल के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें तमिलनाडु के भीतर और बाहर के निजी बिजली उत्पादकों से आपूर्ति के लिए आवेदन मंगाए गए हैं। खरीद की अवधि 12 से 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
बड़ी मात्रा में बिजली की खरीद शाम 6 बजे से आधी रात तक के लिए होगी, जबकि रात की कमी को पूरा करने के लिए आधी रात से सुबह 2 बजे के बीच 1,500 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली खरीदी जाएगी। अनुबंध अंतिम होने पर कीमतें तय की जाएंगी।
मौजूदा आपूर्ति स्थिति और माँग का दबाव
TNPDCL पहले से ही शॉर्ट टर्म खरीद और पावर स्वैप व्यवस्थाओं के जरिए 3,000 मेगावाट तक बिजली ले रही है। इसके अतिरिक्त पीक आवर्स के दौरान पावर एक्सचेंज से भी उतनी ही मात्रा में बिजली खरीदी जा रही है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सितंबर से ही गर्मी का मौसम लंबा खिंचने के कारण बिजली की ज़रूरतें असामान्य रूप से अधिक बनी हुई हैं।
मंगलवार को राज्य में 432.6 मिलियन यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की सर्वाधिक दैनिक खपत के निकट है। पीक डिमांड 19,921 मेगावाट तक पहुँची। आपूर्ति के मोर्चे पर TNPDCL के थर्मल स्टेशनों ने 80 मिलियन यूनिट, केंद्रीय जनरेटिंग स्टेशनों ने 83.4 मिलियन यूनिट, शॉर्ट टर्म खरीद ने 38.5 मिलियन यूनिट और पावर एक्सचेंज ने 36.5 मिलियन यूनिट का योगदान दिया।
ऊर्जा मंत्री की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मलकुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में पीक आवर डिमांड 3,000 मेगावाट बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पूल से मिलने वाली 3,000 मेगावाट बिजली भी समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके कारण शॉर्ट टर्म टेंडर जारी करने पड़े।
मंत्री के अनुसार, तमिलनाडु पहले ही खुले बाजार से 4,500 मेगावाट बिजली खरीद चुका है और माँग के आधार पर आगे और खरीद की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने आपूर्ति पर दबाव की आंशिक वजह विंड पावर उत्पादन में कमी और केंद्रीय स्टेशनों से सीमित उपलब्धता को बताया।
अल नीनो का असर और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की स्थितियों के चलते गर्मी का मौसम असामान्य रूप से लंबा खिंचा है, जिससे गर्मियों के बाद भी बिजली की भारी खपत बनी हुई है। यह उल्लेखनीय है कि दिन के समय तेज सोलर पावर उत्पादन से राज्य में बिजली सरप्लस रहती है, लेकिन शाम को सौर उत्पादन बंद होते ही माँग-आपूर्ति का अंतर तेज़ी से बढ़ जाता है।
यदि 20 अक्टूबर तक उत्तर-पूर्व मानसून समय पर आ जाता है तो माँग में कमी आ सकती है, जिससे निगम को अगली गर्मियों से पहले वार्षिक रखरखाव के लिए कुछ थर्मल यूनिट्स बंद करने का अवसर मिलेगा। हालाँकि कमज़ोर मानसून की स्थिति में नवंबर में और अधिक बिजली खरीदनी पड़ सकती है — जो राज्य के बिजली बजट पर अतिरिक्त दबाव डालेगा।