झारखंड JSSC-CGL: 14 भर्ती परीक्षाएँ रद्द, देवेंद्र नाथ महतो बोले — पहली जीत मिली, सुधार आंदोलन जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित जेएसएससी-सीजीएल सहित 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के सरकारी फैसले को छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता देवेंद्र नाथ महतो ने संघर्ष की पहली बड़ी जीत करार दिया है। 18 अगस्त को मीडिया से बातचीत में महतो ने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं का रद्द होना आंदोलन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक निर्णायक शुरुआत है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
2 जुलाई को शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया। 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह की शुरुआत हुई, जिसके बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। 2 अगस्त से छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी। जिन परीक्षाओं पर गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगे थे, उन्हें रद्द कराना इसी लंबे संघर्ष का परिणाम है।
महतो की मुख्य माँगें
महतो ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक परीक्षा को रद्द कराना नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त एवं पारदर्शी बनाना है। उन्होंने माँग रखी कि सरकार ऐसी व्यवस्था की गारंटी दे, जिसमें भविष्य में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सेटिंग या किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे।
उनके अनुसार, प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के हर चरण का स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों से अपील
महतो ने यह भी कहा कि छात्रों की यह लड़ाई केवल वर्तमान अभ्यर्थियों के लिए नहीं है — इसका उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार कराना है, जिससे आने वाली पीढ़ी के युवाओं को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े। उन्होंने ईमानदारी से परीक्षा देने वाले और वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की।
आगे की राह
महतो ने स्पष्ट किया कि सरकार के फैसले को आंदोलन की पहली सफलता के रूप में देखा जाए, लेकिन अब छात्रों का संघर्ष परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित कराने पर केंद्रित रहेगा। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक झारखंड की भर्ती प्रक्रिया में संस्थागत बदलाव नहीं आ जाते।