18 अगस्त 2026
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झारखंड JSSC-CGL: 14 भर्ती परीक्षाएँ रद्द, देवेंद्र नाथ महतो बोले — पहली जीत मिली, सुधार आंदोलन जारी रहेगा

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झारखंड JSSC-CGL: 14 भर्ती परीक्षाएँ रद्द, देवेंद्र नाथ महतो बोले — पहली जीत मिली, सुधार आंदोलन जारी रहेगा

सारांश

झारखंड में 14 भर्ती परीक्षाएँ रद्द हुईं — छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इसे पहली जीत मानते हैं, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी है। 2 जुलाई से शुरू हुए इस आंदोलन की माँग सिर्फ परीक्षा रद्द करना नहीं, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।

मुख्य बातें

टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित JSSC-CGL सहित 14 भर्ती परीक्षाएँ झारखंड सरकार ने रद्द कीं।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने इसे आंदोलन की पहली जीत बताया, लेकिन कहा कि संघर्ष जारी रहेगा।
आंदोलन 2 जुलाई को शुरू हुआ; 25 जुलाई को बापू वाटिका, रांची से सत्याग्रह और 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू हुई।
माँग: प्रत्येक परीक्षा चरण का स्वतंत्र ऑडिट और एजेंसी से अधिकारियों तक जवाबदेही तय हो।
महतो ने कहा — यह लड़ाई आने वाली पीढ़ी के लिए है, ताकि युवाओं को अधिकारों के लिए सड़क पर न उतरना पड़े।

झारखंड में टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित जेएसएससी-सीजीएल सहित 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के सरकारी फैसले को छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता देवेंद्र नाथ महतो ने संघर्ष की पहली बड़ी जीत करार दिया है। 18 अगस्त को मीडिया से बातचीत में महतो ने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं का रद्द होना आंदोलन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक निर्णायक शुरुआत है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

2 जुलाई को शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेता गया। 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह की शुरुआत हुई, जिसके बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। 2 अगस्त से छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी। जिन परीक्षाओं पर गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगे थे, उन्हें रद्द कराना इसी लंबे संघर्ष का परिणाम है।

महतो की मुख्य माँगें

महतो ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक परीक्षा को रद्द कराना नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त एवं पारदर्शी बनाना है। उन्होंने माँग रखी कि सरकार ऐसी व्यवस्था की गारंटी दे, जिसमें भविष्य में पेपर लीक, प्रश्नपत्र की सेटिंग या किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश न रहे।

उनके अनुसार, प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के हर चरण का स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

अभ्यर्थियों से अपील

महतो ने यह भी कहा कि छात्रों की यह लड़ाई केवल वर्तमान अभ्यर्थियों के लिए नहीं है — इसका उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार कराना है, जिससे आने वाली पीढ़ी के युवाओं को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े। उन्होंने ईमानदारी से परीक्षा देने वाले और वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की।

आगे की राह

महतो ने स्पष्ट किया कि सरकार के फैसले को आंदोलन की पहली सफलता के रूप में देखा जाए, लेकिन अब छात्रों का संघर्ष परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित कराने पर केंद्रित रहेगा। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक झारखंड की भर्ती प्रक्रिया में संस्थागत बदलाव नहीं आ जाते।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब सरकार की है — क्या वह केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई करेगी या संस्थागत सुधार लाएगी? पेपर लीक और परीक्षा धांधली की यह समस्या झारखंड तक सीमित नहीं; यह पूरे देश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है। महतो की माँग — हर चरण का ऑडिट और एजेंसी की जवाबदेही — तार्किक है, लेकिन बिना कानूनी ढाँचे के यह महज आश्वासन बनकर रह सकती है। जब तक दोषी एजेंसियों और अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, अगली परीक्षा में धांधली की आशंका बनी रहेगी।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में कौन-सी 14 भर्ती परीक्षाएँ रद्द की गई हैं?
झारखंड सरकार ने टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित JSSC-CGL सहित 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया है, जिन पर गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगे थे। ये परीक्षाएँ छात्र आंदोलन के लंबे दबाव के बाद रद्द की गई हैं।
देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और उनकी मुख्य माँग क्या है?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता हैं जिन्होंने JSSC-CGL परीक्षा धांधली के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी मुख्य माँग है कि पूरी भर्ती व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाया जाए तथा हर परीक्षा चरण का स्वतंत्र ऑडिट हो।
झारखंड छात्र आंदोलन कब और कहाँ से शुरू हुआ?
यह आंदोलन 2 जुलाई को शुरू हुआ। 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह शुरू हुआ और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इसका प्रमुख केंद्र बना। 2 अगस्त से छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की।
क्या परीक्षाएँ रद्द होने के बाद आंदोलन समाप्त हो जाएगा?
नहीं। महतो ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा रद्द होना संघर्ष का अंतिम पड़ाव नहीं है। आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं होते और भविष्य की परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो जाती।
परीक्षा में सुधार के लिए क्या ठोस माँगें रखी गई हैं?
महतो ने माँग की है कि प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के हर चरण का ऑडिट हो और परीक्षा एजेंसी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही पेपर लीक और प्रश्नपत्र सेटिंग की किसी भी संभावना को खत्म करने की गारंटी सरकार को देनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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