बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी: भूपेंद्र यादव बोले — ईको-टूरिज्म और हरित रोजगार को मिलेगा नया जीवन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर अलीपुरद्वार के बक्सा टाइगर रिजर्व में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि बाघों की वापसी से इस क्षेत्र में ईको-टूरिज्म, हरित रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की विशेष सराहना करते हुए कहा कि जो काम 2018 से 2026 के बीच आठ वर्षों में नहीं हो सका, वह अधिकारी ने कुछ ही महीनों में पूरा कर दिखाया।
आठ साल बाद लौटी बाघिन — कैसे पूरा हुआ प्रोजेक्ट
2018 में बाघों की गणना के दौरान यह स्पष्ट हो गया था कि बक्सा टाइगर रिजर्व से बाघ पूरी तरह विलुप्त हो चुके हैं। यादव के अनुसार, केंद्र सरकार ने तत्कालीन राज्य सरकार को लगातार पत्र लिखे, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। अंततः मौजूदा राज्य सरकार ने बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व से एक बाघिन लाकर इस परियोजना को पूरा किया। यादव ने बताया कि वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, ठीक वैसे ही जैसे बक्सा भूटान की सेंचुरी से।
उन्होंने यह भी बताया कि बाघिन के आगमन से पहले दो गांवों का स्वैच्छिक पुनर्वास कराया गया, ताकि बाघ को पर्याप्त शिकार क्षेत्र उपलब्ध हो सके। इस पूरे प्रोजेक्ट में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून, बिहार सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार का सहयोग रहा।
पर्यटन और हरित रोजगार पर जोर
यादव ने कहा कि उत्तर बंगाल में पहले 'ट्रिपल टी' — चाय (Tea), लकड़ी (Timber) और पर्यटन (Tourism) — की पहचान थी, लेकिन पिछली सरकार के दौर में इनका अत्यधिक दोहन हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री अधिकारी से आग्रह किया कि बुनियादी ढाँचे के साथ एक पर्यटन ग्राम विकसित किया जाए, जिससे बाहरी पर्यटक इस सुंदर क्षेत्र में आएँ और स्थानीय लोगों को रोजगार मिले।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने इस प्रस्ताव पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने का आश्वासन दिया है। यादव ने कहा कि भारत का बाघ 'बंगाल टाइगर' के नाम से जाना जाता है और बक्सा में उसकी दहाड़ से क्षेत्र का पर्यटन परिदृश्य बदलेगा।
प्लास्टिक मुक्त बक्सा का संकल्प
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में यादव ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर 'प्लास्टिक मुक्त बक्सा' का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व में प्रवेश करने वाले पर्यटकों की गाड़ियों की जाँच होनी चाहिए कि उनके पास प्लास्टिक थैलियाँ या बोतलें तो नहीं हैं।
यादव ने स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाई गई जूट की थैलियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटकों को इन्हीं थैलियों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं की आजीविका को बढ़ावा देने का एक कारगर तरीका बताया।
वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान
यादव ने स्पष्ट किया कि बाघिन के स्थानांतरण के साथ उसका पूरा वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा रहा है। कभी-कभी भूटान की बाघ सेंचुरी या असम के निकट स्थित मानस सेंचुरी से कैमरा ट्रैप में बाघ दिखते हैं, जो दर्शाता है कि इस पूरे क्षेत्र में बाघों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। उन्होंने मंत्री मनोज कुमार तिवारी के प्रयासों की भी सराहना की, जो पद संभालने के पहले दिन से ही इस प्रोजेक्ट के लिए काम कर रहे थे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही है और देश में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बक्सा में बाघ की वापसी इस संरक्षण यात्रा की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।