4 नवंबर 2026
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बक्सा टाइगर रिजर्व की बाघिन BT1 असम से सकुशल वापस, 100 किमी की यात्रा के बाद संयुक्त ऑपरेशन सफल

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बक्सा टाइगर रिजर्व की बाघिन BT1 असम से सकुशल वापस, 100 किमी की यात्रा के बाद संयुक्त ऑपरेशन सफल

सारांश

बिहार से लाई गई बाघिन BT1 ने बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़े जाने के महज कुछ हफ्तों में 100 किमी से अधिक का सफर तय कर असम का रुख कर लिया। पश्चिम बंगाल और असम की संयुक्त टीम ने कोकराझार से उसे सुरक्षित पकड़कर वापस बक्सा पहुँचाया — यह बाघ संरक्षण में अंतर-राज्यीय सहयोग की सफल मिसाल है।

मुख्य बातें

बाघिन BT1 को 2 अक्टूबर 2026 को बक्सा टाइगर रिजर्व में जंगल में छोड़ा गया था।
बाघिन जंगलों के रास्ते 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर असम के कोकराझार जिले तक पहुँच गई।
23 अक्टूबर से बाघिन की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही थी; 4 नवंबर, मंगलवार को उसे सफलतापूर्वक पकड़ा गया।
पश्चिम बंगाल और असम के वन अधिकारियों के संयुक्त ऑपरेशन के बाद बुधवार तड़के बाघिन को बक्सा वापस लाया गया।
वन मंत्री मनोज ओरांव ने बताया कि BT1 पूरी तरह स्वस्थ है लेकिन कुछ दिनों तक निगरानी में रहेगी।
यह बाघिन मूलतः बिहार से लाई गई थी और बक्सा में बाघों की आबादी बढ़ाने की योजना का हिस्सा है।

बक्सा टाइगर रिजर्व (उत्तरी पश्चिम बंगाल) की बाघिन BT1 को मंगलवार, 4 नवंबर 2026 को असम के कोकराझार जिले में सफलतापूर्वक पकड़ा गया और बुधवार तड़के उसे वापस बक्सा लाया गया — यह पश्चिम बंगाल व असम के वन विभागों का एक ऐतिहासिक संयुक्त बचाव अभियान था। बाघिन जंगलों के रास्ते 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर असम में प्रवेश कर गई थी, जिससे जानवर और स्थानीय नागरिकों दोनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई थी।

बाघिन की यात्रा: कैसे पहुंची असम तक

बिहार से लाई गई बाघिन BT1 को 2 अक्टूबर 2026 को बक्सा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा गया था। हालाँकि, वह जल्द ही अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकल गई और 23 अक्टूबर से जंगलों के रास्ते असम की ओर बढ़ती रही। वह बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के रायमोना नेशनल पार्क होते हुए कोकराझार जिले तक पहुँच गई — कुल 100 किलोमीटर से अधिक का सफर।

गौरतलब है कि बाघिन ने पहले एक बार फिर से पकड़े जाने से बचने की कोशिश की और बाड़े में छोड़े जाने के बाद पास के एक वाटरबॉडी की ओर चली गई थी। आखिरकार वन अधिकारियों ने उसे दोबारा पकड़ने में सफलता हासिल की।

संयुक्त ऑपरेशन: दो राज्यों की साझा कोशिश

इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल और असम के वन अधिकारियों ने मिलकर एक समन्वित अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य बाघिन की सटीक लोकेशन का पता लगाना, उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखना और मनुष्य-वन्यजीव टकराव को रोकना था। दोनों राज्यों की टीमों के संयुक्त प्रयास से मंगलवार को बाघिन को सुरक्षित पकड़ लिया गया।

यह ऑपरेशन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह बाघ संरक्षण में अंतर-राज्यीय सहयोग की एक सफल मिसाल बन गया है। बक्सा टाइगर रिजर्व में तैनात वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाघिन की सुरक्षित वापसी पर गहरी राहत महसूस की।

सरकार की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज ओरांव ने इस सफल ऑपरेशन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि BT1 पूरी तरह स्वस्थ है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सावधानी के तौर पर बाघिन को कुछ और दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।

मंत्री ने बताया कि बक्सा टाइगर रिजर्व के बाड़े में छोड़े जाने के बाद बाघिन ने पास के वाटरबॉडी का रुख किया — जो उसके सामान्य स्वभाव का संकेत है। वन विभाग के कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों ने उसकी गतिविधियों से संतोष जताया और उसे उसका पसंदीदा खाना भी दिया गया।

बाघ संरक्षण पर असर

यह घटना इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से बिहार से यह बाघिन लाई गई थी। ऐसे ट्रांसलोकेशन अभियानों में जानवर के नए परिवेश में ढलने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है, और BT1 की इस लंबी यात्रा ने इसी चुनौती को उजागर किया। विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों के ट्रांसलोकेशन के बाद उनकी सघन निगरानी और बड़े कॉरिडोर की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

आगे चलकर वन विभाग यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि BT1 अपने नए आवास में सुरक्षित रूप से स्थापित हो जाए, जिससे बक्सा में बाघ संरक्षण की दीर्घकालिक योजना को बल मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आगे भी ऐसी ट्रांसलोकेशन योजनाओं में पर्याप्त आवास मूल्यांकन और दीर्घकालिक निगरानी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाघिन BT1 कौन है और उसे बक्सा टाइगर रिजर्व में क्यों लाया गया था?
BT1 बिहार से लाई गई एक बाघिन है, जिसे 2 अक्टूबर 2026 को बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से जंगल में छोड़ा गया था। बक्सा में बाघों की संख्या बढ़ाने की दीर्घकालिक संरक्षण योजना के तहत यह ट्रांसलोकेशन किया गया था।
बाघिन BT1 असम कैसे पहुँची?
बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़े जाने के बाद BT1 जंगलों के रास्ते 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर असम में प्रवेश कर गई। 23 अक्टूबर से उसकी गतिविधियाँ दर्ज की जा रही थीं और वह बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के रायमोना नेशनल पार्क से होते हुए कोकराझार जिले तक पहुँच गई।
बाघिन को वापस लाने का ऑपरेशन कैसे हुआ?
पश्चिम बंगाल और असम के वन अधिकारियों ने मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसके तहत बाघिन की लोकेशन ट्रैक की गई, उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी गई और मानव-वन्यजीव टकराव रोका गया। मंगलवार, 4 नवंबर को कोकराझार में उसे सफलतापूर्वक पकड़कर बुधवार तड़के बक्सा वापस लाया गया।
अभी बाघिन BT1 की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?
वन मंत्री मनोज ओरांव के अनुसार बाघिन BT1 पूरी तरह स्वस्थ है। उसे उसका पसंदीदा खाना दिया गया है और वह बाड़े में छोड़े जाने के बाद पास के वाटरबॉडी की ओर चली गई, जो उसके सामान्य व्यवहार का संकेत है। एहतियात के तौर पर उसे कुछ और दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।
इस घटना का बाघ संरक्षण कार्यक्रम पर क्या असर पड़ेगा?
यह घटना बाघ ट्रांसलोकेशन अभियानों में सघन निगरानी और पर्याप्त वन कॉरिडोर की ज़रूरत को रेखांकित करती है। पश्चिम बंगाल और असम के बीच सफल समन्वय अंतर-राज्यीय वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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