3 नवंबर 2026
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कोकराझार में रॉयल बंगाल बाघिन की दस्तक, गेलागुरी गांव के 5 किमी दायरे में प्रतिबंध लागू

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कोकराझार में रॉयल बंगाल बाघिन की दस्तक, गेलागुरी गांव के 5 किमी दायरे में प्रतिबंध लागू

सारांश

पश्चिम बंगाल से भटककर असम के कोकराझार पहुंची रॉयल बंगाल बाघिन ने प्रशासन को हरकत में ला दिया। गेलागुरी गांव के 5 किमी दायरे में पाबंदियां, सोशल मीडिया अफवाहों पर चेतावनी, और एनटीसीए विशेषज्ञों की टीम मैदान में — यह मामला सिकुड़ते जंगलों और मानव-पशु संघर्ष की बड़ी कहानी का हिस्सा है।

मुख्य बातें

2 नवंबर 2026 को असम के कोकराझार जिले के गेलागुरी गांव के पास एक रॉयल बंगाल बाघिन देखी गई, जो कथित तौर पर पश्चिम बंगाल से भटककर आई।
जिला मजिस्ट्रेट पंकज चक्रवर्ती ने बीएनएसएस, 2023 की धारा 163 के तहत 5 किलोमीटर दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया।
प्रतिबंधित क्षेत्र में 6 गांव शामिल — गेलागुरी, पूर्वी बोंगशिगांव, पश्चिमी डांगरखुटी, उत्तरी भालुकमारी, डांगरखुटी और घोरामारी।
5 या अधिक लोगों का एकत्र होना, हथियार, ड्रोन, पटाखे, लाउडस्पीकर और आग पर पाबंदी; जंगल प्रवेश के लिए डीएफओ की अनुमति अनिवार्य।
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और एनटीसीए के विशेषज्ञ बचाव अभियान में शामिल; उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई होगी।

असम के कोकराझार जिले में 2 नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल से भटककर आई एक रॉयल बंगाल बाघिन के गेलागुरी गांव के आसपास देखे जाने के बाद प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए 5 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट पंकज चक्रवर्ती ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया, जो मनुष्यों और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जानवर को पकड़ने के अभियान में किसी भी अवरोध को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, बाघिन को सबसे पहले 2 नवंबर को डोटमा राजस्व सर्कल के अंतर्गत आने वाले गेलागुरी गांव के निकट जंगल से लगे इलाकों में देखा गया था। काचुगांव वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) ने इस जानवर की उपस्थिति की आधिकारिक जानकारी दी।

प्रतिबंधित क्षेत्र में गेलागुरी, पूर्वी बोंगशिगांव, पश्चिमी डांगरखुटी, उत्तरी भालुकमारी, डांगरखुटी और घोरामारी गांव शामिल हैं। यह इलाका बांग्लादेश सीमा और पश्चिम बंगाल के जंगलों से सटा होने के कारण संवेदनशील माना जाता है।

प्रतिबंध में क्या-क्या शामिल है

प्रशासनिक आदेश के तहत जानवर को देखने या उसका पीछा करने के लिए 5 या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर सख्त रोक लगाई गई है। प्रतिबंधित क्षेत्र के वन या जंगली हिस्सों में प्रवेश के लिए संबंधित डीएफओ की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में हथियार, दाओ, भाले, जाल, जहर और फंदे ले जाने पर भी पाबंदी है। ऐसी कोई भी गतिविधि — जिसमें पटाखे फोड़ना, ढोल बजाना, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल, आग जलाना या बाघिन को खोजने के लिए फ्लैशलाइट का उपयोग शामिल है — पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि इससे जानवर भड़क सकता है और पकड़ने का अभियान प्रभावित हो सकता है।

निजी ड्रोन उड़ाने तथा अभियान की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए भी पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

सोशल मीडिया पर अफवाहों के खिलाफ सख्त चेतावनी

प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी फैलाने के विरुद्ध कड़ी चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से ऐसे दावों से बचने को कहा गया है, जिनमें बाघिन को 'आदमखोर' बताया जा रहा हो या यह कहा जा रहा हो कि उसे गोली मार दी गई है। गौरतलब है कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता के बावजूद इस तरह की अफवाहें अक्सर ग्रामीण इलाकों में भीड़ को उकसाती हैं और जानवर के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं।

बचाव अभियान में कौन शामिल है

बाघिन को पकड़ने के अभियान में वन विभाग के अधिकृत कर्मचारी, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के वन्यजीव विशेषज्ञ, पुलिस तथा अन्य सरकारी दल शामिल हैं। इन सभी को प्रतिबंधों से छूट प्रदान की गई है।

नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब असम और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच वन्यजीव आवागमन के कई मामले सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिकुड़ने और मानव-पशु संघर्ष के बढ़ते मामलों के बीच इस तरह के प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी हैं। अभियान पूरा होने तक प्रतिबंध जारी रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह घटना एक बड़े और अनदेखे संकट की ओर इशारा करती है — असम-बंगाल सीमा पर जंगलों का लगातार सिकुड़ना बाघों और इंसानों को आमने-सामने ला रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कोई बड़ा वन्यजीव पड़ोसी राज्य से भटककर आबादी वाले इलाकों में पहुंचा हो। अफवाहों और 'आदमखोर' जैसे लेबल पर चेतावनी सही दिशा में है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए राज्यों के बीच वन्यजीव कॉरिडोर को पुनर्जीवित करने और सीमावर्ती जंगलों पर अतिक्रमण रोकने की नीति चाहिए, जो फिलहाल नदारद है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोकराझार में बाघिन कहाँ से आई और सबसे पहले कहाँ दिखी?
अधिकारियों के अनुसार यह रॉयल बंगाल बाघिन पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भटककर असम के कोकराझार जिले में आई। इसे सबसे पहले 2 नवंबर 2026 को डोटमा राजस्व सर्कल के अंतर्गत गेलागुरी गांव के पास जंगल से सटे इलाकों में देखा गया।
5 किमी प्रतिबंधित क्षेत्र में कौन-से गांव आते हैं?
प्रतिबंधित क्षेत्र में गेलागुरी, पूर्वी बोंगशिगांव, पश्चिमी डांगरखुटी, उत्तरी भालुकमारी, डांगरखुटी और घोरामारी — कुल 6 गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों के निवासियों के लिए वन क्षेत्र में प्रवेश हेतु डीएफओ की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
प्रतिबंधित क्षेत्र में क्या-क्या वर्जित है?
इस क्षेत्र में 5 या अधिक लोगों का एकत्र होना, हथियार व पारंपरिक हथियार (दाओ, भाले), जाल, जहर और फंदे ले जाना प्रतिबंधित है। इसके अलावा पटाखे फोड़ना, ढोल बजाना, लाउडस्पीकर का उपयोग, आग जलाना, फ्लैशलाइट और बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना भी पूरी तरह मना है।
बाघिन को पकड़ने के अभियान में कौन-कौन शामिल है?
बचाव अभियान में वन विभाग के अधिकृत कर्मचारी, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के वन्यजीव विशेषज्ञ, पुलिस और अन्य सरकारी दल शामिल हैं। इन्हें प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और कार्य की पूरी छूट दी गई है।
प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई होगी?
आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी — विशेषकर बाघिन को 'आदमखोर' बताने या उसे गोली मारे जाने जैसी अफवाहें — फैलाने पर भी सख्त चेतावनी दी है।
राष्ट्र प्रेस
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