बेंगलुरु में पाँचवें दिन भी तेंदुआ बेकाबू, ब्यादाराहल्ली के निवासियों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के बाहरी इलाके ब्यादाराहल्ली स्थित भरत नगर रिहायशी क्षेत्र में बार-बार नज़र आ रहा तेंदुआ सोमवार, 13 जुलाई को लगातार पाँचवें दिन भी वन विभाग की पकड़ से बाहर रहा। इस घटनाक्रम ने इलाके में भय का माहौल बना दिया है और वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
तेंदुए को पिछले गुरुवार, शुक्रवार और रविवार को रिहायशी इलाकों में देखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने जानवर को पकड़ने के लिए मुर्गियों को चारे के रूप में इस्तेमाल करते हुए एक पिंजरा लगाया, लेकिन तेंदुए की जगह आवारा कुत्ते उसमें फँस गए। इसके बाद अधिकारियों ने पिंजरे को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया।
माना जा रहा है कि पास के पार्क में घनी वनस्पतियाँ और झाड़ियाँ तेंदुए को छिपने का आसान ठिकाना दे रही हैं। स्थानीय विधायक एस.टी. सोमशेखर ने हस्तक्षेप करते हुए पार्क की सफाई का प्रबंध किया, लेकिन सफाई अभियान के बाद भी तेंदुआ फिर से दिखाई दिया।
आम जनता पर असर
तेंदुए की लगातार मौजूदगी से इलाके की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। जो पार्क और सार्वजनिक स्थान शाम के समय लोगों से गुलज़ार रहते थे, वे अब काफी हद तक सुनसान पड़े हैं। अंधेरे के बाद इलाके के कुछ हिस्सों में वाहनों की आवाजाही में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
पास के ईस्ट वेस्ट कॉलेज ने सुरक्षा के मद्देनज़र छुट्टियाँ घोषित कर दी हैं। एक निवासी ने कहा, 'बच्चे डरे हुए हैं और महिलाएँ, खासकर शाम के समय, घर से बाहर निकलने से कतरा रही हैं। अधिकारियों को उन निवासियों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए जिनके पास सीसीटीवी कैमरे हैं और तेंदुए की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए फुटेज का इस्तेमाल करना चाहिए।'
निवासियों की माँगें
स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर आरोप लगाया है कि अधिकारी मौके पर शायद ही कभी मौजूद रहते हैं और महज़ एक पिंजरा लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया है। एक निवासी ने सवाल उठाया, 'अगर तेंदुआ किसी पर हमला करता है तो कौन जिम्मेदार होगा?' निवासी अब अतिरिक्त पिंजरे लगाने और 24 घंटे गश्त बढ़ाने की माँग कर रहे हैं।
चामराजनगर में किसानों का विरोध प्रदर्शन
इस बीच, चामराजनगर जिले में किसानों ने डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (DCF) के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला और वन विभाग पर जंगली जानवरों के हमलों से ग्रामीणों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
किसानों का आरोप है कि माले महादेश्वरा हिल्स और बिलिगिरिरंगना हिल्स के जंगलों में रहने वाले बूढ़े तेंदुए और बाघ, आवास क्षेत्र सिकुड़ने के कारण खाने की तलाश में गाँवों में घुस रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि वन विभाग जंगली इलाकों में जानवरों के लिए पर्याप्त शिकार और आवास प्रबंधन में नाकाम रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे अपना आंदोलन और तेज कर देंगे।
क्या होगा आगे
प्रदर्शनकारियों ने पूर्व वन मंत्री के उन वादों की भी याद दिलाई, जिनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली लागू करने की बात कही गई थी। उन्होंने सरकार से अपील की कि लोगों और जंगली जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन उपायों को तुरंत लागू किया जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक के कई हिस्सों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, और वन विभाग के संसाधनों व रणनीति पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।