14 जुलाई 2026
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बेंगलुरु में पाँचवें दिन भी तेंदुआ बेकाबू, ब्यादाराहल्ली के निवासियों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया

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बेंगलुरु में पाँचवें दिन भी तेंदुआ बेकाबू, ब्यादाराहल्ली के निवासियों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया

सारांश

बेंगलुरु के ब्यादाराहल्ली में पाँच दिनों से एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में घूम रहा है और वन विभाग का पिंजरा खाली पड़ा है। कॉलेज बंद, पार्क सुनसान — और चामराजनगर में किसान सड़क पर हैं। यह सिर्फ एक जानवर की कहानी नहीं, बल्कि सिकुड़ते जंगलों और बढ़ते संघर्ष की बड़ी तस्वीर है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु के ब्यादाराहल्ली, भरत नगर में तेंदुआ 13 जुलाई को लगातार पाँचवें दिन भी पकड़ से बाहर रहा।
वन विभाग के पिंजरे में तेंदुए की जगह आवारा कुत्ते फँसे; पिंजरा दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया।
पास के ईस्ट वेस्ट कॉलेज ने सुरक्षा के मद्देनज़र छुट्टियाँ घोषित कीं।
निवासियों ने अतिरिक्त पिंजरे और 24 घंटे गश्त की माँग की; सीसीटीवी फुटेज के उपयोग का सुझाव दिया।
चामराजनगर में किसानों ने DCF कार्यालय के बाहर विरोध मार्च निकाला, तत्काल कार्रवाई की माँग की।
किसानों का आरोप — माले महादेश्वरा हिल्स और बिलिगिरिरंगना हिल्स में आवास सिकुड़ने से जानवर बस्तियों में आ रहे हैं।

बेंगलुरु के बाहरी इलाके ब्यादाराहल्ली स्थित भरत नगर रिहायशी क्षेत्र में बार-बार नज़र आ रहा तेंदुआ सोमवार, 13 जुलाई को लगातार पाँचवें दिन भी वन विभाग की पकड़ से बाहर रहा। इस घटनाक्रम ने इलाके में भय का माहौल बना दिया है और वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

तेंदुए को पिछले गुरुवार, शुक्रवार और रविवार को रिहायशी इलाकों में देखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने जानवर को पकड़ने के लिए मुर्गियों को चारे के रूप में इस्तेमाल करते हुए एक पिंजरा लगाया, लेकिन तेंदुए की जगह आवारा कुत्ते उसमें फँस गए। इसके बाद अधिकारियों ने पिंजरे को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया।

माना जा रहा है कि पास के पार्क में घनी वनस्पतियाँ और झाड़ियाँ तेंदुए को छिपने का आसान ठिकाना दे रही हैं। स्थानीय विधायक एस.टी. सोमशेखर ने हस्तक्षेप करते हुए पार्क की सफाई का प्रबंध किया, लेकिन सफाई अभियान के बाद भी तेंदुआ फिर से दिखाई दिया।

आम जनता पर असर

तेंदुए की लगातार मौजूदगी से इलाके की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। जो पार्क और सार्वजनिक स्थान शाम के समय लोगों से गुलज़ार रहते थे, वे अब काफी हद तक सुनसान पड़े हैं। अंधेरे के बाद इलाके के कुछ हिस्सों में वाहनों की आवाजाही में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

पास के ईस्ट वेस्ट कॉलेज ने सुरक्षा के मद्देनज़र छुट्टियाँ घोषित कर दी हैं। एक निवासी ने कहा, 'बच्चे डरे हुए हैं और महिलाएँ, खासकर शाम के समय, घर से बाहर निकलने से कतरा रही हैं। अधिकारियों को उन निवासियों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए जिनके पास सीसीटीवी कैमरे हैं और तेंदुए की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए फुटेज का इस्तेमाल करना चाहिए।'

निवासियों की माँगें

स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर आरोप लगाया है कि अधिकारी मौके पर शायद ही कभी मौजूद रहते हैं और महज़ एक पिंजरा लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया है। एक निवासी ने सवाल उठाया, 'अगर तेंदुआ किसी पर हमला करता है तो कौन जिम्मेदार होगा?' निवासी अब अतिरिक्त पिंजरे लगाने और 24 घंटे गश्त बढ़ाने की माँग कर रहे हैं।

चामराजनगर में किसानों का विरोध प्रदर्शन

इस बीच, चामराजनगर जिले में किसानों ने डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (DCF) के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला और वन विभाग पर जंगली जानवरों के हमलों से ग्रामीणों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

किसानों का आरोप है कि माले महादेश्वरा हिल्स और बिलिगिरिरंगना हिल्स के जंगलों में रहने वाले बूढ़े तेंदुए और बाघ, आवास क्षेत्र सिकुड़ने के कारण खाने की तलाश में गाँवों में घुस रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि वन विभाग जंगली इलाकों में जानवरों के लिए पर्याप्त शिकार और आवास प्रबंधन में नाकाम रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे अपना आंदोलन और तेज कर देंगे।

क्या होगा आगे

प्रदर्शनकारियों ने पूर्व वन मंत्री के उन वादों की भी याद दिलाई, जिनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली लागू करने की बात कही गई थी। उन्होंने सरकार से अपील की कि लोगों और जंगली जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन उपायों को तुरंत लागू किया जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक के कई हिस्सों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, और वन विभाग के संसाधनों व रणनीति पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक पिंजरा, और उसमें कुत्ते — यह तस्वीर वन विभाग की तैयारी पर गंभीर सवाल उठाती है। चामराजनगर के किसानों का विरोध बताता है कि यह समस्या अकेले बेंगलुरु की नहीं, पूरे कर्नाटक की है। पूर्व वन मंत्री के 'वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली' के वादे कागज़ों में दबे हैं, जबकि जंगल सिकुड़ रहे हैं और जानवर बस्तियों में आ रहे हैं। जब तक आवास प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र एक साथ नहीं चलेंगे, ऐसे संकट बार-बार आते रहेंगे।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु के ब्यादाराहल्ली में तेंदुआ कहाँ-कहाँ देखा गया?
तेंदुआ बेंगलुरु के बाहरी इलाके ब्यादाराहल्ली के भरत नगर रिहायशी क्षेत्र में देखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पास के पार्क से रिहायशी इलाकों में घुसता है और इसे गुरुवार, शुक्रवार तथा रविवार को देखा गया था।
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए क्या कदम उठाए?
वन विभाग ने मुर्गियों को चारे के रूप में इस्तेमाल करते हुए एक पिंजरा लगाया, लेकिन उसमें तेंदुए की जगह आवारा कुत्ते फँस गए। इसके बाद पिंजरे को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। स्थानीय विधायक एस.टी. सोमशेखर ने पार्क की घनी वनस्पतियाँ साफ करवाईं, लेकिन तेंदुआ फिर भी दिखाई दिया।
ईस्ट वेस्ट कॉलेज ने छुट्टियाँ क्यों घोषित कीं?
भरत नगर के पास स्थित ईस्ट वेस्ट कॉलेज ने तेंदुए की लगातार मौजूदगी के कारण छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छुट्टियाँ घोषित कर दीं। इलाके में डर का माहौल है और बच्चे तथा महिलाएँ विशेष रूप से प्रभावित हैं।
चामराजनगर में किसानों ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
चामराजनगर के किसानों ने DCF कार्यालय के बाहर मार्च निकाला और माँग की कि माले महादेश्वरा हिल्स व बिलिगिरिरंगना हिल्स से आवास सिकुड़ने के कारण बस्तियों में घुस रहे तेंदुओं और बाघों को पकड़ा जाए। उनका आरोप है कि वन विभाग जंगलों में जानवरों के लिए पर्याप्त शिकार और आवास प्रबंधन में नाकाम रहा है।
निवासी वन विभाग से क्या माँग कर रहे हैं?
निवासी अतिरिक्त पिंजरे लगाने, 24 घंटे गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी फुटेज के ज़रिए तेंदुए की गतिविधियों पर नज़र रखने की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों को स्थानीय निवासियों के साथ समन्वय कर बेहतर ऑपरेशन की योजना बनानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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