बेंगलुरु डेकेयर कांड: आरोपी विजयलक्ष्मी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, SIT जांच तेज़
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के ब्रूकफील्ड स्थित सोसायटी जनरल बेबी केयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के मामले में 29वें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने मुख्य आरोपी विजयलक्ष्मी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 3 जुलाई को अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेजा गया। मामले में फरार बाकी आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही है।
मामला कैसे सामने आया
यह मामला तब उजागर हुआ जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें डेकेयर सेंटर के कर्मचारियों द्वारा छोटे बच्चों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार होते दिखाया गया। ये वीडियो बाद में बाल कल्याण समिति (CWC) तक भी पहुँचाए गए। शिकायतकर्ता तिलकेश कुमार के अनुसार, आरोपियों ने बच्चों को पीटा, बाथरूम में बंद किया, डराने के लिए वॉशिंग मशीन में बैठाया, जबरन वेस्टर्न टॉयलेट पर बैठाया और उनके मुँह में पानी की पाइप डालकर प्रताड़ित किया।
यह डेकेयर सेंटर ब्रूकफील्ड स्थित एक निजी कंपनी के परिसर में संचालित था। पुलिस के अनुसार वीडियो फुटेज में विजयलक्ष्मी को बच्चों के साथ मारपीट करते स्पष्ट रूप से देखा गया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
मामले में कुल पाँच आरोपियों की पहचान हुई है — मंजुला, विजयलक्ष्मी, भवानी, सिंधु और बिंदु। विजयलक्ष्मी को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी को हिरासत में लिया गया है और उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। शेष फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष पुलिस टीम सक्रिय है।
जाँच के दौरान पुलिस ने डेकेयर सेंटर की पूर्व कर्मचारी सुजाता — जिसे नौकरी से हटाया गया था — को पूछताछ के लिए बुलाया है और उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। डेटा रिकवरी के ज़रिये अहम डिजिटल साक्ष्य जुटाने की कोशिश जारी है।
SIT जाँच और साक्ष्य संग्रह
बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने वीडियो देखने के बाद इस घटना को 'गंभीर' और 'जघन्य' बताया। मामले की जाँच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की गई है। SIT ने डेकेयर सेंटर का निरीक्षण किया है और CCTV फुटेज की गहन पड़ताल की जा रही है।
अब तक डेकेयर सेंटर के आठ से दस कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है। इसके अलावा वहाँ के तीन बच्चों के अभिभावकों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। HAL पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति है। उन्होंने संबंधित विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
खड़गे ने स्पष्ट किया कि डेकेयर सेंटर और क्रेच संचालकों को तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए, विशेषकर 5 से 10 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं में।
आगे क्या होगा
SIT की जाँच जारी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह मामला देशभर में डेकेयर सेंटरों की निगरानी और नियमन पर बड़े सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन व्यापक नीतिगत सुधार अब तक सीमित रहे हैं।