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बक्सा बाघ अभ्यारण्य में बाघिन की वापसी: वाल्मीकि से एयरलिफ्ट, 2 अक्टूबर को जंगल में होगी आज़ाद

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बक्सा बाघ अभ्यारण्य में बाघिन की वापसी: वाल्मीकि से एयरलिफ्ट, 2 अक्टूबर को जंगल में होगी आज़ाद

सारांश

दशकों बाद बक्सा बाघ अभ्यारण्य में बाघ की वापसी होने जा रही है। वाल्मीकि जंगल से 70 कर्मियों की टीम ने एक सप्ताह की मशक्कत के बाद तीन वर्षीय बाघिन को पकड़ा, वायु सेना ने एयरलिफ्ट किया और 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर उसे जंगल में आज़ाद किया जाएगा — भारतीय बाघ संरक्षण की एक ऐतिहासिक कोशिश।

मुख्य बातें

वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य, बिहार से तीन वर्षीय बाघिन को 30 सितंबर को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से हासिमारा वायुसेना स्टेशन पहुँचाया गया।
एक सप्ताह के खोज अभियान में 70 बाघ बचाव कर्मियों की टीम ने मंगलवार सूर्यास्त से पहले बाघिन को स्लीपर डार्ट्स से बेहोश कर पकड़ा।
बाघिन को 2 अक्टूबर , गांधी जयंती पर बक्सा बाघ अभ्यारण्य के 2.2 हेक्टेयर प्राकृतिक बाड़े में छोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के शामिल होने की उम्मीद है।
स्थानांतरण में वन, वन्यजीव और रक्षा विभागों के बीच समन्वय शामिल था; हासिमारा से बक्सा की दूरी लगभग 37 किलोमीटर है।

बिहार के वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य से लाई गई एक तीन वर्षीय बाघिन को बुधवार, 30 सितंबर की सुबह भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से उत्तरी बंगाल के हासिमारा वायुसेना स्टेशन पहुँचाया गया। यह स्थानांतरण बक्सा बाघ अभ्यारण्य में लगभग विलुप्त हो चुकी बाघ आबादी को पुनर्जीवित करने की महत्वाकांक्षी पहल का हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार, बाघिन को 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर 2.2 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़े में छोड़ा जाएगा।

कैसे हुआ बाघिन का रेस्क्यू

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगभग 70 बाघ बचाव कर्मियों की एक टीम ने खराब मौसम के बावजूद कई दिनों तक वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य में बाघिन की तलाश की। मंगलवार को सूर्यास्त से ठीक पहले उसे स्लीपर डार्ट्स से बेहोश करके पकड़ा गया — एक सप्ताह तक चले खोज अभियान की सफल परिणति।

पकड़े जाने के बाद बाघिन की तत्काल स्वास्थ्य जाँच की गई और उसे बिहार के चंपारण जिले स्थित वाल्मीकि अभ्यारण्य से लगभग 125 किलोमीटर दूर गोरखपुर हवाई अड्डे तक सड़क मार्ग से ले जाया गया। वहाँ से विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पिंजरे में पूर्ण चिकित्सा सहायता के साथ उसे हवाई मार्ग से रवाना किया गया।

हासिमारा में आगमन और चिकित्सा परीक्षण

भारतीय वायु सेना का हेलीकॉप्टर बाघिन को लेकर सुबह लगभग 4:45 बजे हासिमारा वायुसेना स्टेशन पहुँचा। उतरने के बाद दो वन्यजीव पशु चिकित्सकों और बाघ विशेषज्ञों ने एक घंटे से अधिक समय तक उसके शारीरिक मापदंडों की विस्तृत जाँच की।

इसके बाद बाघिन को सड़क मार्ग से हासिमारा से लगभग 37 किलोमीटर दूर स्थित बक्सा बाघ अभ्यारण्य की ओर रवाना किया गया। पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए।

बक्सा में प्रवेश और अस्थायी आवास

बाघिन शाम लगभग 6:45 बजे राजभटखावा गेट से बक्सा अभ्यारण्य में दाखिल हुई। उसे 25 माइल्स स्थित वन विभाग की विशेष सुविधा में ले जाया गया, जहाँ उसे अस्थायी रूप से रखा गया है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर उसे 2.2 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़े में स्थानांतरित किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस पूरे अभियान में वन, वन्यजीव और रक्षा विभागों के बीच असाधारण समन्वय देखा गया — जो इस परियोजना की प्राथमिकता को रेखांकित करता है।

राजनीतिक भागीदारी और आगे की योजना

अधिकारियों के अनुसार, 2 अक्टूबर के कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के शामिल होने की उम्मीद है। बाघिन के छोड़े जाने के बाद वन अधिकारी उसके अनुकूलन और गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था करेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब बक्सा बाघ अभ्यारण्य दशकों से बाघों की अनुपस्थिति के कारण संरक्षण जगत में चिंता का विषय रहा है। इस पुनर्प्रवेश कार्यक्रम को भारत के बाघ संरक्षण प्रयासों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिकार की उपलब्धता और दीर्घकालिक प्रजनन की संभावना — ये सभी अनिश्चित हैं। गांधी जयंती पर इस रिलीज़ का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट है, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञ चेताते हैं कि एकल पुनर्प्रवेश से टिकाऊ आबादी नहीं बनती — इसके लिए निरंतर निगरानी और अतिरिक्त बाघों का स्थानांतरण ज़रूरी होगा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बक्सा बाघ अभ्यारण्य में बाघिन को कब छोड़ा जाएगा?
बाघिन को 2 अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती के अवसर पर बक्सा बाघ अभ्यारण्य के 2.2 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़े में छोड़ा जाएगा। फिलहाल उसे 25 माइल्स स्थित वन विभाग की विशेष सुविधा में रखा गया है।
बाघिन को वाल्मीकि से बक्सा क्यों लाया गया?
यह स्थानांतरण बक्सा बाघ अभ्यारण्य में लगभग विलुप्त हो चुकी बाघ आबादी को पुनर्जीवित करने की व्यापक पहल का हिस्सा है। अभ्यारण्य लंबे समय से बाघों की अनुपस्थिति के कारण संरक्षण चिंताओं के केंद्र में रहा है।
बाघिन को कैसे पकड़ा गया?
लगभग 70 बाघ बचाव कर्मियों की टीम ने एक सप्ताह तक खराब मौसम में वाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य में तलाश के बाद मंगलवार को सूर्यास्त से पहले स्लीपर डार्ट्स से बाघिन को बेहोश करके पकड़ा। इसके बाद उसकी स्वास्थ्य जाँच की गई और गोरखपुर हवाई अड्डे से एयरलिफ्ट किया गया।
इस कार्यक्रम में कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे?
अधिकारियों के अनुसार, 2 अक्टूबर के रिलीज़ कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के शामिल होने की उम्मीद है।
बाघिन के स्थानांतरण में कौन-कौन से विभागों ने भाग लिया?
इस स्थानांतरण में वन विभाग, वन्यजीव विभाग और रक्षा विभाग (भारतीय वायु सेना) के बीच समन्वय शामिल था। वायु सेना के हेलीकॉप्टर ने बाघिन को गोरखपुर से हासिमारा पहुँचाया, जबकि वन्यजीव पशु चिकित्सकों और बाघ विशेषज्ञों ने उसके स्वास्थ्य की निगरानी की।
राष्ट्र प्रेस
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