असम बाघ संरक्षण में राष्ट्रीय मॉडल बना: CM हिमंत सरमा ने नामेरी में 4 गुना वृद्धि का किया उल्लेख
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 29 जुलाई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर कहा कि असम अब बाघ संरक्षण के क्षेत्र में भारत के अग्रणी उदाहरणों में शुमार हो गया है। उन्होंने रॉयल बंगाल टाइगर की आबादी में हो रही निरंतर वृद्धि का श्रेय अवैध शिकार-रोधी अभियानों, प्राकृतिक आवास संरक्षण और तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों को दिया।
मुख्यमंत्री का संदेश और मुख्य दावे
सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि असम आवास प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के एक बेहतरीन मॉडल के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा और तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों को लागू करने पर दिए गए निरंतर जोर ने बाघों के जीवित रहने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर बाघों की घटती संख्या एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, और भारत उन चुनिंदा देशों में है जहाँ बाघों की आबादी में सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है।
नामेरी टाइगर रिजर्व: सबसे बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने नामेरी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी संरक्षण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, इस रिजर्व में बाघों की संख्या महज 3 से बढ़कर 12 हो गई है — यानी चार गुना वृद्धि। सरमा ने इसे वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन और समन्वित सुरक्षा उपायों की सफलता का प्रमाण बताया।
गौरतलब है कि नामेरी असम के अपेक्षाकृत छोटे रिजर्वों में से एक है, और यहाँ इतनी तेज़ वृद्धि संरक्षण विशेषज्ञों के लिए भी उत्साहजनक मानी जा रही है।
असम के चार प्रमुख टाइगर रिजर्व
मुख्यमंत्री ने असम के चारों प्रमुख टाइगर रिजर्वों — काजीरंगा, मानस, ओरंग और नामेरी — को रॉयल बंगाल टाइगर के लिए सुरक्षित और फलते-फूलते आवास बताया। उन्होंने कहा कि ये रिजर्व देश की इस विशेष और दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो एक सींग वाले गैंडे के लिए विश्वविख्यात है, बाघ संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।
पारिस्थितिक संतुलन पर जोर
सरमा ने शीर्ष शिकारियों के संरक्षण को पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने आम जनता से वन्यजीव संरक्षण पहलों में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि इन शानदार जानवरों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने की ज़रूरत है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि असम के संरक्षण मॉडल की असली परीक्षा मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर बाघों के आवास को सुरक्षित रखने में है। राज्य सरकार द्वारा तकनीक-आधारित निगरानी के विस्तार और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा पर भविष्य की नीतियाँ इस दिशा में निर्णायक साबित होंगी।