JPSC-JSSC अनियमितता: रघुवर दास और हिमंता सरमा ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरा, CBI जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन को 4 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए छात्रों की मांगों को न्यायसंगत करार दिया। दोनों नेताओं ने राज्य सरकार से पूरे मामले की CBI जांच कराने और छात्रों से सीधे संवाद करने की अपील की।
रघुवर दास का बयान: धरनास्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव
जमशेदपुर में मीडिया से बातचीत में रघुवर दास ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत छात्रों की दशा देखकर उनका मन व्यथित है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरनास्थल पर न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही छात्रों को टेंट लगाने की अनुमति दी गई है। दास ने कहा कि उन्होंने स्वयं छात्र आंदोलन से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी, इसलिए वे आंदोलनरत युवाओं की पीड़ा को भली-भाँति समझते हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ई-मेल भेजकर आग्रह किया है कि इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील विषय के रूप में देखा जाए। दास ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
भर्ती घोटाले के आरोप और CBI जांच की मांग
रघुवर दास ने दावा किया कि जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में 1.33 लाख नियुक्तियां हुई थीं, जिन पर किसी प्रकार का विवाद नहीं उठा, जबकि पिछले पाँच-छह वर्षों में पेपर लीक और भर्ती घोटालों के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की माँग के अनुरूप पूरे मामले की CBI जांच कराने का आग्रह किया।
दास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी अपील की कि वे झारखंड आकर उत्पाद सिपाही बहाली प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग उठाएं।
हिमंता बिस्वा सरमा का एक्स पोस्ट: 'युवाओं के साथ अन्याय स्वीकार्य नहीं'
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आंदोलनरत छात्रों को नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने लिखा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों की पीड़ा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं को करीब से समझने का अवसर मिला था।
सरमा ने कहा कि यदि झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार ने समय रहते छात्रों की शिकायतों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की होती, तो स्थिति यहाँ तक नहीं पहुँचती। उन्होंने राज्य सरकार से छात्रों की जायज मांगों को अविलंब स्वीकार करने और उनके साथ न्याय सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
आम अभ्यर्थियों पर असर
भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितता और पेपर लीक के आरोपों से लाखों युवाओं का भविष्य संकट में पड़ गया है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी नौकरियों की माँग पहले से ही बेहद अधिक है और प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। गौरतलब है कि पेपर लीक और भर्ती विवाद पिछले कुछ वर्षों में देशभर में एक बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं, और झारखंड इस संकट से अछूता नहीं रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल हेमंत सोरेन सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BJP नेताओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के जारी धरने के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार CBI जांच और सीधे संवाद की मांग पर क्या रुख अपनाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन यदि और विस्तार पाया, तो राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।