रांची: JPSC-JSSC अनियमितता पर 21 दिन से सत्याग्रह, अनशनकारी देवेंद्र-हबीबा की CM हेमंत सोरेन से भावुक अपील
सारांश
मुख्य बातें
रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्र सत्याग्रह 14 अगस्त 2026 को अपने 21वें दिन भी जारी रहा। गुरुवार की रात हुई तेज बारिश के बावजूद सैकड़ों छात्र जयपाल सिंह स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पर अडिग रहे। अस्पताल में भर्ती अनशनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और छात्रा उम्मे हबीबा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों की माँगों पर तत्काल पहल करने की अपील की है।
अनशन का 21वाँ दिन: क्या है स्थिति
रांची सदर अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो का अनशन शुक्रवार को 12वें दिन भी जारी रहा। विधानसभा घेराव के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उपचार के बावजूद उन्होंने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया। इसी तरह, छात्रा उम्मे हबीबा को बीते मंगलवार को जयपाल सिंह स्टेडियम में तबीयत बिगड़ने के बाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था — वे भी अनशन पर कायम हैं।
देवेंद्र महतो का संदेश: 'लोकतंत्र रहना चाहिए'
देवेंद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधी अपील करते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री जी, छात्रों की बात सुनिए। उनके साथ बैठिए, उनकी समस्याओं को समझिए और जल्द समाधान की पहल कीजिए।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैं रहूं या न रहूं, लोकतंत्र रहना चाहिए।' देवेंद्र ने स्पष्ट किया कि छात्रों की माँगें पूरी होने तक उनका अनशन जारी रहेगा और यह संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि लाखों छात्र-युवाओं के भविष्य और अधिकारों से जुड़ा है।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से भी आग्रह किया कि उन्हें जयपाल सिंह स्टेडियम जाने की अनुमति दी जाए। उनके समर्थकों ने भी अस्पताल से उनकी रिहाई की माँग की है।
हबीबा की भावुक वीडियो अपील
सदर अस्पताल में इलाजरत उम्मे हबीबा ने एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री से कहा, 'हम बेहद तकलीफ में हैं। हम सभी आपके ही बच्चे हैं। हमारी बातें सुनिए। हमें यकीन है कि आप बातचीत करेंगे तो हमारी समस्याओं का हल निकल आएगा।' यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया और छात्रों में एकजुटता की भावना को और मज़बूत किया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह सत्याग्रह जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुआ था। छात्रों की माँग है कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करे और दोषियों पर कार्रवाई हो। गौरतलब है कि झारखंड में परीक्षा अनियमितताओं को लेकर यह पहली बड़ी छात्र लामबंदी नहीं है — राज्य में इससे पहले भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार बातचीत की पहल नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और चिकित्सा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।