झारखंड भर्ती परीक्षा अनियमितताओं पर असम CM हिमंत सरमा का छात्रों को समर्थन, JMM गठबंधन पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 4 अगस्त 2026 को झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने सत्ताधारी जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन पर आरोप लगाया कि वह छात्रों की शिकायतों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हल करने में विफल रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों के दर्द, गुस्से और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं को करीब से देखने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं और आज लाखों युवाओं का भविष्य संकट में है।"
झारखंड में छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह विरोध प्रदर्शन रांची में जारी है, जहाँ छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। प्रदर्शनकारी 19 अप्रैल को हुई 14वीं जेएसपीसी संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की माँग कर रहे हैं।
इसके अलावा छात्र राज्य की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से स्वतंत्र जाँच की भी माँग कर रहे हैं।
सरमा का आरोप — समय पर कार्रवाई होती तो टल सकती थी अशांति
सरमा ने कहा कि यदि झारखंड सरकार ने अभ्यर्थियों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की होती, तो मौजूदा अशांति को रोका जा सकता था। उनके अनुसार राज्य प्रशासन की ओर से संवेदनशील और पारदर्शी प्रतिक्रिया से अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने में मदद मिलती।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धाँधली के आरोप पूरे देश में एक बड़ी राजनीतिक बहस का विषय बन चुके हैं।
सरमा की अपील — छात्रों को न्याय दिलाए झारखंड सरकार
आंदोलन कर रहे छात्रों को अपना "नैतिक समर्थन" देते हुए सरमा ने झारखंड सरकार से उनकी जायज माँगें स्वीकार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "मैं झारखंड के छात्रों और युवाओं के इस न्यायसंगत आंदोलन के लिए अपना नैतिक समर्थन व्यक्त करता हूँ और राज्य सरकार से आग्रह करता हूँ कि वह छात्रों की जायज माँगों को तुरंत स्वीकार करे और उन्हें न्याय दिलाए। युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।"
आगे क्या
झारखंड सरकार की ओर से अभी तक इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। CBI और ED जाँच की माँग और 14वीं जेएसपीसी परीक्षा रद्द करने का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती और गहरी हो सकती है।