राजस्थान: 25 निकायों में भाजपा निर्विरोध, भरतपुर महापौर पद पर कांग्रेस ने लगाया दबाव का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में 18 सितंबर 2026 को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यभर के 25 नगर निकायों में अध्यक्ष, सभापति और अध्यक्ष पदों पर अपने उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत का दावा किया। इसी क्रम में भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगमों में भी भाजपा प्रत्याशियों के महापौर पद पर निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
भरतपुर में त्रिशंकु परिणाम और नाटकीय पलटाव
भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में हाल ही में संपन्न चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार सबसे बड़े समूह के रूप में उभरे, जिन्होंने 36 सीटें जीतीं। भाजपा को 20 सीटें, कांग्रेस को 7 सीटें, तथा बसपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) को एक-एक सीट मिली। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने से यह स्पष्ट था कि महापौर चुनाव का फैसला निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर करेगा।
भाजपा ने अनुराधा सिंह को महापौर पद की उम्मीदवार बनाया था। वार्ड 17 से निर्दलीय पार्षद विचित्र सिंह ने कथित तौर पर कांग्रेस के समर्थन से नामांकन दाखिल किया था, जिससे कड़ी प्रतिस्पर्धा की संभावना बन गई थी। यह ऐसे समय में आया जब भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला होने के कारण राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा था।
नामांकन वापसी और विवाद
18 सितंबर को विचित्र सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद अनुराधा सिंह एकमात्र उम्मीदवार बचीं और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने पर निर्विरोध निर्वाचित होने की स्थिति में आ गईं। रिपोर्टों के अनुसार, नामांकन वापसी से पहले विचित्र सिंह ने राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेधम से करीब दो घंटे की मुलाकात की। इसके बाद बेधम ने विचित्र सिंह के पति और भरतपुर के पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट से भी मिले।
नामांकन वापस लेने के बाद विचित्र सिंह ने कहा कि वह भरतपुर के विकास में योगदान देना चाहती थीं और इसी उद्देश्य से उन्होंने यह निर्णय लिया। भाजपा नेताओं और उम्मीदवार ने भी इस घटनाक्रम पर अपना-अपना पक्ष रखा।
कांग्रेस के आरोप और सरकार का जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अलग-अलग नामांकन वापसी के हालात पर सवाल उठाए और भाजपा सरकार पर महापौर चुनाव को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र का उपयोग करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि निर्दलीय उम्मीदवार पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव डाला गया। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना राजनीतिक रुख बरकरार रखा है।
भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत
भीलवाड़ा नगर निगम में स्थिति भरतपुर से भिन्न रही। यहाँ भाजपा को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ और महापौर पद पर भी पार्टी ने निर्विरोध जीत दर्ज की। दोनों निगमों के परिणाम भाजपा के लिए तकनीकी रूप से समान होने के बावजूद राजनीतिक परिस्थितियों की दृष्टि से एकदम अलग हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका राजनीतिक नतीजे तय करने में अहम रही हो। राजस्थान में त्रिशंकु नगर निगमों का इतिहास सियासी खींचतान का गवाह रहा है। अब अनुराधा सिंह के महापौर बनने के बाद भरतपुर निगम में 36 निर्दलीय पार्षदों के साथ तालमेल बनाए रखना प्रशासनिक रूप से एक बड़ी चुनौती होगी।