जेपीएससी छात्रों पर लाठीचार्ज: चंपई सोरेन की चेतावनी — झारखंड सरकार की तानाशाही नहीं सहेगी भाजपा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने 22 अगस्त को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) उत्तीर्ण छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और मारपीट की कड़ी निंदा करते हुए झारखंड सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि भाजपा इस तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर अत्याचार जारी रहा तो हालात गृहयुद्ध जैसे हो सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन शुक्रवार को हिंसक रूप ले गया। रांची, गिरिडीह और हजारीबाग — तीनों जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने पहुँचे छात्रों और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
चंपई सोरेन का बयान
चंपई सोरेन ने कहा, 'इस तरह से काम न करें, वरना विरोध-प्रदर्शन बढ़ेंगे और हालात गृहयुद्ध जैसे हो सकते हैं।' उन्होंने छात्रों के संयम की सराहना करते हुए कहा कि छात्र और युवा बेहद अनुशासित रहे — उनके पास जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि लोगों को जबरन झंडे देकर लाया गया और छात्रों की पिटाई के लिए उनका इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, 'यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है — यह रोज़गार के लिए संघर्ष है, एक गैर-राजनीतिक आंदोलन।'
सरकार पर भाजपा के आरोप
चंपई सोरेन ने झारखंड सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों के साथ छल करते हुए 'नौकरी बेचने का काम' किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि JPSC को रद्द करने की आखिर क्या ज़रूरत थी और इसे झारखंड सरकार की बढ़ती तानाशाही का प्रमाण बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा विपक्ष की भूमिका में है और छात्रों पर अत्याचार होने पर चुप नहीं बैठेगी — हर जगह विरोध होगा।
आम जनता और छात्रों पर असर
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से राज्य के हज़ारों युवा प्रभावित हैं, जो लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। यह आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार की माँग तक सीमित नहीं रहा — यह झारखंड में युवा बेरोज़गारी और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता का व्यापक सवाल बन चुका है।
क्या होगा आगे
भाजपा के तेवर और छात्र आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों की माँगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं, क्योंकि आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।