झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज: NDA नेताओं ने सोरेन सरकार से माँगी CBI जाँच
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में छात्रों के 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई — जिसमें कंटीले तार, वाटर कैनन और लाठीचार्ज शामिल बताए जा रहे हैं — को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। 11 अगस्त को विभिन्न दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को घेरते हुए जाँच और संवाद की माँग उठाई।
मुख्य घटनाक्रम
छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में झारखंड विधानसभा का घेराव करने निकले थे। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस ने रास्ता रोकने के लिए कंटीले तार लगाए, वाटर कैनन चलाई और लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
NDA नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने सीबीआई जाँच की माँग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार की ओर से कोई गलती नहीं हुई है और किसी तरह की हेराफेरी नहीं हुई, तो जाँच कराने में सरकार को परेशानी नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जाँच न कराने से लोगों के मन में संदेह पैदा होता है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने विपक्ष पर 'डबल स्टैंडर्ड' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन को जो समर्थन मिलता है, वह झारखंड के छात्रों को नहीं मिल रहा। नकवी ने यह भी रेखांकित किया कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है और प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी गड़बड़ी को दूर करना केंद्र और राज्य, दोनों की जिम्मेदारी है।
लखनऊ से BJP नेता नीरज सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में तो पहुँचे, लेकिन झारखंड के घायल छात्रों की सुध नहीं ली।
विपक्ष और इंडिया गठबंधन की स्थिति
आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक संजीव झा ने कहा कि आँसू गैस और लाठीचार्ज किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों के साथ बैठकर उनकी माँगों पर चर्चा की जाए।
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जिम्मेदारी बनती है कि वे छात्रों से बातचीत करें और उनकी समस्याओं का समाधान निकालें। यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि शिवसेना (UBT) स्वयं इंडिया गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी शामिल है।
विजयवाड़ा में आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के उपाध्यक्ष गुरुनाधम ने कांग्रेस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी ने झारखंड सरकार से अनुरोध किया है कि छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की जाए और उनकी समस्याओं को समझा जाए।
आम जनता और छात्रों पर असर
यह आंदोलन ऐसे समय में उभरा है जब पूरे देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर छात्रों में व्यापक असंतोष है। गौरतलब है कि NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद से छात्र-आंदोलन कई राज्यों में सक्रिय हुए हैं। झारखंड में घायल हुए छात्रों की सटीक संख्या अभी तक आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हुई है।
आगे क्या
सोरेन सरकार पर अब संवाद की पहल करने का दबाव बढ़ रहा है — न केवल विपक्ष की ओर से, बल्कि गठबंधन के अंदर से भी। यदि सरकार जल्द बातचीत का रास्ता नहीं खोलती, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है।