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गुजरात में चांदीपुरा वायरस: 42 पुष्ट मामले, 28 मौतें — मृत्यु दर 66.7% तक पहुँची

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस: 42 पुष्ट मामले, 28 मौतें — मृत्यु दर 66.7% तक पहुँची

सारांश

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप थम नहीं रहा — 30 जून से अब तक 324 संदिग्ध मामलों में 42 पुष्ट हुए और 28 जानें गईं। 66.7% मृत्यु दर और बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि कीट-नियंत्रण अभियानों के बावजूद वायरस पर काबू पाना अभी बाकी है।

मुख्य बातें

गुजरात में 30 जून से अब तक 324 संदिग्ध मामले दर्ज, जिनमें से 42 में चांदीपुरा वायरस की पुष्टि ।
28 मरीज़ों की मौत हो चुकी है; पुष्ट मामलों में मृत्यु दर लगभग 66.7% ।
10 नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है।
14 अगस्त को 41 पुष्ट मामले और 27 मौतें थीं — दो हफ्तों में संदिग्ध मामले 67 और बढ़े ।
वायरस मुख्यतः 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है और संक्रमित सैंडफ्लाई से फैलता है।
स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाँच और कीट-नियंत्रण अभियान चला रहा है।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 28 अगस्त को जारी ताज़ा आंकड़ों में बताया कि 30 जून से शुरू हुई मौजूदा निगरानी अवधि में 324 संदिग्ध मामले सामने आए, जिनमें से 42 में वायरस की प्रयोगशाला पुष्टि हो चुकी है और 28 मरीज़ों की जान जा चुकी है। अब तक दर्ज पुष्ट मामलों के आधार पर मृत्यु दर लगभग 66.7 प्रतिशत आँकी गई है, जो इस संक्रमण की गंभीरता को रेखांकित करती है।

ताज़ा आंकड़े और निगरानी की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 10 नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 14 अगस्त को 257 संदिग्ध मामलों में से 41 पुष्ट थे और 27 मौतें दर्ज थीं। यानी दो सप्ताह से भी कम समय में संदिग्ध मामले 67 और बढ़ गए, जबकि मृत्यु संख्या में एक की वृद्धि हुई।

इससे पहले 21 जुलाई को राज्य में केवल 63 संदिग्ध मामले थे, जिनमें से 12 की पुष्टि हुई थी। उस समय स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी तेज़ करते हुए घरों और पशुशालाओं के आसपास कीट-नियंत्रण अभियान शुरू किए थे — बावजूद इसके मामले बढ़ते रहे।

चांदीपुरा वायरस क्या है और यह कैसे फैलता है

चांदीपुरा वायरस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से जुड़ा एक गंभीर संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार, इस वायरस से अचानक तेज़ बुखार और तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) से जुड़े लक्षण उभरते हैं, जो तेज़ी से गंभीर रूप ले सकते हैं।

यह वायरस विशेष रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अधिक घातक माना जाता है। इसके प्रकोप की घटनाएँ ऐतिहासिक रूप से मध्य और पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में दर्ज होती रही हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और रोकथाम के उपाय

राज्य का स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर जाँच कर रहा है। सैंडफ्लाई पर नियंत्रण के लिए विशेष कीटनाशक अभियान चलाए जा रहे हैं और संदिग्ध मरीज़ों की सक्रिय निगरानी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के मौसम में कीट-जनित बीमारियों का प्रसार वैसे भी बढ़ जाता है।

गौरतलब है कि 30 जून से निगरानी अवधि शुरू होने के बाद से मामलों की रफ़्तार लगातार ऊपर रही है — पहले 63, फिर 257, और अब 324 संदिग्ध मामले। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि ज़मीनी स्तर पर प्रसार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, चांदीपुरा वायरस की उच्च मृत्यु दर को देखते हुए शीघ्र निदान और अस्पताल में भर्ती करना बेहद ज़रूरी है। अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि बच्चों में तेज़ बुखार या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और शेष 10 नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति की और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे राष्ट्रीय स्तर पर वह तत्परता नहीं मिल रही जो मिलनी चाहिए। 30 जून से लेकर अब तक तीन चरणों में मामले बढ़ते रहे — 63, फिर 257, अब 324 — यह दर्शाता है कि कीट-नियंत्रण उपाय पर्याप्त नहीं हैं। सवाल यह है कि जब वायरस मुख्यतः बच्चों को निशाना बनाता है और मृत्यु दर इतनी ऊँची है, तो केंद्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप में देरी क्यों? NCDC की निगरानी और राज्य के प्रयासों के बीच समन्वय की पारदर्शिता ज़रूरी है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदीपुरा वायरस क्या है और यह कैसे फैलता है?
चांदीपुरा वायरस एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से जुड़ा एक गंभीर संक्रमण है जो मुख्यतः संक्रमित सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार, इससे अचानक तेज़ बुखार और न्यूरोलॉजिकल लक्षण उभरते हैं, जो 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक घातक हो सकते हैं।
गुजरात में अब तक कितने चांदीपुरा वायरस के मामले और मौतें हुई हैं?
28 अगस्त 2026 तक गुजरात में 30 जून से शुरू हुई निगरानी अवधि में 324 संदिग्ध मामलों में से 42 में वायरस की पुष्टि हुई है और 28 लोगों की मौत हुई है। 10 नमूनों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
चांदीपुरा वायरस की मृत्यु दर इतनी अधिक क्यों है?
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पुष्ट मामलों के आधार पर मृत्यु दर लगभग 66.7% है। यह वायरस तंत्रिका तंत्र पर तेज़ी से हमला करता है, और विशेषज्ञों के मुताबिक शीघ्र निदान न होने पर स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।
गुजरात सरकार चांदीपुरा वायरस को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है?
राज्य का स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर जाँच कर रहा है और सैंडफ्लाई नियंत्रण के लिए विशेष कीटनाशक अभियान चला रहा है। घरों व पशुशालाओं के आसपास संक्रमण फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण के उपाय 21 जुलाई से ही जारी हैं।
क्या चांदीपुरा वायरस के मामले बढ़ रहे हैं?
हाँ, आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। 21 जुलाई को 63 संदिग्ध मामले थे, 14 अगस्त को 257 और अब 28 अगस्त को 324 हो गए हैं। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि निगरानी और रोकथाम के प्रयासों के बावजूद प्रसार पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।
राष्ट्र प्रेस
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