गुजरात में चांदीपुरा वायरस: 39 पुष्ट मामले, 23 मौतें; 217 संदिग्ध मरीजों की जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप गहराता जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा 8 अगस्त 2026 को जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून से अब तक 217 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 39 मामलों में संक्रमण की प्रयोगशाला-पुष्टि हो चुकी है और 23 मरीजों की मौत हो गई है। यह आंकड़े अगस्त के पहले सप्ताह की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं, जब 184 संदिग्ध मामले, 35 पुष्ट संक्रमण और 22 मौतें रिपोर्ट की गई थीं।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 217 में से 208 नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, जबकि शेष 9 नमूनों की जांच अभी लंबित है। इन्हीं 9 रिपोर्टों से यह स्पष्ट होगा कि पुष्ट मामलों की संख्या में और वृद्धि होती है या नहीं। गौरतलब है कि 14 जुलाई को विभाग ने केवल 27 संदिग्ध मामले दर्ज किए थे, जिनमें 7 पुष्ट, 12 नकारात्मक और 3 मौतें थीं — यानी महज़ तीन सप्ताह में संख्या कई गुना बढ़ गई है।
प्रकोप का केंद्र और विस्तार
इस प्रकोप की शुरुआत पंचमहल जिले के गोधरा तालुका के दो गांवों से हुई थी, जहां दो छोटे बच्चों की वायरस से संक्रमित होने के बाद मौत हो गई थी। इसके बाद जुलाई के मध्य तक संक्रमण राज्य के कई जिलों में फैल गया। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के कारण सैंडफ्लाई की सक्रियता चरम पर होती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मामले सामने आने के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण और कीटनाशक छिड़काव अभियान तेज़ कर दिया। पंचमहल जिले में सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें नमूने एकत्र करने और जांच के लिए तैनात की गईं। विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्यभर में निगरानी, जांच और नमूना परीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के ज़रिए फैलता है और विशेष रूप से बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकता है। यह बीमारी तेज़ी से गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए समय पर पहचान और उपचार को बेहद ज़रूरी माना जाता है। विशेषज्ञ बच्चों वाले परिवारों को सैंडफ्लाई से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
आगे क्या
अब सभी की नज़र 9 लंबित प्रयोगशाला रिपोर्टों पर है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि निगरानी अभियान और तेज़ किया जाएगा। यदि लंबित रिपोर्टों में भी संक्रमण की पुष्टि होती है, तो पुष्ट मामलों की संख्या में और वृद्धि संभव है।