9 अगस्त 2026
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गुजरात में चांदीपुरा वायरस: 39 पुष्ट मामले, 23 मौतें; 217 संदिग्ध मरीजों की जांच जारी

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गुजरात में चांदीपुरा वायरस: 39 पुष्ट मामले, 23 मौतें; 217 संदिग्ध मरीजों की जांच जारी

सारांश

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है — 30 जून से अब तक 217 संदिग्ध मामलों में 39 पुष्ट और 23 मौतें। सैंडफ्लाई से फैलने वाला यह वायरस बच्चों के लिए सबसे ख़तरनाक है और पंचमहल से शुरू होकर अब कई जिलों तक पहुंच चुका है।

मुख्य बातें

गुजरात स्वास्थ्य विभाग के 8 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार चांदीपुरा वायरस के 39 पुष्ट मामले और 23 मौतें दर्ज।
30 जून से अब तक 217 संदिग्ध मामले ; 208 नमूनों की रिपोर्ट मिली, 9 अभी लंबित।
प्रकोप की शुरुआत पंचमहल जिले के गोधरा तालुका के दो गांवों से हुई, जहां दो बच्चों की मौत हुई थी।
अगस्त के पहले सप्ताह की तुलना में संदिग्ध मामले 184 से 217 , पुष्ट 35 से 39 और मौतें 22 से 23 हो गईं।
वायरस मुख्यतः सैंडफ्लाई से फैलता है और बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकता है।
राज्य में घर-घर सर्वेक्षण , कीटनाशक छिड़काव और निगरानी अभियान जारी।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप गहराता जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा 8 अगस्त 2026 को जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून से अब तक 217 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 39 मामलों में संक्रमण की प्रयोगशाला-पुष्टि हो चुकी है और 23 मरीजों की मौत हो गई है। यह आंकड़े अगस्त के पहले सप्ताह की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं, जब 184 संदिग्ध मामले, 35 पुष्ट संक्रमण और 22 मौतें रिपोर्ट की गई थीं।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 217 में से 208 नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, जबकि शेष 9 नमूनों की जांच अभी लंबित है। इन्हीं 9 रिपोर्टों से यह स्पष्ट होगा कि पुष्ट मामलों की संख्या में और वृद्धि होती है या नहीं। गौरतलब है कि 14 जुलाई को विभाग ने केवल 27 संदिग्ध मामले दर्ज किए थे, जिनमें 7 पुष्ट, 12 नकारात्मक और 3 मौतें थीं — यानी महज़ तीन सप्ताह में संख्या कई गुना बढ़ गई है।

प्रकोप का केंद्र और विस्तार

इस प्रकोप की शुरुआत पंचमहल जिले के गोधरा तालुका के दो गांवों से हुई थी, जहां दो छोटे बच्चों की वायरस से संक्रमित होने के बाद मौत हो गई थी। इसके बाद जुलाई के मध्य तक संक्रमण राज्य के कई जिलों में फैल गया। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के कारण सैंडफ्लाई की सक्रियता चरम पर होती है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मामले सामने आने के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण और कीटनाशक छिड़काव अभियान तेज़ कर दिया। पंचमहल जिले में सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें नमूने एकत्र करने और जांच के लिए तैनात की गईं। विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्यभर में निगरानी, जांच और नमूना परीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के ज़रिए फैलता है और विशेष रूप से बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकता है। यह बीमारी तेज़ी से गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए समय पर पहचान और उपचार को बेहद ज़रूरी माना जाता है। विशेषज्ञ बच्चों वाले परिवारों को सैंडफ्लाई से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

आगे क्या

अब सभी की नज़र 9 लंबित प्रयोगशाला रिपोर्टों पर है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि निगरानी अभियान और तेज़ किया जाएगा। यदि लंबित रिपोर्टों में भी संक्रमण की पुष्टि होती है, तो पुष्ट मामलों की संख्या में और वृद्धि संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी दो दशक बाद भी न कोई टीका है, न कोई स्थापित उपचार प्रोटोकॉल। यह सवाल उठता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र ने इतने वर्षों में इस वायरस के खिलाफ क्या तैयारी की। मानसून के मौसम में सैंडफ्लाई नियंत्रण की चुनौती हर साल आती है, लेकिन प्रतिक्रिया अक्सर प्रकोप के बाद होती है, पहले नहीं। 23 मौतों में से अधिकांश बच्चे हैं — यह आंकड़ा महज़ स्वास्थ्य विफलता नहीं, बल्कि नीतिगत प्राथमिकता का प्रश्न भी है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदीपुरा वायरस क्या है और यह कैसे फैलता है?
चांदीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन घातक वायरल बीमारी है जो मुख्यतः सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलती है। यह विशेष रूप से बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकती है और तेज़ी से गंभीर रूप ले सकती है।
गुजरात में अब तक कितने मामले और मौतें हुई हैं?
8 अगस्त 2026 तक 30 जून से कुल 217 संदिग्ध मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 39 की प्रयोगशाला-पुष्टि हो चुकी है और 23 मरीजों की मौत हो गई है। 9 नमूनों की रिपोर्ट अभी भी लंबित है।
गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप कहां से शुरू हुआ?
प्रकोप सबसे पहले पंचमहल जिले के गोधरा तालुका के दो गांवों से सामने आया, जहां दो छोटे बच्चों की वायरस से संक्रमित होने के बाद मौत हो गई थी। इसके बाद यह राज्य के कई अन्य जिलों में भी फैल गया।
सरकार ने इस प्रकोप को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण, कीटनाशक छिड़काव और नमूना परीक्षण अभियान तेज़ किए हैं। पंचमहल जिले में सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें तैनात की गई हैं और राज्यभर में निगरानी जारी है।
क्या चांदीपुरा वायरस से बचाव का कोई टीका या इलाज उपलब्ध है?
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। समय पर पहचान और सहायक चिकित्सा देखभाल ही मुख्य उपाय है; सैंडफ्लाई से बचाव इसकी रोकथाम का सबसे कारगर तरीका माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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