7 अगस्त 2026
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चांदीपुरा वायरस प्रकोप: केंद्र ने गुजरात-राजस्थान में NJORT तैनात किया, 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण से जांच

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चांदीपुरा वायरस प्रकोप: केंद्र ने गुजरात-राजस्थान में NJORT तैनात किया, 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण से जांच

सारांश

चांदीपुरा वायरस के प्रकोप के बीच केंद्र ने गुजरात और राजस्थान में NJORT तैनात की है। पाँच ICMR संस्थान, जीनोम अनुक्रमण, 70 पशु नमूने और 15 अस्पतालों का निगरानी नेटवर्क — यह 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण इस वायरस के विरुद्ध अब तक की सबसे व्यापक वैज्ञानिक प्रतिक्रिया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को NJORT को गुजरात और राजस्थान में चांदीपुरा वायरस प्रकोप से निपटने के लिए तैनात किया।
NCDC, ICMR और DAHD के विशेषज्ञों की बहुविषयक टीम महामारी विज्ञान, वेक्टर निगरानी और नैदानिक प्रबंधन में राज्यों की सहायता करेगी।
पाँच प्रमुख ICMR संस्थान और एक ICAR संस्थान गुजरात स्वास्थ्य विभाग के साथ समानांतर वैज्ञानिक जांच कर रहे हैं।
अब तक लगभग 70 पशुओं के रक्त व दूध के नमूने एकत्र; GBRC गांधीनगर में वायरस का संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण जारी।
प्रारंभिक जीनोम विश्लेषण में मामूली आनुवंशिक भिन्नताएं मिलीं; विशेषज्ञों के अनुसार अंतिम निष्कर्ष के लिए विस्तृत अध्ययन आवश्यक।
देश भर के 15 तृतीयक अस्पतालों का AES निगरानी नेटवर्क जांच को अतिरिक्त समर्थन दे रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को चांदीपुरा वायरस रोग (CHPV) के बढ़ते प्रकोप से निपटने के लिए राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) को गुजरात और राजस्थान में तैनात किया है। यह तैनाती समन्वित एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की राज्य निगरानी इकाइयों के सहयोग से की गई है। हाल के वर्षों में यह चांदीपुरा वायरस के विरुद्ध सबसे व्यापक बहुसंस्थागत वैज्ञानिक प्रतिक्रियाओं में से एक मानी जा रही है।

NJORT की संरचना और कार्यक्षेत्र

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और पशुपालन व दुग्धपालन विभाग (DAHD) के विशेषज्ञों से मिलकर बनी यह बहुविषयक टीम दोनों राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रकोप की जांच, महामारी विज्ञान संबंधी आकलन, नैदानिक प्रबंधन, प्रयोगशाला समन्वय, वेक्टर निगरानी और जन-स्वास्थ्य उपायों के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। NCDC का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र (PHEOC) भी NJORT के समर्थन के लिए सक्रिय कर दिया गया है। टीम अपना क्षेत्र-मूल्यांकन पूरा करने के बाद मंत्रालय को सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।

राष्ट्रीय संस्थानों की समानांतर वैज्ञानिक जांच

चेन्नई स्थित ICMR-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (ICMR-NIE), पुद्दुचेरी स्थित ICMR-राष्ट्रीय वेक्टर नियंत्रण अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIVCR), पुणे स्थित ICMR-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (ICMR-NIV), हैदराबाद स्थित ICMR-राष्ट्रीय पूर्व-नैदानिक अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIPCR) और बेंगलुरु स्थित ICAR-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान (ICAR-NIVEDI) के विशेषज्ञ गुजरात राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर जांच कर रहे हैं। यह सहयोगात्मक अभ्यास महामारी विज्ञान, विषाणु विज्ञान, कीट विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान और प्रयोगशाला निदान — इन सभी विशेषज्ञताओं को एक साथ लाता है।

वाहक और आनुवंशिक जांच: क्या मिला अब तक

यद्यपि सैंडफ्लाई को CHPV का प्रमुख वाहक माना जाता है, वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि मच्छर, किलनी और अन्य सूक्ष्म कीट इसके संचरण में भूमिका निभा सकते हैं या नहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी विशिष्ट वाहक को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी — यह सबक 2024 के गुजरात प्रकोप से लिया गया है, जब कोई एकल वाहक निर्णायक रूप से चिह्नित नहीं किया जा सका था।

पशु निगरानी के तहत अब तक लगभग 70 पशुओं — गायों, भैंसों और बकरियों — के रक्त और दूध के नमूने एकत्र किए गए हैं। गांधीनगर स्थित गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (GBRC) में वर्तमान वायरस नमूनों का संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण किया जा रहा है। प्रारंभिक विश्लेषण में मामूली आनुवंशिक भिन्नताएं पाई गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्धारित करने के लिए विस्तृत तुलनात्मक जीनोमिक अध्ययन आवश्यक हैं कि वर्तमान वायरस पिछले उपभेदों से विकसित हुआ है या नहीं।

सामुदायिक और अस्पताल-आधारित निगरानी

प्रभावित जिलों में तीव्र बुखार संबंधी बीमारी (AFI) और तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) के रोगियों की सक्रिय निगरानी तेज कर दी गई है। लक्षणहीन संक्रमणों का अनुमान लगाने और वायरस के संचरण की वास्तविक सीमा आँकने के लिए समुदाय-आधारित सीरोसर्वेक्षण भी चलाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, देश भर के 15 तृतीयक देखभाल अस्पतालों में फैले अस्पताल-आधारित AES निगरानी नेटवर्क से भी जांच को समर्थन मिल रहा है, जो मानकीकृत नैदानिक प्रोटोकॉल और अगली पीढ़ी के अनुक्रमण का उपयोग करता है।

आगे की दिशा

ICMR-NIV, पुणे के शोधकर्ताओं ने ICMR-RMNIHR पटना, BJ मेडिकल कॉलेज अहमदाबाद और गुजरात सरकार के सहयोग से 'चांदीपुरा वायरस एन्सेफलाइटिस के प्रकोप की जांच, गुजरात, भारत, 2024' शीर्षक से एक शोध पत्र हाल ही में प्रकाशित किया है, जो 2024 के प्रकोप की बहुविषयक जांच का दस्तावेजीकरण करता है। केंद्र का यह समन्वित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण — जो मानव, पशु और वेक्टर निगरानी को एकीकृत करता है — भविष्य में ऐसे उभरते वायरल खतरों के प्रबंधन के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा समन्वय की गति में है — 2024 के गुजरात प्रकोप में भी व्यापक नमूना संग्रह हुआ था, फिर भी कोई निर्णायक वाहक चिह्नित नहीं हो सका। जीनोम अनुक्रमण और सीरोसर्वेक्षण सही दिशा में कदम हैं, परंतु 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण तभी सार्थक होगा जब पशु, वेक्टर और मानव निगरानी के निष्कर्ष समय पर एकीकृत होकर नीतिगत हस्तक्षेप में बदलें। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि CHPV के लिए अभी कोई स्वीकृत उपचार या टीका नहीं है — इसलिए वेक्टर पहचान और सामुदायिक रोकथाम ही एकमात्र व्यावहारिक हथियार हैं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदीपुरा वायरस (CHPV) क्या है और यह कितना खतरनाक है?
चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है जो मुख्यतः सैंडफ्लाई के माध्यम से फैलता माना जाता है और तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) का कारण बन सकता है। यह हल्के बुखार से लेकर गंभीर मस्तिष्क सूजन तक के लक्षण पैदा कर सकता है, और बच्चों में इसकी मृत्यु दर अधिक दर्ज की गई है।
NJORT क्या है और इसे क्यों तैनात किया गया?
राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) केंद्र सरकार की एक बहुविषयक विशेषज्ञ टीम है जिसे गंभीर रोग प्रकोपों के दौरान राज्यों की सहायता के लिए तैनात किया जाता है। चांदीपुरा वायरस के प्रकोप की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए इसे गुजरात और राजस्थान में भेजा गया है।
क्या चांदीपुरा वायरस पशुओं से इंसानों में फैल सकता है?
अधिकारियों के अनुसार, यह अभी जांच का विषय है। इसी उद्देश्य से गायों, भैंसों और बकरियों के लगभग 70 रक्त व दूध के नमूने एकत्र किए गए हैं। प्रयोगशाला जांच पूरी होने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
2024 के गुजरात प्रकोप और 2026 की मौजूदा जांच में क्या फर्क है?
2024 के प्रकोप में वाहक नमूने एकत्र किए गए थे लेकिन कोई निर्णायक वाहक चिह्नित नहीं हो सका। 2026 की जांच में जीनोम अनुक्रमण, सीरोसर्वेक्षण और 15 अस्पतालों के AES नेटवर्क को भी शामिल किया गया है, जो पिछली जांच से अधिक व्यापक है।
चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए आम जनता क्या करे?
अधिकारियों के अनुसार, सैंडफ्लाई और अन्य कीड़ों से बचाव — जैसे मच्छरदानी, कीटनाशक और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े — सबसे प्रभावी उपाय हैं। बुखार या मस्तिष्क संबंधी लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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