सुप्रीम कोर्ट ने तरुण हत्या मामले में परिवार की सुरक्षा और जांच पर सुनवाई से किया इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने तरुण हत्या मामले में परिवार की सुरक्षा और जांच पर सुनवाई से किया इनकार

सारांश

दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान युवक तरुण की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परिवार की सुरक्षा और जांच से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। जानें इस मामले की गहराई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया है।
परिवार ने 5 करोड़ का मुआवजा मांगा है।
मामले को दिल्ली पुलिस देखेगी।

नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के उत्तम नगर में होली के मौके पर युवक तरुण की हत्या के मामले में जांच और परिवार की सुरक्षा से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन द्वारा प्रस्तुत की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित पक्ष को दिल्ली पुलिस कमिश्नर के समक्ष सुरक्षा की मांग रखने और दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस शिकायत की अनदेखी करती है, तो याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट जा सकते हैं।

याचिका में पीड़ित परिवार को सुरक्षा और 5 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की गई थी। याचिका का तर्क है कि यह हत्या नहीं, बल्कि मॉब लिंचिंग है, इसलिए इस मामले में तहसीन पूनावाला के फैसले को भी लागू किया जाए।

वकील हरिशंकर जैन ने अपनी दलील में कहा, "यह एक लिंचिंग की भयानक घटना है और एक लड़के की जान चली गई है।"

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि सीबीआई के लोग रोज यहां आते हैं और काम के बोझ का हवाला देते हैं। दिल्ली पुलिस पेशेवर है। उन्हें हतोत्साहित क्यों किया जाए? यदि पुलिस को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है, तो पहले पुलिस कमिश्नर से संपर्क करें।

अदालत ने कहा कि कुछ निर्देश पीड़ित परिवार की सुरक्षा और हिफाजत से संबंधित हैं और प्रशासनिक प्रकृति के हैं। दिल्ली पुलिस इस मामले को देख सकती है। याचिकाकर्ता को यह छूट दी जाती है कि वे पुलिस कमिश्नर के सामने आवेदन करें। कोई दो राय नहीं है कि यदि पुलिस को किसी तरह के खतरे का अंदेशा होता है, तो वह आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाएगी। यदि इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो याचिकाकर्ता दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

ज्ञात हो कि दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन 4 मार्च को रंग के कुछ छीटें पड़ने पर विवाद शुरू हुआ था। यह रंग के छींटे दूसरे समुदाय की महिला के कपड़ों पर लगे थे। परिवार का दावा है कि रंग के छींटे लगने पर महिला से माफी मांग ली गई थी। हालांकि, महिला और उसके परिवार ने होली खेलने वाले परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया, जिसके दौरान तरुण की हत्या कर दी गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को भी सामने लाता है। सुप्रीम कोर्ट का याचिका पर सुनवाई से इनकार करना दर्शाता है कि मामले को स्थानीय पुलिस द्वारा सुलझाने की आवश्यकता है, जिससे न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया सुनवाई से इनकार?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए पीड़ित परिवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर के सामने अपनी मांग रखने का निर्देश दिया है।
क्या परिवार को सुरक्षा मिलेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि पुलिस को खतरे का अंदेशा होता है, तो वह आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाएगी।
तरुण हत्या केस की पृष्ठभूमि क्या है?
यह हत्या होली के दिन रंग के छींटे पड़ने के विवाद के बाद हुई, जिसमें दूसरे समुदाय के सदस्यों ने हमला किया।
राष्ट्र प्रेस