उत्तम नगर में युवक हत्या मामले पर मानवाधिकार आयोग का संज्ञान, अधिकारियों को नोटिस जारी
सारांश
Key Takeaways
- मानवाधिकार आयोग ने उत्तम नगर हत्या मामले पर संज्ञान लिया।
- जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया गया।
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा और मुआवजे का आश्वासन दिया गया।
- घटना से जुड़े सभी सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए।
- निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने कदम उठाए।
नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन एक युवक की हत्या के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पश्चिमी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट और दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। साथ ही उनसे दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।
यह नोटिस 12 मार्च को जारी किया गया। आयोग के सहायक रजिस्ट्रार (कानून) ने बताया कि 6 मार्च 2026 को प्राप्त शिकायत को 12 मार्च को आयोग के समक्ष रखा गया था। प्रारंभिक जांच के बाद आयोग ने इसे मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन का मामला मानते हुए कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
शिकायत में आरोप है कि 4 मार्च 2026 को होली के दिन दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में 26 वर्षीय एक हिंदू दलित युवक की कुछ लोगों ने बेरहमी से पिटाई करके हत्या कर दी। यह घटना होली खेलने के दौरान पानी के छींटे पड़ने से शुरू हुए एक मामूली विवाद के बाद हुई।
शिकायत के अनुसार, होली के दौरान गलती से पानी पड़ने पर दो परिवारों के बीच कहासुनी हो गई। युवक के परिवार ने माफी भी मांगी, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। बताया गया है कि उसी दिन, जब युवक अपने दोपहिया वाहन से घर लौट रहा था, तब करीब 15 से 20 लोगों के समूह ने उस पर हमला कर दिया।
हमलावरों ने कथित तौर पर ईंट, पत्थर और लोहे की रॉड से युवक पर हमला किया। इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
शिकायतकर्ता ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाए, सभी आरोपियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए, पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए और उचित मुआवजा भी प्रदान किया जाए।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है। आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि देश में सभी लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने की जिम्मेदारी आयोग की है। आयोग के पास जांच के मामलों में सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां भी हैं।
आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया है कि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की जाए। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि इस कथित अपराध में शामिल सभी लोगों की पहचान हो और कानून के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
आयोग ने यह भी कहा है कि चूंकि पीड़ित परिवार के सदस्य इस मामले में अहम गवाह हो सकते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा का आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
इसके अलावा, आयोग ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी संभावित सबूतों को सुरक्षित रखा जाए। आयोग ने कहा है कि सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े जो भी फोटो या वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, उन्हें भी जांच एजेंसी सुरक्षित करे क्योंकि उनमें फॉरेंसिक या अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
आयोग ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इकट्ठा कर उसे सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच में मदद मिल सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि घटनास्थल को ठीक तरह से सुरक्षित किया गया हो और वहां से सभी जरूरी फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हों।
इनमें उंगलियों के निशान, पैरों के निशान, हमले में इस्तेमाल किए गए पत्थर, ईंट या अन्य वस्तुएं और अन्य भौतिक साक्ष्य शामिल हैं। आयोग ने कहा है कि इन सभी साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से जांच के लिए संरक्षित किया जाए।
मानवाधिकार आयोग ने पश्चिमी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट और दिल्ली पुलिस आयुक्त से कहा है कि वे इस मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर आयोग को भेजें।