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महिला आरक्षण विधेयक पर संसद का विशेष सत्र: जयराम रमेश का आरोप, आचार संहिता का उल्लंघन

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महिला आरक्षण विधेयक पर संसद का विशेष सत्र: जयराम रमेश का आरोप, आचार संहिता का उल्लंघन

सारांश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर संसद के विशेष सत्र को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। उनके अनुसार, यह सत्र चुनावों के बीच बुलाया जा रहा है, जिससे राजनीतिक लाभ की संभावना बढ़ रही है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक पर विचार और पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है।
जयराम रमेश ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है।
कांग्रेस ने 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक की माँग की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी पार्टियों से समर्थन माँगा है।
विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है।

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा के सांसद और कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावों के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाना आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।

रविवार को, जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र को साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र पर अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं। यह सत्र अगले हफ्ते, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी प्रचार के बीच बुलाया जा रहा है, जो कि आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने खड़गे द्वारा विपक्ष के इस अनुरोध को दोहराया है कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद ही आयोजित की जाए।"

वास्तव में, महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करने के लिए अगले सप्ताह एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए समर्थन माँगा, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

हालांकि, कांग्रेस ने विशेष सत्र बुलाने से पहले परिसीमन से संबंधित सर्वदलीय बैठक कराने की माँग की है। पार्टी का मानना है कि यह सब 29 अप्रैल के बाद किया जाए, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार समाप्त हो जाएगा।

प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में, मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह महिला सशक्तिकरण के बजाय राजनीतिक लाभ उठाने के लिए महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है।

खड़गे ने अपने जवाब में लिखा, "विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है और सरकार परिसीमन से संबंधित किसी भी जानकारी को साझा किए बिना एक बार फिर विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा कर रही है।"

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि इस विशेष सत्र का उद्देश्य हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना और सभी को एक साथ लेकर चलना है, तो सरकार को सुझाव है कि 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक 'सर्वदलीय बैठक' बुलाए, ताकि परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की जा सके, जो 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम में किए जा रहे संशोधन से जुड़ा हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि संसद का विशेष सत्र चुनावी समय में बुलाना एक संवेदनशील मुद्दा है। यह न केवल आचार संहिता का उल्लंघन करता है, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा पर भी प्रश्न उठाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, का उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाना है।
जयराम रमेश ने क्या आरोप लगाया?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।
कांग्रेस ने विशेष सत्र को लेकर क्या माँग की है?
कांग्रेस ने माँग की है कि विशेष सत्र बुलाने से पहले परिसीमन के संबंध में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए।
इस विशेष सत्र का उद्देश्य क्या है?
इस विशेष सत्र का उद्देश्य महिला आरक्षण विधेयक पर विचार-विमर्श करना और उसे पारित करना है।
क्या सरकार ने किसी जानकारी साझा की है?
जयराम रमेश के अनुसार, सरकार ने परिसीमन से संबंधित कोई जानकारी साझा किए बिना ही विशेष सत्र बुलाया है।
राष्ट्र प्रेस
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