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'मन की बात' के 136वें एपिसोड में 'चोंगप्रेन्ग' का जिक्र, त्रिपुरा के सीएम साहा ने जताया गर्व

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'मन की बात' के 136वें एपिसोड में 'चोंगप्रेन्ग' का जिक्र, त्रिपुरा के सीएम साहा ने जताया गर्व

सारांश

PM मोदी ने 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में त्रिपुरा के पारंपरिक आदिवासी वाद्ययंत्र 'चोंगप्रेन्ग' और उसके संरक्षक सूरज कुमार देबबर्मा का उल्लेख कर राज्य को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। सीएम माणिक साहा ने इसे त्रिपुरा के हर वर्ग के लिए गर्व का क्षण बताया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में त्रिपुरा के आदिवासी वाद्ययंत्र 'चोंगप्रेन्ग' का विशेष उल्लेख किया।
सूरज कुमार देबबर्मा की 'चोंगप्रेन्ग' संरक्षण पहल को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर सराहा।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 26 जुलाई को अगरतला में इस उल्लेख को पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया।
सीएम साहा ने 'मन की बात' की तुलना रामायण-महाभारत जैसे कार्यक्रमों से की और कहा कि यह किसी पार्टी का नहीं, समाज के हर वर्ग का कार्यक्रम है।
सीएम ने 'परीक्षा पे चर्चा' पहल का भी उल्लेख किया और विपक्ष पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 26 जुलाई को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में त्रिपुरा के पारंपरिक आदिवासी वाद्ययंत्र 'चोंगप्रेन्ग' का उल्लेख कर पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। उन्होंने यह बात अगरतला के 13 प्रतापगढ़ मंडल के बूथ नंबर 51 पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के बाद कही।

मुख्य घटनाक्रम

प्रधानमंत्री मोदी ने इस एपिसोड में सूरज कुमार देबबर्मा की उस अनोखी पहल का विशेष उल्लेख किया, जिसके तहत वे त्रिपुरा के लुप्त होते पारंपरिक वाद्ययंत्र 'चोंगप्रेन्ग' को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने देश भर की प्रेरणादायक पहलों, खेल व अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारत की उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में आम नागरिकों के योगदान को भी रेखांकित किया।

सीएम साहा की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री साहा ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने एक बार फिर अपने मन की बात कार्यक्रम में त्रिपुरा का जिक्र किया है। यह हमारे राज्य के लोगों के लिए बहुत खुशी और गर्व की बात है।' उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व उन्हें स्वयं सूरज कुमार देबबर्मा का वाद्ययंत्र देखने और उन्हें माला पहनाकर सम्मानित करने का अवसर मिला था। साहा के अनुसार, यह सम्मान केवल देबबर्मा तक सीमित नहीं, बल्कि 'त्रिपुरा के हर जाति, जनजाति और समुदाय के लोगों का है।'

सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान

'चोंगप्रेन्ग' त्रिपुरा की आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इसे राष्ट्रीय मंच पर स्थान मिलना राज्य की सांस्कृतिक धरोहर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में लोक वाद्ययंत्रों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। गौरतलब है कि 'मन की बात' कार्यक्रम पहले भी कई बार स्थानीय नायकों और सांस्कृतिक पहलों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का माध्यम बना है।

'मन की बात' की लोकप्रियता पर सीएम का बयान

मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि देश भर के लोग अब हर महीने के आखिरी रविवार को इस कार्यक्रम का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा, 'पहले लोग रामायण और महाभारत देखने का इंतजार करते थे। आज वे मन की बात का इंतजार करते हैं क्योंकि यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं है — समाज के हर वर्ग के लोग इसे सुनते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत में कुछ विपक्षी नेताओं ने इसका मज़ाक उड़ाया था, लेकिन आम जनता ने इसे पूरे दिल से अपनाया।

युवाओं और 'परीक्षा पे चर्चा' का उल्लेख

सीएम साहा ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा देश के युवाओं पर विश्वास जताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की 'परीक्षा पे चर्चा' पहल का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे छात्रों को परीक्षा के दौरान तनाव-मुक्त रहने में सहायता मिलती है। साहा ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस पहल के संदर्भ में छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। त्रिपुरा की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर स्थान मिलने की यह घटना राज्य और केंद्र के बीच सांस्कृतिक संवाद को और मज़बूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने के व्यापक राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति करती है। हालांकि 'चोंगप्रेन्ग' जैसे लुप्तप्राय वाद्ययंत्रों को राष्ट्रीय मंच मिलना सांस्कृतिक दृष्टि से निस्संदेह सकारात्मक है, यह भी देखना होगा कि इस उल्लेख के बाद संरक्षण के लिए ठोस नीतिगत या वित्तीय समर्थन मिलता है या नहीं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बिंदु को नज़रअंदाज़ करती है कि 'मन की बात' में उल्लेख और वास्तविक सरकारी सहायता के बीच की खाई कितनी बड़ी हो सकती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'चोंगप्रेन्ग' क्या है और यह चर्चा में क्यों है?
'चोंगप्रेन्ग' त्रिपुरा का एक पारंपरिक आदिवासी वाद्ययंत्र है, जो धीरे-धीरे लुप्त होता जा रहा था। PM मोदी ने 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में इसके संरक्षण की पहल का उल्लेख किया, जिससे यह राष्ट्रीय चर्चा में आ गया।
सूरज कुमार देबबर्मा कौन हैं?
सूरज कुमार देबबर्मा त्रिपुरा के वे व्यक्ति हैं जो 'चोंगप्रेन्ग' वाद्ययंत्र को संरक्षित करने और उसे बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में उनकी इस अनोखी पहल की विशेष सराहना की।
'मन की बात' का 136वाँ एपिसोड कब प्रसारित हुआ?
यह एपिसोड 26 जुलाई को, महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित हुआ। त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा ने अगरतला के 13 प्रतापगढ़ मंडल के बूथ नंबर 51 पर आयोजित कार्यक्रम में इसे सुना।
सीएम माणिक साहा ने 'मन की बात' की तुलना किससे की?
सीएम साहा ने 'मन की बात' की तुलना रामायण और महाभारत जैसे दूरदर्शन कार्यक्रमों से की, यह कहते हुए कि जैसे पहले लोग उन कार्यक्रमों का इंतजार करते थे, वैसे ही अब हर महीने के आखिरी रविवार को 'मन की बात' का इंतजार करते हैं।
क्या 'मन की बात' में त्रिपुरा का पहले भी उल्लेख हुआ है?
सीएम साहा के बयान से स्पष्ट है कि यह पहली बार नहीं है — उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री ने एक बार फिर मन की बात में त्रिपुरा का जिक्र किया है।' इससे संकेत मिलता है कि इससे पूर्व भी राज्य को इस कार्यक्रम में स्थान मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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