मन की बात में PM मोदी ने सराहा: देबरीगढ़ की मैथिली भुए इको-टूरिज्म से 40-50 महिलाओं को दे रहीं रोजगार
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली मैथिली भुए को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में विशेष रूप से सराहा। इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की उनकी पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है। 30 अगस्त को भुए ने इस सम्मान पर खुशी और आभार व्यक्त किया।
संघर्ष से शुरू हुई यात्रा
मैथिली भुए एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। शुरुआती दिनों में उन्होंने तेंदू के पत्ते, बांस, महुआ, कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पाद इकट्ठा कर और बेचकर अपने परिवार का गुजारा किया। यह संघर्ष उन्हें एक नई दिशा की ओर ले गया।
2023 में उन्होंने देबरीगढ़ इको-टूरिज्म परियोजना से जुड़कर आजीविका का एक नया रास्ता खोजा। जंगल संरक्षण में उनके योगदान और पर्यटन को जोड़ने की सोच ने आसपास के गांवों की महिलाओं को भी इस पहल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
मन की बात में मिली राष्ट्रीय पहचान
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को प्रसारित मन की बात के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए के काम का उल्लेख करते हुए उनकी प्रशंसा की। भुए ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में मेरा नाम लिया और मेरे काम की तारीफ की। हमारी कोशिशों को पहचानने के लिए मैं उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।"
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला उद्यमिता को लेकर देशभर में नीतिगत चर्चा तेज हो रही है। गौरतलब है कि 'मन की बात' में आम नागरिकों की सफलता की कहानियाँ साझा करना प्रधानमंत्री की एक स्थायी प्राथमिकता रही है।
40-50 महिलाओं को दी जा रही ट्रेनिंग
भुए इस समय लगभग 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षण दे रही हैं। इस प्रशिक्षण में पर्यटकों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार, उनकी जरूरतों को समझना और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना शामिल है।
ये महिलाएं स्मारिका की दुकानें (सोवेनियर शॉप्स), चाय की दुकानें, रेस्तरां, नेचर कैंप और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। प्रत्येक महिला को उसकी जिम्मेदारी के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
आम जनता पर असर
भुए की पहल ने देबरीगढ़ के आसपास के गांवों में महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के नए अवसर खोले हैं। वन उत्पादों पर निर्भर परिवारों को अब पर्यटन से जुड़ी नियमित आय मिल रही है, जिससे आर्थिक स्थिरता बढ़ी है।
भुए ने कहा, "मैं चाहती हूं कि और महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और इको-टूरिज्म के जरिए अपनी आजीविका कमाएं। मैं उन्हें ट्रेनिंग दे रही हूं ताकि वे आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों की सेवा कर सकें और देबरीगढ़ के विकास में योगदान दे सकें।"
क्या होगा आगे
मैथिली भुए की योजना है कि अधिक से अधिक महिलाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा जाए और देबरीगढ़ को एक मॉडल इको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए। 'मन की बात' में मिली राष्ट्रीय पहचान के बाद इस क्षेत्र में पर्यटकों की रुचि और बढ़ने की संभावना है, जो स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के और अवसर खोल सकती है।