30 अगस्त 2026
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मन की बात में PM मोदी ने सराहा: देबरीगढ़ की मैथिली भुए इको-टूरिज्म से 40-50 महिलाओं को दे रहीं रोजगार

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मन की बात में PM मोदी ने सराहा: देबरीगढ़ की मैथिली भुए इको-टूरिज्म से 40-50 महिलाओं को दे रहीं रोजगार

सारांश

वन उत्पाद बेचकर गुजारा करने वाली मैथिली भुए ने 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़कर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि 40-50 महिलाओं को रोजगार का रास्ता दिखाया। PM मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में उनकी इस कोशिश को राष्ट्रीय मंच पर सराहा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में ओडिशा के देबरीगढ़ की मैथिली भुए के काम की प्रशंसा की।
भुए ने 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़कर आजीविका का नया रास्ता खोजा।
वह अभी 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी में प्रशिक्षण दे रही हैं।
महिलाएं स्मारिका दुकानें, चाय दुकानें, रेस्तरां, नेचर कैंप और होमस्टे में कार्यरत हैं।
भुए का लक्ष्य देबरीगढ़ को मॉडल इको-टूरिज्म गंतव्य बनाना और अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर करना है।

ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली मैथिली भुए को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में विशेष रूप से सराहा। इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की उनकी पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है। 30 अगस्त को भुए ने इस सम्मान पर खुशी और आभार व्यक्त किया।

संघर्ष से शुरू हुई यात्रा

मैथिली भुए एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। शुरुआती दिनों में उन्होंने तेंदू के पत्ते, बांस, महुआ, कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पाद इकट्ठा कर और बेचकर अपने परिवार का गुजारा किया। यह संघर्ष उन्हें एक नई दिशा की ओर ले गया।

2023 में उन्होंने देबरीगढ़ इको-टूरिज्म परियोजना से जुड़कर आजीविका का एक नया रास्ता खोजा। जंगल संरक्षण में उनके योगदान और पर्यटन को जोड़ने की सोच ने आसपास के गांवों की महिलाओं को भी इस पहल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

मन की बात में मिली राष्ट्रीय पहचान

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को प्रसारित मन की बात के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए के काम का उल्लेख करते हुए उनकी प्रशंसा की। भुए ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में मेरा नाम लिया और मेरे काम की तारीफ की। हमारी कोशिशों को पहचानने के लिए मैं उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।"

यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला उद्यमिता को लेकर देशभर में नीतिगत चर्चा तेज हो रही है। गौरतलब है कि 'मन की बात' में आम नागरिकों की सफलता की कहानियाँ साझा करना प्रधानमंत्री की एक स्थायी प्राथमिकता रही है।

40-50 महिलाओं को दी जा रही ट्रेनिंग

भुए इस समय लगभग 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षण दे रही हैं। इस प्रशिक्षण में पर्यटकों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार, उनकी जरूरतों को समझना और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना शामिल है।

ये महिलाएं स्मारिका की दुकानें (सोवेनियर शॉप्स), चाय की दुकानें, रेस्तरां, नेचर कैंप और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। प्रत्येक महिला को उसकी जिम्मेदारी के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

आम जनता पर असर

भुए की पहल ने देबरीगढ़ के आसपास के गांवों में महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के नए अवसर खोले हैं। वन उत्पादों पर निर्भर परिवारों को अब पर्यटन से जुड़ी नियमित आय मिल रही है, जिससे आर्थिक स्थिरता बढ़ी है।

भुए ने कहा, "मैं चाहती हूं कि और महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और इको-टूरिज्म के जरिए अपनी आजीविका कमाएं। मैं उन्हें ट्रेनिंग दे रही हूं ताकि वे आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों की सेवा कर सकें और देबरीगढ़ के विकास में योगदान दे सकें।"

क्या होगा आगे

मैथिली भुए की योजना है कि अधिक से अधिक महिलाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा जाए और देबरीगढ़ को एक मॉडल इको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए। 'मन की बात' में मिली राष्ट्रीय पहचान के बाद इस क्षेत्र में पर्यटकों की रुचि और बढ़ने की संभावना है, जो स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के और अवसर खोल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह सिर्फ प्रेरणादायक प्रचार तक सीमित रह जाती है। देबरीगढ़ जैसे वन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म की संभावना तभी पूरी तरह साकार होगी जब बुनियादी ढाँचा, प्रशिक्षण संसाधन और बाजार से जुड़ाव व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित किए जाएं। 40-50 महिलाओं तक पहुँचना एक उत्साहजनक शुरुआत है, लेकिन ओडिशा के वन-निर्भर समुदायों की व्यापक जरूरतों को देखते हुए यह पैमाना अभी बहुत छोटा है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैथिली भुए कौन हैं और वे किस काम के लिए जानी जाती हैं?
मैथिली भुए ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली हैं, जो इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म परियोजना से जुड़कर इस काम की शुरुआत की।
'मन की बात' में मैथिली भुए का जिक्र किस एपिसोड में हुआ?
PM नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए का उल्लेख करते हुए उनके इको-टूरिज्म और महिला सशक्तिकरण के काम की सराहना की। यह एपिसोड रविवार को प्रसारित हुआ।
मैथिली भुए कितनी महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं?
मैथिली भुए अभी लगभग 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षण दे रही हैं। इन महिलाओं को स्मारिका दुकानें, चाय दुकानें, रेस्तरां, नेचर कैंप और होमस्टे में काम के लिए तैयार किया जा रहा है।
देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ने से पहले मैथिली भुए क्या करती थीं?
2023 से पहले मैथिली भुए एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की सदस्य के रूप में तेंदू के पत्ते, बांस, महुआ, कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पाद इकट्ठा कर और बेचकर परिवार का गुजारा करती थीं।
देबरीगढ़ इको-टूरिज्म का स्थानीय महिलाओं पर क्या असर पड़ा है?
इस पहल ने देबरीगढ़ और आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए वन उत्पादों पर निर्भरता से अलग आजीविका के स्थायी अवसर खोले हैं। महिलाएं अब पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम कर आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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