'मन की बात' के 135वें एपिसोड में PM मोदी ने योग, पर्यावरण और नालंदा पर साझा किए प्रेरक विचार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 135वाँ एपिसोड 28 जून 2026 को रविवार को देशभर में प्रसारित हुआ। इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने योग, पर्यावरण संरक्षण, नालंदा विश्वविद्यालय की ज्ञान परंपरा, इको-ब्रिक्स निर्माण और गणेश उत्सव जैसे विषयों पर नागरिकों को प्रेरित किया।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के केंद्रपाड़ा की यात्रा के दौरान मोबाइल पर यह कार्यक्रम सुना। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि वे ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, झारसुगुड़ा विधायक टंकाधर त्रिपाठी, छेंडीपदा विधायक अगस्ती बेहरा और बालासोर विधायक मानस कुमार दत्ता के साथ 'मन की बात' सुन रहे थे।
प्रधान ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने योग, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी, नालंदा विश्वविद्यालय की ज्ञान परंपरा, महिलाओं द्वारा प्लास्टिक कचरे से इको-ब्रिक्स निर्माण और गणेश उत्सव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रेरक विचार साझा किए।'
कार्यक्रम के प्रमुख संदेश
इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने 'कैच द रेन' अभियान के ज़रिए वर्षा जल संरक्षण का संदेश दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे जलवायु संरक्षण और जल संकट से निपटने की दिशा में एक अहम पहल बताया। उन्होंने कहा कि 'मन की बात' देशभर में हो रही सकारात्मक पहलों को एक साझा मंच देता है।
गौरतलब है कि महिलाओं द्वारा प्लास्टिक कचरे से इको-ब्रिक्स बनाने की पहल को प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रेखांकित किया — यह जनभागीदारी से पर्यावरण समस्या के समाधान का एक व्यावहारिक उदाहरण है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 'मन की बात' की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश के हर नागरिक में आत्मविश्वास जगाता है। सिंधिया के अनुसार, प्रधानमंत्री अपने संबोधन में आम लोगों के उल्लेखनीय कार्यों को सामने लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक सोच और जनभागीदारी को बल मिलता है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद के सप्ताह में है और पर्यावरण संरक्षण पर वैश्विक चर्चा तेज़ है।
आम जनता पर असर
'मन की बात' को नागरिकों के स्वैच्छिक प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का माध्यम माना जाता है। इस कार्यक्रम के ज़रिए न केवल भारत में, बल्कि विश्वभर में भारतीय नागरिकों की सामुदायिक पहलों की जानकारी पहुँचती है।
क्या होगा आगे
'मन की बात' का अगला एपिसोड अगले माह प्रसारित होगा। 'कैच द रेन' जैसे अभियानों पर ज़मीनी असर की निगरानी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की ज़िम्मेदारी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इको-ब्रिक्स जैसी पहलें तभी व्यापक प्रभाव छोड़ सकती हैं जब इन्हें स्थानीय स्तर पर संस्थागत समर्थन मिले।