तेजस्वी यादव का NDA को चैलेंज: आरक्षित सीट छोड़ सामान्य सीट से लड़ें चुनाव
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने 30 अगस्त को पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए एनडीए नेताओं पर तीखा प्रहार किया। बिहार में आरक्षण समीक्षा को लेकर जारी सियासी उबाल के बीच तेजस्वी ने कहा कि जो नेता आरक्षण पर सवाल उठा रहे हैं, उनमें से कोई भी आरक्षण समाप्त करने की स्थिति में नहीं है।
मुख्य चुनौती
तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और एनडीए के सहयोगी दलों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'लुका-छिपी मत खेलिए। अगर दम है तो अपनी आरक्षित सीटों से इस्तीफा दे दीजिए और सामान्य सीट से चुनाव लड़कर देख लीजिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'अभी तक कोई पैदा नहीं हुआ है जो आरक्षण को खत्म कर सके।'
निशाने पर NDA के नेता
तेजस्वी यादव ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का नाम लेते हुए कहा कि ये नेता लगातार आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं, फिर भी आरक्षण की समीक्षा के पक्षधर नज़र आते हैं। उन्होंने नीतीश कुमार की पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा पर भी आरोप लगाया कि ये सभी आरक्षण विरोधी खेमे के साथ खड़े हैं।
RSS और BJP पर सीधा हमला
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि RSS और BJP शुरू से ही आरक्षण-विरोधी रही हैं। उन्होंने 2015 में तत्कालीन RSS प्रमुख मोहन भागवत द्वारा आरक्षण समीक्षा की बात कहे जाने का हवाला दिया और कहा कि उस समय बिहार की जनता ने इसका करारा जवाब दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नागपुर से निर्देश आते हैं कि एक नेता पक्ष में बोले और दूसरा विपक्ष में — ताकि जनमत को परखा जा सके।
विरोधाभास पर सवाल
तेजस्वी ने कहा कि एक तरफ ये नेता आरक्षण का लाभ उठाते हैं, सत्ता में रहते हुए मंत्री पद का फायदा लेते हैं, और दूसरी तरफ आरक्षण समाप्त करने वालों के साथ खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को समाज के हित की नहीं, बल्कि अपनी 'मलाई और कुर्सी' की चिंता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं कभी आरक्षण का व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। तेजस्वी यादव की इस चुनौती पर एनडीए की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में बिहार की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।