मन की बात में PM मोदी ने की बिजनौर की महिलाओं की तारीफ, ₹1 लाख से शुरू 'विदुर प्रेरणा हर्बल टी' पहुंची बड़े संस्थानों तक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2025 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गाँव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की सराहना की। इन महिलाओं द्वारा तैयार 'विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' आज देश के बड़े संस्थानों तक अपनी पहुँच बना चुकी है — और यह सफर महज ₹1 लाख की पूँजी से शुरू हुआ था।
चाय से जुड़ा अपनापन और आत्मनिर्भरता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारे देश में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है, ये अपनापन भी है। सुबह की शुरुआत हो, दोस्तों की मुलाकात हो या परिवार के साथ कुछ पल बिताने हों — चाय हर मौके का हिस्सा बन जाती है।' उन्होंने अपने और चाय के सुपरिचित रिश्ते का ज़िक्र करते हुए कहा, 'वैसे तो आप भी भलीभाँति जानते हैं मेरा चाय से रिश्ता क्या है। लेकिन आज मैं जिस चाय की चर्चा कर रहा हूँ, उसने सिर्फ स्वाद ही नहीं दिया, बल्कि अनेक बहनों के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई खुशबू भी घोल दी है।'
क्या है विदुर प्रेरणा हर्बल टी
लखीवाला गाँव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने 'विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' तैयार की है, जिसमें लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक सामग्रियाँ शामिल हैं। यह हर्बल मिश्रण पूरी तरह स्थानीय ज्ञान और परंपरागत आयुर्वेदिक सामग्री पर आधारित है।
गौरतलब है कि यह उत्पाद महिला सशक्तिकरण और 'वोकल फॉर लोकल' की उस व्यापक सरकारी मुहिम का हिस्सा है जिसे केंद्र सरकार पिछले कई वर्षों से प्रोत्साहित करती आ रही है।
राष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान
प्रधानमंत्री ने बताया कि अपने अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के कारण इस चाय ने बहुत कम समय में व्यापक पहचान बनाई। प्रयागराज महाकुंभ और दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय खाद्य महोत्सव में इस हर्बल चाय को विशेष सराहना मिली। विदेशों से आए आगंतुकों ने भी इसमें गहरी रुचि दिखाई, जो इस उत्पाद की वैश्विक संभावनाओं का संकेत है।
₹1 लाख से शुरू हुई प्रेरक यात्रा
मोदी ने इस पहल की सबसे उल्लेखनीय बात उसकी विनम्र शुरुआत को बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रयास केवल ₹1 लाख की पूँजी से शुरू हुआ था, और आज यह ब्रांड देश के बड़े संस्थानों तक पहुँच चुका है। प्रधानमंत्री ने इसे एक व्यापक संदेश के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब स्थानीय ज्ञान, प्रकृति और महिलाओं का आत्मविश्वास साथ आते हैं, तो एक छोटा-सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने पर ज़ोर दे रही है। विदुर प्रेरणा हर्बल टी का यह मॉडल दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और बाज़ार तक पहुँच मिले तो ग्रामीण महिला उद्यमिता राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ सकती है।