30 अगस्त 2026
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मन की बात 137: PM मोदी ने सराहा नागालैंड की वेसालु का फूल-उद्यम और ओडिशा की मैथिली का वन-संरक्षण

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मन की बात 137: PM मोदी ने सराहा नागालैंड की वेसालु का फूल-उद्यम और ओडिशा की मैथिली का वन-संरक्षण

सारांश

मन की बात के 137वें एपिसोड में PM मोदी ने दो महिलाओं की कहानी सुनाई — नागालैंड की वेसालु पुरो, जिन्होंने फूलों के शौक को दिल्ली-मुंबई तक पहुँचने वाले उद्यम में बदला, और ओडिशा की मैथिली भुए, जिन्होंने इको-टूरिज्म से जुड़कर 60 से अधिक महिलाओं को जंगल-संरक्षण की राह दिखाई।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को मन की बात के 137वें एपिसोड में दो महिलाओं की प्रेरक कहानियाँ साझा कीं।
नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो ने 2021 में एक चौथाई एकड़ ज़मीन पर ग्लेडियोलस की खेती शुरू की; पहले प्रयास में 5,000 से अधिक फूल खिले।
वेसालु के फूल अब दिल्ली और मुंबई तक बिकते हैं; सफलता में कृषि विज्ञान केंद्र की ट्रेनिंग की अहम भूमिका रही।
ओडिशा के देबरीगढ़ की मैथिली भुए देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़कर जंगल-संरक्षण की अगुआ बनीं।
मैथिली की प्रेरणा से आज 60 से अधिक महिलाएँ वन्यजीव सुरक्षा, घास के मैदान विकास और इको-टूरिज्म में सक्रिय हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को मन की बात के 137वें एपिसोड में नागालैंड की वेसालु पुरो और ओडिशा की मैथिली भुए की प्रेरक कहानियाँ देशवासियों के साथ साझा कीं। वेसालु ने एक साधारण शौक को व्यावसायिक फूलों की खेती में बदल दिया, जबकि मैथिली ने इको-टूरिज्म से जुड़कर जंगल-संरक्षण को अपनी आजीविका का आधार बना लिया। दोनों महिलाओं की यात्रा ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण-चेतना का जीवंत उदाहरण है।

वेसालु पुरो: शौक से उद्यम तक

नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो एक किसान परिवार में पली-बढ़ीं। बचपन से माता-पिता को खेती करते देखा और फूलों के प्रति गहरा लगाव रहा। साल 2021 में उन्होंने यही शौक लेकर छोटे पैमाने पर फूल उगाने की शुरुआत की।

धीरे-धीरे उन्हें बाज़ार की संभावना दिखी — शादी-विवाह और त्योहारों में फूलों की माँग कभी कम नहीं होती। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक खेती की ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने केवल एक चौथाई एकड़ ज़मीन पर ग्लेडियोलस के हज़ारों पौधे लगाए। पहले ही प्रयास में 5,000 से अधिक फूल खिल उठे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफर को रेखांकित करते हुए कहा, 'वेसालु पुरो की यात्रा हमें बताती है कि शौक जब मेहनत और सही मार्गदर्शन से जुड़ जाता है, तो वह नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है।' आज वेसालु के फूल नागालैंड से निकलकर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों तक पहुँच रहे हैं।

मैथिली भुए: जंगल की रक्षक, आजीविका की नई राह

ओडिशा के देबरीगढ़ क्षेत्र के गाँव 'धोड़रोकुसुम' की मैथिली भुए कुछ साल पहले तक प्रतिदिन जंगल जाती थीं — जलावन की लकड़ी, महुआ, केंदु पत्ता और बाँस की कोपलें लाने के लिए। उनके परिवार की कई ज़रूरतें इसी जंगल पर टिकी थीं।

स्थिति तब बदली जब मैथिली देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं। जंगल से उनका रिश्ता अब केवल उपभोग का नहीं, संरक्षण का भी बन गया। प्रधानमंत्री ने बताया कि मैथिली की प्रेरणा से आज 60 से अधिक महिलाएँ वन-संरक्षण में सक्रिय हैं — कोई वन्यजीवों की सुरक्षा में, कोई घास के मैदानों के विकास में, तो कुछ इको-टूरिज्म गतिविधियों में।

स्वच्छता और पहचान पर PM का संदेश

इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने स्वच्छता को सामुदायिक पहचान से जोड़ते हुए कहा, 'हमारे गाँव हों या शहर, हमारी नदियाँ हों या तीर्थस्थल — इनकी पहचान हमारे व्यवहार से भी बनती है। और जब स्वच्छता इस व्यवहार में शामिल हो जाती है, उस स्थान की शोभा और बढ़ जाती है।'

गौरतलब है कि मन की बात कार्यक्रम नियमित रूप से देश के उन साधारण नागरिकों को मंच देता है जो असाधारण काम कर रहे हैं — यह एपिसोड भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

वेसालु और मैथिली की कहानियाँ ग्रामीण महिलाओं के लिए दोहरा संदेश लेकर आती हैं: स्थानीय संसाधनों का उपयोग और सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ाव मिलकर स्थायी आजीविका बना सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ग्रामीण महिला उद्यमिता और वन-आधारित आजीविका योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इस तरह की सफलता की कहानियाँ नीति-निर्माताओं के लिए ज़मीनी साक्ष्य का काम कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कृषि विज्ञान केंद्रों और इको-टूरिज्म जैसी योजनाओं की पहुँच देश के हर फेक ज़िले और हर देबरीगढ़ तक है। वेसालु और मैथिली की कामयाबी अपवाद न रहे, नियम बने — इसके लिए ज़मीनी प्रशिक्षण नेटवर्क और बाज़ार-संपर्क में व्यवस्थागत निवेश ज़रूरी है, जिसका ब्यौरा इस एपिसोड में नहीं आया। इन कहानियों की असली कसौटी यह होगी कि अगले पाँच साल में कितनी और वेसालु और मैथिली तैयार होती हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मन की बात के 137वें एपिसोड में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने 30 अगस्त 2026 को मन की बात के 137वें एपिसोड में नागालैंड की वेसालु पुरो और ओडिशा की मैथिली भुए की प्रेरक कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने स्वच्छता को सामुदायिक पहचान से जोड़ने का संदेश भी दिया।
वेसालु पुरो कौन हैं और उन्होंने क्या हासिल किया?
वेसालु पुरो नागालैंड के फेक जिले की एक महिला किसान हैं, जिन्होंने 2021 में एक चौथाई एकड़ ज़मीन पर ग्लेडियोलस की खेती शुरू की। कृषि विज्ञान केंद्र की ट्रेनिंग के बाद पहले ही प्रयास में 5,000 से अधिक फूल खिले और आज उनके फूल दिल्ली व मुंबई तक बिकते हैं।
मैथिली भुए ने ओडिशा में जंगल-संरक्षण में कैसे योगदान दिया?
ओडिशा के देबरीगढ़ की मैथिली भुए देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं और जंगल-संरक्षण को अपनी आजीविका का हिस्सा बनाया। उनकी प्रेरणा से आज 60 से अधिक महिलाएँ वन्यजीव सुरक्षा, घास के मैदान विकास और इको-टूरिज्म में सक्रिय हैं।
मन की बात कार्यक्रम क्या है और यह कितनी बार प्रसारित होता है?
मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम है, जिसमें वे देश के साधारण नागरिकों की असाधारण उपलब्धियाँ और सामाजिक संदेश साझा करते हैं। 30 अगस्त 2026 को इसका 137वाँ एपिसोड प्रसारित हुआ।
वेसालु पुरो की फूलों की खेती में कृषि विज्ञान केंद्र की क्या भूमिका रही?
स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र ने वेसालु पुरो को ग्लेडियोलस की वैज्ञानिक खेती की ट्रेनिंग दी, जिससे उन्हें सही तकनीक और मार्गदर्शन मिला। इसी ट्रेनिंग के बाद उनके पहले प्रयास में 5,000 से अधिक फूल खिले और उनका उद्यम सफल हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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