मन की बात में PM मोदी ने एवोकाडो खेती की तारीफ की, बोले — 'इनोवेटिव किसानों ने कमाई की नई राह खोजी'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में एवोकाडो की खेती को किसानों की आय बढ़ाने के एक नए और सफल माध्यम के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एवोकाडो के ज़रिए देश के इनोवेटिव किसानों ने कमाई की एक नई राह खोज ली है — जिससे उपभोक्ताओं के टोस्ट का स्वाद भी बढ़ा और खेत की आमदनी भी।
एवोकाडो की बढ़ती माँग और किसानों के लिए अवसर
मोदी ने कार्यक्रम में कहा, 'आजकल एवोकाडो फल की बड़ी धूम है। इस फल को पहले शायद ही कोई जानता था। इसकी वैल्यू और डिमांड दोनों कम थी, लेकिन आज इसे डाइनिंग टेबल पर खूब देखा जा रहा है। आज यह हेल्थ और प्रीमियम मार्केट की पसंद बन गया है। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए भी ये बहुत मददगार है।' उन्होंने इस बदलाव को किसानों की उद्यमशीलता और डिजिटल जागरूकता का परिणाम बताया।
आंध्र प्रदेश के वरदराज की प्रेरक कहानी
प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के कडपा निवासी किसान वरदराज का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि वरदराज वर्षों से अपने खेत में टमाटर और केले की परंपरागत खेती करते थे। एक दिन उन्होंने किसी मित्र के खेत में एवोकाडो की फसल देखी और यूट्यूब के माध्यम से इस फसल की जानकारी जुटाई। अब तक वे करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं और सीधे स्थानीय दुकानों को आपूर्ति कर रहे हैं। मोदी के अनुसार, 'नई फसल, वैज्ञानिक सलाह और सीधी मार्केटिंग से उनके छोटे से फार्म की कमाई पूरी तरह बदल गई है।'
तमिलनाडु और कर्नाटक के किसानों की सफलता
तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने आधी हेक्टेयर ज़मीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की और अच्छे दाम के साथ आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। इसी कड़ी में कर्नाटक के चिक्कमगलुरु के किसानों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ कुछ किसान भाई-बहनों ने कॉफी के बागान के बीच एवोकाडो लगाया है, जिससे कॉफी और काली मिर्च के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और प्रीमियम फलों की घरेलू माँग में वृद्धि हो रही है। एवोकाडो, जो पहले मुख्यतः आयात किया जाता था, अब देश के विभिन्न राज्यों में उगाया जा रहा है। गौरतलब है कि यह बदलाव न केवल किसानों की आय में विविधता ला रहा है, बल्कि आयात-निर्भरता को भी कम करने की दिशा में एक स्वाभाविक कदम है।
क्या होगा आगे
प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के बाद कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि एवोकाडो की खेती में किसानों की रुचि और बढ़ सकती है। यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए जानकारी हासिल कर खेती में बदलाव लाने का यह मॉडल देश के अन्य छोटे किसानों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।