30 अगस्त 2026
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मन की बात में PM मोदी ने एवोकाडो खेती की तारीफ की, बोले — 'इनोवेटिव किसानों ने कमाई की नई राह खोजी'

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मन की बात में PM मोदी ने एवोकाडो खेती की तारीफ की, बोले — 'इनोवेटिव किसानों ने कमाई की नई राह खोजी'

सारांश

मन की बात में PM मोदी ने एवोकाडो को किसानों की नई कमाई का ज़रिया बताया। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के किसानों की सफलता की कहानियाँ सुनाते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि डिजिटल जागरूकता और नई फसलें मिलकर छोटे किसान की तकदीर बदल सकती हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को 'मन की बात' में एवोकाडो खेती को किसानों की आय बढ़ाने का नया माध्यम बताया।
आंध्र प्रदेश के कडपा के किसान वरदराज यूट्यूब से जानकारी लेकर अब तक करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं।
तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने आधी हेक्टेयर ज़मीन पर एवोकाडो उगाकर अच्छी कमाई की।
कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में किसानों ने कॉफी बागान के बीच एवोकाडो लगाकर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता निकाला।
मोदी ने एवोकाडो को हेल्थ और प्रीमियम मार्केट की बढ़ती माँग से जोड़ते हुए इसे किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में एवोकाडो की खेती को किसानों की आय बढ़ाने के एक नए और सफल माध्यम के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एवोकाडो के ज़रिए देश के इनोवेटिव किसानों ने कमाई की एक नई राह खोज ली है — जिससे उपभोक्ताओं के टोस्ट का स्वाद भी बढ़ा और खेत की आमदनी भी।

एवोकाडो की बढ़ती माँग और किसानों के लिए अवसर

मोदी ने कार्यक्रम में कहा, 'आजकल एवोकाडो फल की बड़ी धूम है। इस फल को पहले शायद ही कोई जानता था। इसकी वैल्यू और डिमांड दोनों कम थी, लेकिन आज इसे डाइनिंग टेबल पर खूब देखा जा रहा है। आज यह हेल्थ और प्रीमियम मार्केट की पसंद बन गया है। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए भी ये बहुत मददगार है।' उन्होंने इस बदलाव को किसानों की उद्यमशीलता और डिजिटल जागरूकता का परिणाम बताया।

आंध्र प्रदेश के वरदराज की प्रेरक कहानी

प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के कडपा निवासी किसान वरदराज का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि वरदराज वर्षों से अपने खेत में टमाटर और केले की परंपरागत खेती करते थे। एक दिन उन्होंने किसी मित्र के खेत में एवोकाडो की फसल देखी और यूट्यूब के माध्यम से इस फसल की जानकारी जुटाई। अब तक वे करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं और सीधे स्थानीय दुकानों को आपूर्ति कर रहे हैं। मोदी के अनुसार, 'नई फसल, वैज्ञानिक सलाह और सीधी मार्केटिंग से उनके छोटे से फार्म की कमाई पूरी तरह बदल गई है।'

तमिलनाडु और कर्नाटक के किसानों की सफलता

तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने आधी हेक्टेयर ज़मीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की और अच्छे दाम के साथ आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। इसी कड़ी में कर्नाटक के चिक्कमगलुरु के किसानों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ कुछ किसान भाई-बहनों ने कॉफी के बागान के बीच एवोकाडो लगाया है, जिससे कॉफी और काली मिर्च के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।

आम जनता और किसानों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में स्वास्थ्य-सचेत उपभोक्ताओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और प्रीमियम फलों की घरेलू माँग में वृद्धि हो रही है। एवोकाडो, जो पहले मुख्यतः आयात किया जाता था, अब देश के विभिन्न राज्यों में उगाया जा रहा है। गौरतलब है कि यह बदलाव न केवल किसानों की आय में विविधता ला रहा है, बल्कि आयात-निर्भरता को भी कम करने की दिशा में एक स्वाभाविक कदम है।

क्या होगा आगे

प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के बाद कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि एवोकाडो की खेती में किसानों की रुचि और बढ़ सकती है। यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए जानकारी हासिल कर खेती में बदलाव लाने का यह मॉडल देश के अन्य छोटे किसानों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मिट्टी और बाज़ार तक पहुँच पर निर्भर है — जो हर किसान को सुलभ नहीं। जब तक कोल्ड चेन, एमएसपी समर्थन और कृषि विस्तार सेवाएँ इन नई फसलों को व्यापक आधार नहीं देतीं, ये प्रेरक कहानियाँ अपवाद ही रहेंगी, नियम नहीं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने मन की बात में एवोकाडो का ज़िक्र क्यों किया?
PM मोदी ने 30 अगस्त को 'मन की बात' में एवोकाडो की खेती को किसानों की आय बढ़ाने के एक नए और सफल विकल्प के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने इसे इनोवेटिव किसानों की उद्यमशीलता और डिजिटल जागरूकता का उदाहरण बताया।
आंध्र प्रदेश के किसान वरदराज ने एवोकाडो की खेती कैसे शुरू की?
कडपा के किसान वरदराज ने अपने मित्र के खेत में एवोकाडो की फसल देखने के बाद यूट्यूब से जानकारी जुटाई और खेती शुरू की। वे अब तक करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं और सीधे स्थानीय दुकानों को आपूर्ति कर रहे हैं।
कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने एवोकाडो से कितनी ज़मीन पर खेती की?
तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने आधी हेक्टेयर ज़मीन पर एवोकाडो की खेती शुरू की और अच्छे दाम के साथ कमाई में वृद्धि दर्ज की।
कर्नाटक के चिक्कमगलुरु के किसान एवोकाडो से कैसे अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं?
चिक्कमगलुरु के किसानों ने कॉफी बागान के बीच एवोकाडो के पेड़ लगाए हैं, जिससे कॉफी और काली मिर्च के साथ-साथ एवोकाडो से भी अतिरिक्त आमदनी हो रही है। यह मिश्रित खेती का एक सफल उदाहरण है।
भारत में एवोकाडो की खेती किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है?
एवोकाडो की घरेलू माँग तेज़ी से बढ़ रही है क्योंकि यह हेल्थ और प्रीमियम मार्केट में लोकप्रिय हो रहा है। इसकी खेती किसानों को परंपरागत फसलों से अलग एक उच्च-मूल्य विकल्प देती है और आयात-निर्भरता को भी कम करती है।
राष्ट्र प्रेस
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