महिला आरक्षण पर MP विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल को, भाजपा-कांग्रेस में टकराव तय

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महिला आरक्षण पर MP विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल को, भाजपा-कांग्रेस में टकराव तय

सारांश

27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर भाजपा-कांग्रेस के बीच जबरदस्त टकराव होगा। कांग्रेस ने बैठक बुलाकर रणनीति तय की, जबकि नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। 17 अप्रैल को लोकसभा में विधेयक 298 बनाम 230 वोट से विफल रहा था।

Key Takeaways

  • 27 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश विधानसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर एकदिवसीय विशेष सत्र आयोजित होगा।
  • कांग्रेस विधायक दल की बैठक सुबह 9 बजे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर होगी।
  • 17 अप्रैल को लोकसभा में विधेयक 298 वोट पाकर भी विफल रहा, जबकि जरूरी थे 352 वोट
  • कांग्रेस 33 प्रतिशत महिला आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के भीतर लागू करने की मांग कर रही है।
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर विधेयक का समर्थन न करने का आरोप लगाते हुए विशेष सत्र बुलाया।
  • सत्र दो पालियों में होगा — सुबह 11:00 से 1:30 बजे और दोपहर 3:00 से शाम 5:30 बजे तक।

भोपाल, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में 27 अप्रैल 2025 को बुलाए गए एकदिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण यानी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक होना लगभग तय है। कांग्रेस ने सत्र से पहले ही अपने विधायकों की बैठक बुलाकर रणनीति पक्की कर ली है।

कांग्रेस की तैयारी और नेता प्रतिपक्ष का रुख

कांग्रेस विधायक दल की बैठक भोपाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर सुबह 9:00 बजे आयोजित की जाएगी। इस बैठक का मकसद सदन के भीतर पार्टी की एकजुट प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

उमंग सिंघार ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण को लेकर भाजपा सरकार की नीयत संदिग्ध है और इस मुद्दे को जानबूझकर प्रक्रियागत बहानों की आड़ में लटकाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस सत्र में सरकार को हर मोर्चे पर घेरेगी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने में हो रही देरी पर सवाल उठाएगी और केंद्र सरकार तथा मध्य प्रदेश सरकार के रुख में कथित विरोधाभासों को सदन के पटल पर रखेगी।

सिंघार की शर्त — परिसीमन से पहले लागू हो आरक्षण

सिंघार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि महिला आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही लागू किया जाता है, तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। लेकिन अगर इसे परिसीमन से जोड़कर टाला गया, तो पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।

यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में ही परिसीमन की शर्त जोड़ी गई थी, जिसे लेकर विपक्ष शुरू से आपत्ति जताता रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह शर्त आरक्षण को व्यावहारिक रूप से अगले एक दशक तक टालने का रास्ता है।

17 अप्रैल की विफलता और विशेष सत्र की पृष्ठभूमि

यह विशेष सत्र उस घटनाक्रम के बाद बुलाया गया है जब 17 अप्रैल 2025 को लोकसभा में महिला आरक्षण और सीटों के विस्तार से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका। विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े और विरोध में 230 वोट, जबकि पास होने के लिए 352 वोट जरूरी थे।

इस विफलता के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर विधेयक का समर्थन न करने का आरोप लगाया और मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की। यह कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भाजपा कांग्रेस को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश कर रही है।

विशेष सत्र का कार्यक्रम और एजेंडा

आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 27 अप्रैल को विधानसभा की बैठक दो पालियों में होगी — सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक। अध्यक्ष के निर्देशानुसार समय में बदलाव संभव है।

सत्र की कार्यसूची में 'नारी शक्ति वंदन — महिलाओं का समग्र विकास और सशक्तिकरण' विषय पर विस्तृत चर्चा शामिल है। दोनों पक्षों के तर्क-वितर्क से यह सत्र महिला आरक्षण की राजनीति, इसकी समय-सीमा और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर केंद्रित रहेगा।

गहरा विश्लेषण — राजनीतिक दांव और असली सवाल

गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सितंबर 2023 में संसद ने पारित किया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना की शर्त जोड़ी गई। अनुमान है कि अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया 2026-2027 से पहले पूरी नहीं होगी, जिसका अर्थ है कि यह आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनावों तक प्रभावी नहीं हो सकता।

यह विरोधाभास उजागर करता है कि जहां भाजपा महिला सशक्तिकरण का श्रेय लेना चाहती है, वहीं उसी पार्टी की सरकार ने कानून में ऐसी शर्तें जोड़ीं जो इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल देती हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस जो अब इस मुद्दे पर आक्रामक है, उसके खुद के शासनकाल में भी महिला आरक्षण विधेयक दशकों तक अटका रहा।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 27 अप्रैल के विशेष सत्र में कोई ठोस प्रस्ताव पारित होता है या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी का मंच बनकर रह जाता है।

Point of View

लेकिन क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता। विडंबना यह है कि भाजपा ने 2023 में जो कानून बनाया, उसमें ही परिसीमन की शर्त डालकर इसे अगले दशक तक टाल दिया, और अब उसी कानून पर विशेष सत्र बुला रही है। कांग्रेस भी दशकों तक इस विधेयक को रोकती रही, इसलिए उसकी नई आक्रामकता भी चुनावी गणित से प्रेरित दिखती है। असली सवाल यह है कि भारत की लगभग आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व कब मिलेगा — और इसका जवाब किसी विशेष सत्र से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से आएगा।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश विधानसभा का महिला आरक्षण पर विशेष सत्र कब है?
मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल 2025 को भोपाल में आयोजित होगा। यह सत्र दो पालियों में — सुबह 11 बजे से 1:30 बजे और दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है और इसे क्यों नहीं लागू किया गया?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद द्वारा पारित कानून है जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है। इसे लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना की शर्त जोड़ी गई है, जिससे यह 2029 से पहले प्रभावी होना मुश्किल है।
17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक क्यों विफल हुआ?
17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। विधेयक पास होने के लिए 352 वोट जरूरी थे, जो नहीं मिले।
कांग्रेस का महिला आरक्षण पर क्या रुख है?
कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि यदि आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर लागू हो तो कांग्रेस समर्थन देगी। लेकिन परिसीमन की आड़ में देरी करने पर पार्टी कड़ा विरोध करेगी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विशेष सत्र क्यों बुलाया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोकसभा में विधेयक की विफलता के बाद कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए यह विशेष सत्र बुलाया। इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करना और राजनीतिक दबाव बनाना बताया जा रहा है।
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