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महिला आरक्षण और परिसीमन पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव की महत्वपूर्ण टिप्पणी

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महिला आरक्षण और परिसीमन पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सारांश

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर बात की, वहीं कांग्रेस के राकेश सिन्हा ने भी अपनी राय रखी। जानें क्या है दोनों पक्षों की सोच।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण और परिसीमन पर भाजपा का रुख स्पष्ट है।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को ठीक करना है।
राजीव गांधी की सोच का प्रभाव आज भी महसूस किया जा रहा है।
2029 चुनावों के लिए महिला आरक्षण की चर्चा महत्वपूर्ण है।

रांची, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने महिला आरक्षण को लागू करने के साथ-साथ प्रस्तावित परिसीमन पर अपने विचार साझा किए और विपक्ष की आलोचना की। कांग्रेस के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी।

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "परिसीमन एक सामान्य प्रक्रिया है जो लगातार चलती रहती है। देश की जनसंख्या में वृद्धि हुई है, जिसके कारण सत्ता में बैठे लोग मानते हैं कि सीटों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। जब देश की जनसंख्या कम थी, तब लोकसभा में 543 सीटें और राज्यसभा में 200 सीटें थीं। इसलिए जनसंख्या के साथ-साथ सीटों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जाएगा। लेकिन कांग्रेस हमेशा इस पर नकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। ये हर मुद्दे पर 'नहीं' ही कहते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। यह समय-समय पर एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं का संचालन करता है। यह देश में छठी या सातवीं बार हो रहा है। यह प्रक्रिया घुसपैठियों, मृत और डुप्लीकेट नामों को मतदाता सूची से हटाने के लिए अपनाई जाती है। जो लोग फर्जी वोटिंग के जरिए जीतते थे, उन्हें एसआईआर से परेशानी होती है।"

इससे पहले प्रतुल शाहदेव ने यह भी कहा था, "जब यूपीए के शासन में महिला आरक्षण विधेयक पेश हुआ था, तब अखिलेश यादव की पार्टी ने पहले भी इसे नकार दिया था। सपा के सांसदों ने महिलाओं पर असम्मानजनक टिप्पणियां की थीं। अखिलेश यादव इस विधेयक को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। इस विधेयक को 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किया गया है। वर्तमान जनगणना का पूरा डेटा आने में अभी समय लगेगा। इसलिए 2029 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस विधेयक को पेश करना उचित नहीं होगा। इसलिए सभी को महिला विधेयक का स्वागत करना चाहिए।"

वहीं, महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा, "हम महिला आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं। यह कांग्रेस पार्टी और स्वर्गीय राजीव गांधी की सोच का परिणाम था, जो उनके दृष्टिकोण और मानसिकता का प्रमाण है। आज शहरी और ग्रामीण दोनों स्थानीय निकायों में 14 लाख से अधिक महिलाओं का निर्वाचित होना कांग्रेस पार्टी के इसी दृष्टिकोण का प्रमाण है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि कांग्रेस नेताओं ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। यह मुद्दा राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और समाज में महिलाओं की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण क्या है?
महिला आरक्षण का मतलब है कि महिलाओं के लिए संसद और विधानसभा में निश्चित संख्या में सीटें आरक्षित की जाएंगी।
परिसीमन की प्रक्रिया क्या है?
परिसीमन एक प्रक्रिया है जिसके तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को जनसंख्या के आधार पर पुनः निर्धारित किया जाता है।
क्या कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है?
कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी स्थायी राय रखी है, जैसा कि राकेश सिन्हा ने कहा।
एसआईआर प्रक्रिया का क्या महत्व है?
एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग मतदाता सूची में से ग़ैर कानूनी नामों को हटाने के लिए किया जाता है।
2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू होगा?
भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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