10 अगस्त 2026
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महिला आरक्षण पर अकाली दल का स्पष्ट रुख: हरसिमरत बोलीं — जनसंख्या फॉर्मूला पंजाब की 13 सीटें घटाएगा, 50% वृद्धि हो

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महिला आरक्षण पर अकाली दल का स्पष्ट रुख: हरसिमरत बोलीं — जनसंख्या फॉर्मूला पंजाब की 13 सीटें घटाएगा, 50% वृद्धि हो

सारांश

अकाली दल ने साफ किया — महिला आरक्षण से कोई एतराज़ नहीं, एतराज़ उस जनसंख्या फॉर्मूले से है जो पंजाब की 13 लोकसभा सीटें और घटा सकता है। हरसिमरत कौर बादल ने सभी राज्यों में 50% सीट वृद्धि का विकल्प सुझाया, जिससे पंजाब को 19-20 सीटें और महिलाओं को 7-8 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।

मुख्य बातें

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल 2023 से महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करता रहा है।
पार्टी का विरोध जनसंख्या-आधारित परिसीमन फॉर्मूले से है, जिससे पंजाब की 13 लोकसभा सीटें और घट सकती हैं।
बादल ने सभी राज्यों में सीटें 50% बढ़ाने का प्रस्ताव दिया — इससे पंजाब को 19-20 सीटें और महिलाओं को 7-8 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार से महिला आरक्षण पर जल्द फैसले की माँग की।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने विवादित बयान पर सफाई दी, कहा — संदर्भ से काटकर देखा गया।
कांग्रेस ने एफसीआरए और परिसीमन विधेयक के मौजूदा प्रावधानों का विरोध करने की प्रतिबद्धता जताई।

संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक, परिसीमन, एफसीआरए और छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सियासी तापमान 10 अगस्त को तेज़ी से चढ़ा। शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण की विरोधी नहीं है, बल्कि उस जनसंख्या-आधारित परिसीमन फॉर्मूले की विरोधी है जो पंजाब की मौजूदा 13 लोकसभा सीटों को और कम कर सकता है। विपक्षी दलों ने सरकार से सदन में इन सभी मुद्दों पर जवाबदेही की माँग की।

अकाली दल का पक्ष: आरक्षण हाँ, जनसंख्या फॉर्मूला नहीं

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पेश होने के समय से ही उसके समर्थन में है और अप्रैल में जब यह मुद्दा फिर उठा, तब भी पार्टी का रुख नहीं बदला। उनका विरोध केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण के प्रस्ताव से है।

बादल ने तर्क दिया कि पिछले कुछ वर्षों में रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण पंजाब से बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक अन्य राज्यों में पलायन कर गए हैं। ऐसे में जनसंख्या-आधारित फॉर्मूला राज्य के लिए प्रतिनिधित्व की दृष्टि से नुकसानदेह साबित हो सकता है और पंजाब की लोकसभा सीटें 13 से और घट सकती हैं।

50% सीट वृद्धि का प्रस्ताव

बादल ने एक वैकल्पिक समाधान सुझाया। उनके अनुसार, यदि विधेयक में सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि का प्रावधान जोड़ा जाए, तो पंजाब की सीटें बढ़कर लगभग 19 से 20 हो सकती हैं। इससे महिलाओं के लिए भी 7 से 8 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।

उन्होंने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में अकाली दल महिला आरक्षण का विरोध क्यों करेगा। पार्टी की तीन सूत्री माँग है — महिला आरक्षण लागू हो, सभी राज्यों में सीटें समान रूप से 50% बढ़ाई जाएँ, और जनसंख्या-आधारित फॉर्मूले से बचा जाए।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: सरकार जल्द फैसला करे

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का रुख स्पष्ट है — सरकार को महिला आरक्षण विधेयक पर जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए। वहीं, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब की राजनीति पर कहा कि अकाली दल और अन्य दलों के बीच गठबंधन का फैसला उनका आंतरिक मामला है; कांग्रेस पंजाब में अपने बलबूते चुनाव लड़ने के लिए तैयार है और उसे जीत का पूरा भरोसा है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित ज्यादती और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इन घटनाओं की जानकारी थी। गोगोई ने कहा कि सरकार एक मुद्दे पर धीरे-धीरे सहमत हुई है, लेकिन अब उसे बिना देरी के दोनों प्रमुख मुद्दों पर सहमति देनी चाहिए।

थरूर विवाद: संदर्भ से काटकर देखा गया बयान

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने हालिया विवादित बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी बातचीत का संदर्भ समझा जाना चाहिए। थरूर ने स्वीकार किया था कि राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को कुछ अन्य समूहों के विरोध-प्रदर्शनों जितना 'जेन जी' समर्थन नहीं मिला — लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी पार्टी पर हमला नहीं था, बल्कि एक तथ्यात्मक टिप्पणी थी।

थरूर ने यह भी कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों ने इन मुद्दों को इन कार्यक्रमों से काफी पहले उठाया था और उनकी बातचीत को एक टिप्पणी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस का रुख

थरूर ने एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि पार्टी इन विधेयकों के अंतिम पाठ की प्रतीक्षा कर रही है। हालाँकि, अब तक सामने आए प्रावधानों के आधार पर कांग्रेस इन विधेयकों से सहमत नहीं है और उनका पुरजोर विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अंतिम रणनीति विधेयक के अंतिम स्वरूप को देखकर तय की जाएगी।

गौरतलब है कि यह बहस ऐसे समय में तेज़ हुई है जब मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मोर्चों पर टकराव जारी है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों पर संसद में होने वाली बहस की दिशा तय करेगी कि महिला आरक्षण का रास्ता कब और किस रूप में खुलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दरअसल पंजाब के क्षेत्रीय हित को राष्ट्रीय एजेंडे से ऊपर रखना है। यह विरोधाभास महत्वपूर्ण है: जो दल महिलाओं के प्रतिनिधित्व की वकालत करता है, वही सीट-वृद्धि की शर्त जोड़कर विधेयक को जटिल बना रहा है। 50% सीट वृद्धि का प्रस्ताव संसदीय ढाँचे में बड़े बदलाव की माँग है जो अपने आप में एक लंबी राजनीतिक प्रक्रिया है — इसे महिला आरक्षण से जोड़ना विधेयक को और लटकाने का जोखिम पैदा करता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बारीकियत को अक्सर चूक जाती है कि क्षेत्रीय दलों की 'सशर्त सहमति' व्यवहार में अवरोध का काम करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकाली दल महिला आरक्षण विधेयक का विरोध क्यों कर रहा है?
अकाली दल महिला आरक्षण का विरोध नहीं करता — पार्टी 2023 से इसके समर्थन में है। पार्टी का विरोध जनसंख्या-आधारित परिसीमन फॉर्मूले से है, जिससे पंजाब की मौजूदा 13 लोकसभा सीटें और घट सकती हैं क्योंकि राज्य से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर चुके हैं।
हरसिमरत कौर बादल ने क्या वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है?
हरसिमरत कौर बादल ने सुझाया कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि की जाए। इससे पंजाब की सीटें 13 से बढ़कर लगभग 19-20 हो सकती हैं और महिलाओं के लिए 7-8 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
जनसंख्या-आधारित परिसीमन फॉर्मूला पंजाब के लिए क्यों नुकसानदेह है?
पिछले कुछ वर्षों में रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण पंजाब से बड़ी संख्या में युवा और नागरिक दूसरे राज्यों में चले गए हैं। जनसंख्या के आधार पर सीटें तय होने पर कम जनसंख्या वाले पंजाब को संसद में कम प्रतिनिधित्व मिलेगा।
कांग्रेस का महिला आरक्षण और एफसीआरए विधेयक पर क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार से महिला आरक्षण पर जल्द फैसले की माँग की है। एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर शशि थरूर ने कहा कि अब तक सामने आए प्रावधानों के आधार पर कांग्रेस इन विधेयकों का पुरजोर विरोध करेगी, हालाँकि अंतिम रणनीति विधेयक के अंतिम पाठ के बाद तय होगी।
शशि थरूर के विवादित बयान का मामला क्या है?
थरूर ने कहा था कि राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को कुछ अन्य समूहों के विरोध-प्रदर्शनों जितना 'जेन जी' समर्थन नहीं मिला। बाद में उन्होंने सफाई दी कि यह एक तथ्यात्मक टिप्पणी थी, पार्टी पर हमला नहीं, और उनके बयान को संदर्भ से काटकर देखा गया।
राष्ट्र प्रेस
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