महिला आरक्षण पर अकाली दल का स्पष्ट रुख: हरसिमरत बोलीं — जनसंख्या फॉर्मूला पंजाब की 13 सीटें घटाएगा, 50% वृद्धि हो
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक, परिसीमन, एफसीआरए और छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सियासी तापमान 10 अगस्त को तेज़ी से चढ़ा। शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण की विरोधी नहीं है, बल्कि उस जनसंख्या-आधारित परिसीमन फॉर्मूले की विरोधी है जो पंजाब की मौजूदा 13 लोकसभा सीटों को और कम कर सकता है। विपक्षी दलों ने सरकार से सदन में इन सभी मुद्दों पर जवाबदेही की माँग की।
अकाली दल का पक्ष: आरक्षण हाँ, जनसंख्या फॉर्मूला नहीं
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पेश होने के समय से ही उसके समर्थन में है और अप्रैल में जब यह मुद्दा फिर उठा, तब भी पार्टी का रुख नहीं बदला। उनका विरोध केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण के प्रस्ताव से है।
बादल ने तर्क दिया कि पिछले कुछ वर्षों में रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण पंजाब से बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक अन्य राज्यों में पलायन कर गए हैं। ऐसे में जनसंख्या-आधारित फॉर्मूला राज्य के लिए प्रतिनिधित्व की दृष्टि से नुकसानदेह साबित हो सकता है और पंजाब की लोकसभा सीटें 13 से और घट सकती हैं।
50% सीट वृद्धि का प्रस्ताव
बादल ने एक वैकल्पिक समाधान सुझाया। उनके अनुसार, यदि विधेयक में सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि का प्रावधान जोड़ा जाए, तो पंजाब की सीटें बढ़कर लगभग 19 से 20 हो सकती हैं। इससे महिलाओं के लिए भी 7 से 8 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
उन्होंने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में अकाली दल महिला आरक्षण का विरोध क्यों करेगा। पार्टी की तीन सूत्री माँग है — महिला आरक्षण लागू हो, सभी राज्यों में सीटें समान रूप से 50% बढ़ाई जाएँ, और जनसंख्या-आधारित फॉर्मूले से बचा जाए।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: सरकार जल्द फैसला करे
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का रुख स्पष्ट है — सरकार को महिला आरक्षण विधेयक पर जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए। वहीं, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब की राजनीति पर कहा कि अकाली दल और अन्य दलों के बीच गठबंधन का फैसला उनका आंतरिक मामला है; कांग्रेस पंजाब में अपने बलबूते चुनाव लड़ने के लिए तैयार है और उसे जीत का पूरा भरोसा है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित ज्यादती और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इन घटनाओं की जानकारी थी। गोगोई ने कहा कि सरकार एक मुद्दे पर धीरे-धीरे सहमत हुई है, लेकिन अब उसे बिना देरी के दोनों प्रमुख मुद्दों पर सहमति देनी चाहिए।
थरूर विवाद: संदर्भ से काटकर देखा गया बयान
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने हालिया विवादित बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी बातचीत का संदर्भ समझा जाना चाहिए। थरूर ने स्वीकार किया था कि राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को कुछ अन्य समूहों के विरोध-प्रदर्शनों जितना 'जेन जी' समर्थन नहीं मिला — लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी पार्टी पर हमला नहीं था, बल्कि एक तथ्यात्मक टिप्पणी थी।
थरूर ने यह भी कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों ने इन मुद्दों को इन कार्यक्रमों से काफी पहले उठाया था और उनकी बातचीत को एक टिप्पणी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस का रुख
थरूर ने एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि पार्टी इन विधेयकों के अंतिम पाठ की प्रतीक्षा कर रही है। हालाँकि, अब तक सामने आए प्रावधानों के आधार पर कांग्रेस इन विधेयकों से सहमत नहीं है और उनका पुरजोर विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अंतिम रणनीति विधेयक के अंतिम स्वरूप को देखकर तय की जाएगी।
गौरतलब है कि यह बहस ऐसे समय में तेज़ हुई है जब मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मोर्चों पर टकराव जारी है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों पर संसद में होने वाली बहस की दिशा तय करेगी कि महिला आरक्षण का रास्ता कब और किस रूप में खुलता है।