महिला आरक्षण बिल पर फौजिया खान का सवाल: अब तक लागू क्यों नहीं हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भागीदारी देना है।
- नेताओं द्वारा इस बिल पर विभिन्न मत व्यक्त किए जा रहे हैं।
- महिलाओं की जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
- सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि इस बिल को लागू करने में देरी हो रही है।
- महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल पर देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। विभिन्न नेताओं ने इस बिल पर अपने विचार साझा किए हैं, जिसमें सवाल भी उठाए गए हैं और समर्थन भी दिखाया गया है।
एनसीपी (एसपी) की पूर्व राजसभा सदस्य फौजिया खान ने इस बिल को लेकर केंद्र सरकार पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "2023 में इसे एक ऐतिहासिक निर्णय और कानून बताया गया था, लेकिन यह अब तक लागू नहीं हो पाया है। तीन साल ऐसे ही निकल गए हैं।"
फौजिया ने आगे कहा कि उस समय जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें लगाई गई थीं, लेकिन अब कहा जा रहा है कि इन्हें हटा दिया जाएगा। उनका सवाल था कि अगर इन्हें हटाना था तो 2023 में क्यों लगाया गया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय यह एक 'इवेंट मैनेजमेंट' था, जिसमें संसद की गैलरी में लोगों को बैठाया गया और इसे प्रचारित किया गया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की जनसंख्या 50 प्रतिशत है और उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए। महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अधिकार मिलना आवश्यक है। कई वर्षों से उनके साथ धोखा किया गया है।
वहीं, कांग्रेस विधायक मनोज बिस्वास ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए इसे अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा, "बिहार में आरक्षण का बहुत महत्व है। अगर यह नहीं होता तो हम जैसे लोग इस स्तर तक नहीं पहुंच पाते।"
उन्होंने बताया कि वे ओबीसी वर्ग से आते हैं और समाज के निचले तबके के लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण आवश्यक है। कांग्रेस विधायक ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
शिरोमणि अकाली दल की नेता कंचनप्रीत कौर ने भी महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर एक महिला घर संभाल सकती है, तो वह समाज को भी बेहतर तरीके से संभाल सकती है।"
कंचनप्रीत कौर ने कहा कि महिलाएं जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करतीं और उनके नेतृत्व में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में समर्थन और सवाल दोनों उठ रहे हैं। कुछ नेता इसके लागू होने में देरी पर प्रश्न उठा रहे हैं, जबकि अन्य इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।