महिलाओं की आवाज़: अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर उठाई चिंता
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल 2029 से पहले लागू होना चाहिए।
- कांग्रेस का प्रस्ताव एक साजिश है, ऐसा अमित शाह का कहना है।
- भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और 'परिसीमन' पर हुई चर्चा का उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे पांच राज्यों में कुल 543 सीटों में वर्तमान संख्या 129 है, जो 23.76%25 बनती है। अब जब इन राज्यों का आवंटन बढ़कर 195 सीटों तक पहुंचेगा, तो इसका प्रतिशत 23.87%25 होगा। पहले यह 23.76%25 था और अब 23.87%25 होगा। इस प्रक्रिया में किसी को भी नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि मैं इस देश की मातृशक्ति से स्पष्ट कहना चाहता हूं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव एक सुनियोजित साजिश है, जिसका उद्देश्य महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू होने से रोकना है। इसलिए जो यह कहते हैं कि हमारे राज्यों में समान भार होना चाहिए, मैं सहमत हूं। महिला आरक्षण बिल 2029 से पहले लागू होगा और हम इसकी साजिश को विफल नहीं होने देंगे। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके अधिकारों का रोड़ा कौन है।
अमित शाह ने कहा कि मैं महिलाओं को यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस का प्रस्ताव, महिलाओं के लिए आरक्षण को 2029 के बाद टालने का एक सोचा-समझा प्रयास है। इसलिए मैं उन सभी का समर्थन करता हूं, जो हमारे राज्यों में समान प्रतिनिधित्व की बात करते हैं। महिलाओं के लिए आरक्षण 2029 से पहले लागू होना चाहिए। कुछ सदस्यों ने भ्रांति फैलाई कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं यहाँ संविधान की नीतियों को स्पष्ट करना चाहता हूं। भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। इंडिया महागठबंधन तुष्टिकरण की राजनीति के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग उठा रहा है। मुझे बताएं कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है। भारतीय संविधान इसको मान्यता नहीं देता।
अमित शाह ने कांग्रेस को चेताते हुए कहा कि भाषण देने से देश का पिछड़ा वर्ग आपको हितैषी नहीं मानेगा। 1947 से 2014 तक, आप ओबीसी का विरोध करते रहे। अब जब आपको उनकी आवश्यकता समझ में आई है, तब आप ओबीसी के समर्थन में हैं। यह दिखावटी प्रेम है, पिछड़ा वर्ग और देश की जनता यह जानती है और अब देश की महिलाएं भी जानेंगी कि उनका अधिकार कांग्रेस ने छीना।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल संख्या का 40%25 है। मोदी सरकार के कार्यकाल में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया है। हमारी सरकार ने राज्यों को ओबीसी सूची में संशोधन करने का अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया है।